लॉकडाउन में सोशल वर्क में जुटे हैं नैनीताल के ये ग्रामीण... सड़क की मरम्मत से लेकर, निर्माण तक कर रहे श्रमदान से
Nainital News in Hindi

लॉकडाउन में सोशल वर्क में जुटे हैं नैनीताल के ये ग्रामीण... सड़क की मरम्मत से लेकर, निर्माण तक कर रहे श्रमदान से
नैनीताल जिले में कोई सड़क बना रहा है तो कोई टूटी सड़कों के गड्ढे भर रहा है.

सड़क न होने से गांव की सब्ज़ियां समय से मंड़ी नहीं पहुंच पातीं और आर्थिक लाभ गांव तक.

  • Share this:
नैनीताल. पहाड़ में लॉकडाउन में मिली छूट का इस्तेमाल अपने सामाजिक कार्यों में कर रहे हैं, वह भी सोशल डिस्टेंसिंग के साथ. नैनीताल जिले में कोई सड़क बना रहा है तो कोई टूटी सड़कों के गड्ढे भर रहा है. यहां तक कि कई लोग 7 से 1 बजे तक अपने खेतों में काम कर रहे हैं. नैनीताल के देवीधुरा के ग्रामीण जब सरकारों से हार गए तो लॉकडाउन के दौरान उन्होंने गांव की सड़क खुद बनाने का फ़ैसला लिया. इसके बाद उन्होंने श्रमदान कर सड़क बनाने का ज़िम्मा उठाया. रोज़ाना ये युवा गांव को सड़क से जोड़ने में जुटे रहते हैं और अपने काम को अंजाम देते हैं.

बाइक का रास्ता तैयार 

वीआईपी ज़िले नैनीताल के देवीधूरा गांव में सड़क न होने से इन लोगों को काफ़ी परेशानियां आती थीं जिसके चलते गांव की सब्ज़ियां समय से मंड़ी नहीं पहुंच पातीं और आर्थिक लाभ गांव तक.



यह गांव नैनीताल शहर से 13 किलोमीटर दूर है लेकिन गांव वालों को 2 किलोमीटर सड़क तक पैदल ही आना पड़ता था. अब तक ग्रामीणों को गांव के बाहर ही अपनी बाइक या गाड़ी को जंगल में पार्क करना पड़ता था.



लॉकडाउन कुछ और नहीं हो पा रहा तो ये लोग खाली समय के दौरान सड़क बनाने में जुट गए. युवाओं की इस पहल के बाद गांव तक बाइक दौड़ने लगी है अब ये कार का रास्ता तैयार करने में जुटे हैं.

शिक्षा-स्वास्थ्य बने चुनौती

देवीधूरा गांव के राजेन्द्र प्रसाद कहते हैं कि पिछले दिनों सड़क के लिए 4 लाख रुपये स्वीकृत भी हुएथे लेकिन आज तक सड़क नहीं बन सकी. कई बार गुहार लगाने के बाद भी जब सरकारी सिस्टम ने जवाब दे दिया तो अब लोग खुद सड़क को बनाने में जुट गए हैं.

गांव के ही दयाल कुमार बताते हैं कि सड़क के अभाव बच्चों को स्कूल आने-जाने में दिक्कत होती थी. गांव में किसी के बीमार होने की दशा में सबसे ज़्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ता थ. इसकी वजह से अब वे लोग गांव की सड़क बना रहे हैं.

तिरछाखेत नगारी गांव भी जुटा काम में

नगारी गांव भवाली से 5 किलोमीटर दूर है. यहां के लोग सालों से सड़क के गड्ढे भरने की मांग विधायक से लेकर सांसद तक सभी से करते रहे लेकिन किसी ने नहीं सुनी. लॉकडाउन के दौरान जब सभी काम-धंधे बंद हो गए तो गांव के लोगों ने सड़क के गड्ढे भरने का काम खुद शुरु कर दिया.

बंद बाज़ार में गांव के लोगों को सड़क के गड्डे भरने के लिए न सीमेंट मिला और न ही अन्य सामान.  गांव के युवाओं ने गांव में लोगों के सामने यह समस्या रखी तो लोगों ने अपने घरों में अन्य कार्य के लिए रखा सीमेंट और दूसरा सामान दे दिया. फिर गांव के लोगों ने मसाला खुद तैयार कर गड्ढे भर दिए.

गांव के प्रधान विनोद कहते हैं कि लॉकडाउन में समय काटने का इससे बढिया जरिया नहीं हो सकता. इसमें गांव के विकास के लिए युवा आगे आ रहे हैं तो खेल-खेल में सड़क में बने गञे भी भर जा रहे हैं. वह कहते हैं कि यह पहल जारी रहेगी.

लालफ़ीताशाही और समाधान

पूर्व प्रधान संजीव भगत कहते हैं कि गांव तक तीन किलोमीटर सड़क अलग तरह से बनी है. कभी विधायक ने पैसा दिया, तो कुछ सांसद निधि से बना, सड़क कुछ हिस्सा का जिला विकास प्राधिकरण ने बनवाया तो कुछ हिस्सा अन्य मद से तैयार करवाया गया.

इसके चलते इसकी मरम्मत में दिक्कतें आती हैं लेकिन अब गांव के लोग खुद इसको दुरुस्त कर रहे हैं जो यह अच्छी पहल है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज

corona virus btn
corona virus btn
Loading