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उत्तराखंडः ट्रस्ट नहीं करेगा गोल्ज्यू मंदिर का प्रबंधन... हाईकोर्ट ने पुजारियों को बनाया पक्षकार, मांगे दस्तावेज़

अल्मोड़ा में स्थित न्याय के देवता गोल्ज्यू के मंदिर में लोग न्याय मांगने के लिए चिट्ठियां लिखते हैं. (फ़ाइल फ़ोटो)

अल्मोड़ा में स्थित न्याय के देवता गोल्ज्यू के मंदिर में लोग न्याय मांगने के लिए चिट्ठियां लिखते हैं. (फ़ाइल फ़ोटो)

पुनर्विचार याचिका में पुजारियों ने कहा कि मंदिर की स्थापना भी उनके परिवार ने ही की थी जिसके प्रमाण मौजूद हैं.

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नैनीताल. अल्मोड़ा के चितई गोल्ज्यू मंदिर के प्रबंधन के लिए ट्रस्ट बनाने को लेकर हाईकोर्ट ने अपना आदेश वापस ले लिया है और पुजारियों को पक्षकार बनाते हुए एक हफ्ते में उसने अपने दावे के समर्थन में दस्तावेज पेश करने का आदेश दिया है. दरअसल एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने मंदिर का प्रबंधन के लिए एक ट्रस्ट बनाने का आदेश दिया था. इसे मंदिर के पुजारियों ने चुनौती दी और कहा कि उनकी बात नहीं सुनी गई. पुजारियों ने यह भी कहा कि मंदिर की स्थापना भी उनके परिवार ने ही की थी जिसके प्रमाण मौजूद हैं.

समिति का गठन और चुनौती

बता दें कि दीपक रुवाली की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने 4 मार्च 2020 को अल्मोड़ा के न्याय के देवता गोल्ज्यू मंदिर की प्रबंध समिति गठन करने का आदेश दिया था. इसके बाद अल्मोड़ा जिला प्रशासन ने एक कमेटी का गठन कर दिया जिसमें सभी सरकारी कर्मचारियों को नियुक्त कर दिया.



समिति में सिर्फ सरकारी अधिकारियों को ही रखने पर मंदिर के संस्थापक परिवार की संध्या पंत ने हाईकोर्ट में विशेष अपील दाखिल कर चुनौती दी. याचिका में कहा गया कि उनके परिवार के केशव दत्त और भोला दत्त पंत ने 1919 में गोल्ज्यू मंदिर की स्थापन की. मंदिर बनाने के लिए 650 रुपये का भुगतान भी किया गया था.
याचिका में कहा गया  है कि हाईकोर्ट के आदेश की आड़ लेकर ज़िला प्रशासन ने ज़िला प्रशासन की कमेटी बना दी जबकि उनको सुनवाई का मौका तक नहीं दिया गया. याचिका में कहा गयाकि धार्मिक गतिविधियों में भी प्रशासन हस्तक्षेप कर रहा है जबकि हाईकोर्ट ने गैर धार्मिक कार्यों के लिए कमेटी बनाने की बात कही थी.

पुरानी व्यवस्था लागू रहेगी

पुजारियों के वकील दुष्यंत मैनाली ने बताया कि कमेटी में डीएम, एसडीएम, जिला पर्यटन अधिकारी, तहसीलदार आदि ही शामिल हैं. मंदिर से जुड़े कोई शामिल नहीं हैं, जो सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन है.

दुष्यंत मैनाली कहते हैं कि जो फैसला कोर्ट ने अब दिया उसके बाद मैनेजमेंट कमेटी बनाने वाले सरकारी आदेश प्रभावहीन हो गए हैं. इससे जब तक कोर्ट में मामला चल रहा है या फिर हाईकोर्ट कोई अन्य आदेश नहीं देता है तब तक पुरानी व्यवस्था ही लागू रहेगी.
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