उत्तराखंड: नौकरी करने के बाद भी वेतन के लिए जूझ रहे निजी स्कूलों के शिक्षक-कर्मचारी
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उत्तराखंड: नौकरी करने के बाद भी वेतन के लिए जूझ रहे निजी स्कूलों के शिक्षक-कर्मचारी
देश के दो सरकारी बैंकों ने अपने ग्राहकों को फायदा देने के लिए लोन पर ब्‍याज दरों में कटौती की है.

उत्तराखंड (Uttarakhand) में लॉकडाउन (Lockdown) से स्कूल बंद होने का खामियाजा प्राइवेट स्कूलों के शिक्षकों को भुगतना पड़ रहा है. काम करने के बावजूद अधिकांश स्कूलों के शिक्षक वेतन (Teacher's salary) के लिए जूझ रहे हैं.

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नैनीताल. उत्तराखंड (Uttarakhand) में लॉकडाउन (Lockdown) से स्कूल बंद होने का खामियाजा प्राइवेट स्कूलों के शिक्षकों को भुगतना पड़ रहा है. काम करने के बावजूद अधिकांश स्कूलों के शिक्षक वेतन (Teacher's salary) के लिए जूझ रहे हैं. इसके बाद भी वे बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई करा रहे हैं. लॉकडाउन में स्कूल बंद हो गए. स्कूलों के बंद होने के कारण अप्रैल और मई, इन 2 महीने की फीस जमा नहीं हो पाई. अधिकांश स्कूल ऐसे हैं, जहां के एक भी बच्चों की फीस उनके अभिभावक ने जमा नहीं की है, जबकि शेष स्कूलों में 5 से 15 फीसदी बच्चों की फीस जमा की गई है.

शिवसेना के महामंत्री भोपाल सिंह कार्की ने सभी सरकारी और निजी स्कूलों की फीस माफ करने की मांग की है. उन्होंने कहा कि कुछ स्कूल अभिवावकों से फीस जमा करने को कह रहे हैं, शिवसेना इसका विरोध करता है. उन्होंने कहा कि अगर सरकार और प्रशासन ने इस मामले में कोई पहल नहीं की तो शिवसेना कार्यकर्ता धरना-प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे.

250 प्राइवेट स्कूलों में 3000 से अधिक शिक्षक करते हैं नौकरी
केवल हल्द्वानी ब्लॉक में तकरीबन 250 प्राइवेट स्कूल हैं, जिनमें 3000 से अधिक शिक्षक नौकरी करते हैं. कुछ बड़े स्कूलों को छोड़ दें तो शेष स्कूलों में फीस जमा नहीं होने के कारण आर्थिक स्थिति खराब है. अधिकांश स्कूलों ने अप्रैल महीने का वेतन शिक्षकों को नहीं दिया है, जबकि ऐसे स्कूल भी हैं, जिन्होंने पूरी सैलरी न देकर आधी दी है. जबकि कई स्कूल ऐसे भी हैं, जिन्होंने सिर्फ जरूरी खर्च चलाने के लिए पैसे दिए हैं. शिक्षकों की स्थिति का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि वह बिना वेतन के भी काम करने को मजबूर हैं.
कर्मचारी कर रहे वेतन का इतंजार


कारखाने और रिजॉर्ट में काम करने वाले 30 हजार से अधिक लोगों को दो माह से वेतन नहीं मिला है. इसके चलते लोग रोजाना अपना खाता चेक करने बैंक पहुंच रहे हैं. बताया कि किसी का लोन तो किसी को कर्ज वाले लोग परेशान कर रहे हैं. लॉकडाउन के चलते रामनगर के रिजॉर्ट मालिक व अन्य कारोबारियों ने अपने कर्मचारियों के वेतन में कटौती करना शुरू कर दिया है. जिन लोगों को रिजॉर्ट में 25 हजार रुपये वेतन मिलता था, उनके खातों में 25 सौ रुपये डाले गए हैं.

25 हजार वाले को मिली 2500 रुपए सैलरी
रामनगर में 250 से अधिक रिजॉर्ट्स और होटल हैं, जिनमें 25 हजार से अधिक लोग काम करते हैं. लॉकडाउन में इनमें से करीब 20 हजार लोगों को उनके घर भेजा जा चुका है. करीब 5 हजार लोग विभिन्न रिजॉर्ट्स में अभी भी कार्यरत हैं. रवि कुमार ने बताया वह एक रिजॉर्ट में मैनेजर के पद पर काम कर रहे हैं. वेतन 25 हजार रुपये है, लेकिन इस माह उसे 25 सौ रुपये दिए गए हैं. राज कुमार, विवेक सिंह, विशेष कुमार बताते हैं कि उनका वेतन 15 हजार रुपए है, मालिक ने उन्हें 3-3 हजार रुपये वेतन स्वरूप दिए हैं. यही हाल फैक्ट्री में काम करने वाले कर्मचारियों का भी है.

2 माह से वेतन का इतंजार कर रहे कर्मचारी
कारखाने और रिजॉर्ट में काम करने वाले 30 हजार से अधिक लोगों को 2 माह से वेतन नहीं मिला है. इसके चलते लोग रोजाना अपना खाता चेक करने बैंक पहुंच रहे हैं. बताया कि किसी का लोन तो किसी को कर्ज वाले लोग परेशान कर रहे हैं.

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