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क्या सिर्फ़ ग्राम पंचायतों पर ही लागू होगा पंचायती राज संशोधन एक्ट पर हाईकोर्ट का फ़ैसला?

Virendra Bisht | News18 Uttarakhand
Updated: September 19, 2019, 6:28 PM IST
क्या सिर्फ़ ग्राम पंचायतों पर ही लागू होगा पंचायती राज संशोधन एक्ट पर हाईकोर्ट का फ़ैसला?
पंचायती राज संशोधन एक्ट पर उत्तराखंड हाईकोर्ट के फैसले के बाद राजनीतिक हलचल तो मची ही है लेकिन एक कानूनी पेंच भी फंस गया है.

हाईकोर्ट के फ़ैसले से इतना तो साफ़ है कि ग्राम पंचायत पर यह आदेश लागू होगा लेकिन ज़िला पंचायत और क्षेत्र पंचायत पर यह आदेश लागू होने को लेकर कानून के जानकारों में एक राय नहीं है.

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नैनीताल. पंचायती राज संशोधन एक्ट (Panchayati Raj Amendment Act) पर उत्तराखंड हाईकोर्ट (Uttarakhand High Court) के फैसले के बाद राजनीतिक हलचल (Political Storm) तो मची ही है लेकिन एक कानूनी पेंच (Legal issue) भी फंस गया है. दरअसल पंचायती राज संशोधन एक्ट पर दिए गए आदेश में हाईकोर्ट (Nainital High Court) ने यह तो साफ़ कर दिया कि इस एक्ट के प्रावधान 25 जुलाई, 2019 से लागू होंगे लेकिन यह साफ़ नहीं किया गया है कि यह आदेश किस-किस पर लागू होगा. हाईकोर्ट के फ़ैसले से इतना तो साफ़ है कि ग्राम पंचायत (Gram Panchayat) पर यह आदेश लागू होगा लेकिन ज़िला पंचायत (Zila Panchayat) और क्षेत्र पंचायत (Kshetra Panchayat)पर यह आदेश लागू होने को लेकर कानून के जानकारों (Legal Experts) में ही एक राय नहीं है. ऐसे में जबकि पंचायत चुनावों की उलटी गिनती शुरु हो चुकी है यह असमंजस राजनीतिक दलों की मुश्किलें बढ़ा सकता है.

इसलिए है कंफ़्यूज़न 

उत्तराखंड हाईकोर्ट के आदेश से यह तो साफ़ है कि दो से अधिक बच्चों वालों के चुनाव लड़ने पर पाबंदी ग्राम पंचायत पर लागू नहीं होगी. लेकिन क्षेत्र पंचायत सदस्य, ज़िला पंचायत सदस्य, ब्लॉक प्रमुख, ज़िला पंचायत अध्यक्ष पर यह लागू होगा या नहीं यह साफ़ नहीं हो पाया है.

दरअसल हाईकोर्ट ने अपने आदेश में ग्राम पंचायत की अपात्रता आर्टिकल 8 का तो आदेश में ज़िक्र किया है मगर ज़िला पंचायत की अपात्रता की आर्टिकल 90 और क्षेत्र पंचायत की आर्टिकल 53 का आदेश में कोई ज़िक्र नहीं किया गया है. यही वजह है कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद सवाल इस बात का खड़ा हो गया है कि क्या यह आदेश सिर्फ ग्राम पंचायत पर ही लागू होगा या फिर इसे ज़िला पंचायत और क्षेत्र पंचायत पर भी लागू किया जा सकेगा.

जानकार एकमत नहीं 

कानून के जानकारों में भी इसे लेकर मतभेद हैं. हाईकोर्ट में अधिवक्ता डीके जोशी कहते हैं कि अगर क़ानून की दृष्टि से देखें तो यह आदेश सिर्फ़ ग्राम पंचायत स्तर के लिए आया है, ज़िला पंचायत और क्षेत्र पंचायत के लिए नहीं. हालांकि वह कहते हैं कि यह देखना होगा कि इस आदेश की व्याख्या कैसे की जाती है, इसे लागू कैसे किया जाता है.

इसके विपरीत हाईकोर्ट के अधिवक्ता राजीव बिष्ट कहते हैं कि ये आदेश आर्टिकल 90 और आर्टिकल 53 पर भी लागू होगा, भले ही भूलवश उसका आदेश में ज़िक्र करना रह गया हो.
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आगे क्या?

ऐसे में यह सवाल तो उठता ही है कि क्या इस मामले के दोनों पक्ष अपने-अपने तरीके से इसकी व्याख्या नहीं करेंगे? चूंकि शुक्रवार से नामांकन प्रक्रिया शुरु हो रही है इसलिए इस मामले को साफ़ करना भी ज़रूरी है. यह होगा कैसे?

राजीव बिष्ट बताते हैं कि इसके लिए क्लेरिफ़िकेशन एप्लीकेशन डाली जा सकती है. और इसका अर्थ यह भी है कि अभी पंचायती राज संशोधन विधेयक पर कानूनी प्रक्रिया बंद नहीं हुई है.

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First published: September 19, 2019, 6:24 PM IST
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