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विश्व फोटोग्राफी दिवस... नैनीताल में बेरोज़गार हैं फ़िल्म के असली हीरो, सरकार से बंधी उम्मीद

कोरोना वायरस के चलते लगे लॉकडाउन की वजह से नैनीताल के फ़ोटोग्राफ़र्स को कैमरे बेचने की नौबत आ गई है.

कोरोना वायरस के चलते लगे लॉकडाउन की वजह से नैनीताल के फ़ोटोग्राफ़र्स को कैमरे बेचने की नौबत आ गई है.

हिंदी फिल्म 'चांद के पार चलो' में नैनीताल के एक फ़ोटोग्राफर की कहानी को दिखाया गया है.

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नैनीताल. फिल्म चांद के पार चलो शायद आपको भी याद हो. नैनीताल के एक फ़ोटोग्राफर की कहानी को बड़े पर्दे इस कदर दिखाया गया है कि हर कोई नैनीताल आकर इनसे फ़ोटो इनसे ज़रूर खिंचवाते हैं. लेकिन कोरोना वायरस का ग्रहण इनके काम पर ऐसा लगा कि बड़े पर्दे के इन सितारों को कैमरे बेचने की नौबत आ गई है. लॉकडाउन की वजह से प्रदेश का पर्यटन व्यवसाय चौपट हो चुका है और इस व्यवसाय से जुड़े लोगों के लिए रोज़ी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है. अब इन्हें सरकार से मदद की उम्मीद है.

फ़िल्मी संघर्ष और असली दिक्कत

नैनीताल में करीब 40 फोटोग्राफर हैं जो झील के आस पास सैलानियों की फोटो खींचकर अपना गुज़ारा चलाते हैं. पिछले साल फिल्मी पर्दे पर उतरी हिंदी फ़िल्म 'चांद के पार चलो' में नैनीताल के फोटोग्राफरों के संघर्षको दिखाया गया था. इसमें एक फोटोग्राफर द्वारा अपना सब कुछ लगाने के बाद एक लड़की को स्टार बनाने की कहानी है.



लॉकडाउन की वजह से असली दुनिया के इन लोगों का हौसला अब जवाब देने लगा है. 22 मार्च से लॉकडाउन होने के साथ ही ये फोटोग्राफर बेरोज़गार हो गए थे. अब पर्यटकों के आने की उम्मीद में ये लोग झील किनारे अपना समय खुद की खींची तस्वीरों को देखकर बिता रहे हैं.
कोरोना के बाद से ही पर्यटकों को खोज रही आखें और कैमरे के लैंस अब थकने लगी हैं. हालत यह है कि घर में राशन-पानी की दिक्कतें होने लगी है और अब इनके सामने कैमरे बेचने की नौबत आ गई है.

कैमरे बेचने की नौबत

कई दशकों से नैनीझील के आसपास फोटो खिंचकर अपना घर चला रहे अनिल कुमार कहते हैं कि पर्यटन ठप होने से उनका काम खत्म हो गया है और सरकार से कोई मदद नहीं मिली है. अनिल कहते हैं कि फोटोग्राफी उनका रोजगार ही नहीं बल्कि शौक और जुनून है. उनकी तस्वीरों को विदेशों में भी पंसद किया गया. लेकिन आज स्थिति यह हो गई है कि घर चलाने के लिए उनके सामने कैमरा बेचने की नौबत आ गई है.

फ़ोटोग्राफर एसोसिएशन के उपाध्यक्ष नरेश भारती कहते हैं कि जब तक पर्यटक नैनीताल नहीं आएंगे तब तक उनका काम नहीं चलेगा. अब उम्र भी ऐसी नहीं है कि कोई पत्थर तोड़ सकें. भारती ने कहते हैं कि सरकार अगर उनको बैंक से लोन दे और उनकी मदद करे तो वे लोग भी कुछ और काम शुरु कर सकते हैं.
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