उत्तराखंड बॉर्डर पर जरूरत से ज्यादा एक्टिव नजर आ रहा है नेपाल, चीन के इशारे पर बना रहा सड़क

नेपाल चीन के इशारे पर भारत की सीमा पर गतिविधियां कर रहे है.
नेपाल चीन के इशारे पर भारत की सीमा पर गतिविधियां कर रहे है.

नेपाल (Nepal) ने उत्तराखंड में भारत से लगती सीमा पर सेना (Army) की सक्रियता को बढ़ा दिया है. साथ ही नेपाल इन इलाकों पर सड़कों (Road) का जाल बिछा रहा है. नेपाल ऐसा करके दिखा रहा है कि वह चीन (China) के इशारे पर काम कर रहा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 14, 2020, 5:15 PM IST
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पिथौरागढ़. भारत का सबसे भरोसेमंद दोस्त कहा जाने वाला नेपाल (Nepal) की सेना इन दिनों भारत से लगती सीमा पर कुछ ज्यादा ही सक्रिय नजर आ रही है. चाइना बॉर्डर (China Border) को जोड़ने वाली लिपुलेख रोड बनने के बाद उत्तराखंड के सटे बॉर्डर पर नेपाल ने सेना (Army) की सक्रियता को बढ़ा दिया है. सेना की इस सक्रियता को देखकर थोड़ी हैरानी इस बात की हो रही है कि आखिर नेपाल के मन में क्या चल रहा है.

इससे भी बड़ी बात यह है कि बॉर्डर पर सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने के साथ ही नेपाल यहां पर सड़कों का जाल भी बिछा रहा है. ड्रैगन के इशारे पर नेपाल आए दिन कुछ न कुछ ऐसा कर रहा, जिससे साफ जाहिर होता है कि वो चीन का मोहरा बन चुका है. लिपुलेख रोड के उद्घाटन के बाद जहां उनसे भारत पर कब्जे का आरोप लगाया. वहीं नए राजनीतिक नक्शे में भारत के गुंजी, नाबी और कूटी को अपना बता दिया.

यही नहीं उत्तराखंड से सटे सीमावर्ती इलाकों में नेपाल खुद के सुरक्षा तंत्र को भी खासा मजबूत करने में जुटा है. बीते 5 महीनों में नेपाल ने 275 किलोमीटर के बॉर्डर पर 15 बीओपी खोल दी हैं, जबकि 2 बीओपी अभी बजूद में नहीं है. वहीं नेपाल मामलों के जानकार प्रेम पुनेठा का कहना है कि नेपाल ने भारत से दूरी बनाने का पूरी तरह मन बना लिया है.



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भारत पर निर्भरता को खत्म करना चाहता है नेपाल
यही वजह है कि वो धीरे-धीरे भारत पर निर्भरता को पूरी तरह खत्म करने जा रहा है. यही नही इस बॉर्डर को नेपाल हवाई सेवा से भी जोड़ रहा है. इसी हफ्ते बैतड़ी से धनगड़ी के लिए नियमित उड़ान शुरू होनी है. अगर बात सड़कों की करें तो बह्मदेव से तिंकर तक 425 किलोमीटर का महाकाली कॉरिडोर बन रहा है. इस कॉरिडोर को बनाने का जिम्मा अब नेपाली सेना के हवाले है. आम तौर पर शांत माने जाने वाले इस बॉर्डर पर नेपाल सरकार ने सशस्त्र सीमा प्रहरी बल की एक बटालियन और कम्पनी भी तैनात कर दी है.

सीमा के ये प्रहरी गर्मी या फिर सर्दी हर वक्त बॉर्डर पर निगाह बनाएं रखेंगे. उत्तराखंड पुलिस के रिटायर्ड आईजी जीएस मर्तोलिया का कहना है कि भारत को भी नेपाल के खिलाफ आक्रामक होने की जरूरत है. किसी भी कीमत पर कोई समझौता भारत को नहीं करना चाहिए. साथ ही सीमा वाले इलाकों में निगरानी तेज़ करनी चाहिए. उत्तराखंड के बॉर्डर इलाकों में नेपाल की जरूरत से ज्यादा सक्रियता साफ इशारा कर रही है कि रोटी-बेटी के रिश्ते अब इतिहास के पन्नों में ही नजर आएंगे. बदले हालात को देखते हुए भारत ने भी खुद के सुरक्षा तंत्र को खासा मजबूत किया है, लेकिन सवाल ये है कि चीन के इशारों पर नेपाल कब तक नाचता रहेगा.
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