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हाथियों को भगाने के लिए मिर्च की बॉल, पटाखों के इस्तेमाल की क्रूरता क्यों: नैनीताल हाई कोर्ट

Virendra Bisht | News18 Uttarakhand
Updated: October 10, 2019, 6:08 PM IST
हाथियों को भगाने के लिए मिर्च की बॉल, पटाखों के इस्तेमाल की क्रूरता क्यों: नैनीताल हाई कोर्ट
नैनीताल हाईकोर्ट में हाथियों को भगाने के लिए क्रूर तरीकों का इस्तेमाल करने के ख़िलाफ़ क्रूरता रोकने के लिए एक जनहित याचिका दायर की गई है. (फ़ाइल फ़ोटो)

रामनगर (Ramnagar) की एक संस्था ने जनहित याचिका (PIL) दाखिल कर कहा है कि उत्तराखण्ड (Uttarakhand) में 11 हाथी कॉरिडोर (Elephant Corridor) हैं. इनमें से ज़्यादातर पर अतिक्रमण हो गया है.

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नैनीताल. राज्य (Uttarakhand) में हाथियों (Elepahants) की आवाजाही को बाधित किए जाने और उन पर अवैध निर्माण के साथ ही हाथियों को भगाने की वन विभाग (Forest Department) की तकनीक पर नैनीताल हाईकोर्ट (Nainital High Court) ने संज्ञान लिया है. एक संस्था की जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की खण्डपीठ ने आज सरकार से 15 अक्टूबर तक स्थिति स्पष्ट करने के आदेश दिए हैं. हाईकोर्ट ने वन विभाग से पूछा है कि हाथियों को भगाने के लिए मिर्च की बॉल (Chilly Balls) और पटाखों (fire crackers) के इस्तेमाल जैसी क्रूरता क्यों की जा रही है?

हाथी कॉरिडोर पर अतिक्रमण 

बता दें कि रामनगर की एक संस्था ने जनहित याचिका दाखिल कर कहा है कि उत्तराखण्ड में 11 हाथी कॉरिडोर हैं. इनमें से ज़्यादातर पर अतिक्रमण हो गया है जिससे हाथियों की आवाजाही पूरी तरह से बाधित हो गई है.

कॉर्बेट पार्क के आस-पास तीन हाथी कॉरिडोर का हवाला देते हुए याचिका में कहा गया है कि मलानी कोटा, चिल्किया कोटा व दक्षिण पतली दून तो कई जगह पूरी तरह से बंद हो गए हैं और कुछ पर निर्माण कार्य जारी है.

ramnagar, Elephant Attack, पिछले कुछ सालों में हाथियों द्वारा हमले के 30 मामले सामने आए हैं. रामनगर मोहान मार्ग पर 6 महीने में 12 मामले रिपोर्ट किए गए हैं.
पिछले कुछ सालों में हाथियों द्वारा हमले के 30 मामले सामने आए हैं. रामनगर मोहान मार्ग पर 6 महीने में 12 मामले रिपोर्ट किए गए हैं.


वन्यजीवों को ख़तरा 

याचिका में कहा गया है कि इससे हाथियों के व्यवहार में बदलाव आ रहा है. याचिका में कहा गया है कि पिछले कुछ सालों में हाथियों द्वारा हमले के 30 मामले सामने आए हैं. रामनगर मोहान मार्ग पर 6 महीने में 12 मामले रिपोर्ट किए गए हैं. याचिका में बताया गया है कि एक घंटे में करीब 126 वाहनों की आवाजाही इस मार्ग पर होने से वन्य जीवों के लिए खतरा पैदा हो गया है.
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याचिका में कहा गया है कि केन्द्र सरकार के पर्यटन मंत्रालय की रिपोर्ट को भी दरकिनार कर दिया गया है और इन हाथी कॉरिडोर में पर्यटन गतिविधियों को अंजाम दिया जा रहा है. याचिका में केन्द्र सरकारी की संस्तुतियों को लागू करने की मांग की गई है.

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First published: October 10, 2019, 3:53 PM IST
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