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Nainital News: मरने के बाद भी जिंदा हैं चिड़ियाघर के ये जानवर, जानें पूरी डिटेल

चिड़ियाघर या जंगल के किसी भी क्षेत्र में अगर किसी दुर्लभ प्रजाति के जानवर की मौत हो जाती है तो उसके मांस को उसकी खाल से ...अधिक पढ़ें

    हिमांशु जोशी/नैनीताल. उत्तराखंड के नैनीताल में कई पर्यटन स्थल पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं. इन्हीं में एक है नैनीताल के तल्लीताल में स्थित गोविंद बल्लभ पंत हाई एल्टीट्यूड चिड़ियाघर (Nainital Zoo). हजारों की संख्या में पर्यटक हर साल यहां पहुंचते हैं. यहां कई तरह के जानवरों का दीदार किया जा सकता है. हालांकि आप यहां कुछ ऐसे जानवर भी देख सकते हैं, जिनकी मौत हो गई है लेकिन उनकी टैक्सीडर्मी कर उन्हें प्रदर्शनी के रूप में दिखाया जा रहा है.

    दुर्लभ है ये प्रजातियां
    यहां साइबेरियन टाइगर और स्नो लेपर्ड की टैक्सीडर्मी कर उन्हें संभालकर रखा गया है. यह दोनों ही प्रजातियां काफी दुर्लभ हैं. पर्यटक चिड़ियाघर में मौजूद जानवरों के साथ इन दुर्लभ प्रजाति के मृत जानवरों के बारे में भी जानकारी ले सकते हैं. बता दें कि साल 2004 में स्नो लेपर्ड को दार्जिलिंग से नैनीताल लाया गया था. साल 2010 में रानी नाम की इस मादा स्नो लेपर्ड की मौत हो गई थी और अगले साल 2011 में इसकी टैक्सीडर्मी की गई. वहीं साल 1997 में नैनीताल चिड़ियाघर में दो साइबेरियन बाघ कुणाल और महेश को लाया गया था. साल 2001 में महेश की मौत हो गई थी हालांकि कुणाल की मौत साल 2011 में 17 साल की उम्र में हुई थी. साल 2013 में टाइगर की टैक्सीडर्मी तैयार की गई थी.

    जू रेंजर अजय रावत ने बताया कि चिड़ियाघर में टाइगर और लेपर्ड के अलावा मोनाल, ब्राउन वुड आउल, लाइन लिनीयेटेड क्लीज फीजेंट, हिमालयन ब्लैक बियर, गोल्डन फीजेंट की टैक्सीडर्मी करके जू के नेचर इंटरप्रीटेशन सेंटर में रखा गया है. इन्हें इस तरह से रखने का मुख्य उद्देश्य लोगों को इन जानवरों के बारे में जानकारी देना और इनकी पहचान कराना है.

    Tags: Nainital news, Uttarakhand news

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