देवभूमि के कॉलेजों में न शिक्षक, न बिल्डिंग, छात्र पढ़ेंगे कैसे?

Mukesh Kumar | News18India
Updated: October 13, 2017, 9:05 PM IST
देवभूमि के कॉलेजों में न शिक्षक, न बिल्डिंग, छात्र पढ़ेंगे कैसे?
Mukesh Kumar | News18India
Updated: October 13, 2017, 9:05 PM IST
देवभूमि उत्तराखंड में बड़ी संख्या में डिग्री कॉलेजों में न तो शिक्षक हैं और न ही भवन. यूजीसी की गाइडलाइन्स का भी अनुपालन नहीं हो पा रहा है. ऐसे में छात्र पढ़ें तो कैसे.

उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उत्तराखंड में आज भी मूलभूत सुविधाओं का टोटा है. प्रदेश में बड़ी संख्या में कॉलेज ऐसे हैं जिनके पास अपने भवन तक नहीं हैं. ऐसे डिग्री कॉलेजों की संख्या भी कम नहीं है जहां तय संख्या की तुलना में शिक्षक नहीं हैं.

यूजीसी के मानकों के मुताबिक 180 दिन की पढ़ाई कराने का लक्ष्य कैसे पूरा कराना भी उच्च शिक्षा विभाग के लिए छात्रों की तर्ज पर किसी परीक्षा से कम नहीं है. राज्य के कई डिग्री कॉलेजों में मूलभूत सुविधाएं जैसे भवन, पीने का पानी, शौचालय और लाइब्रेरी नहीं है. ऐसे में उज्जवल भविष्य का सपना लिए छात्र महज डिग्री के ले एडमिशन ले रहे हैं.

प्रदेश में उच्च शिक्षा के क्षेत्र को सुधारने के लिये सरकार को भी खासी मशक्कत करनी पड़ रही है. सरकारी आंकड़े भी इस बात को पुख्ता कर रहे हैं कि उत्तराखंड में उच्च शिक्षा की हालत ख़स्ता है.

फरवरी 2017 तक प्रदेश में कुल 100 कॉलेज हैं. इनमें से सिर्फ 48 डिग्री कॉलेजों के पास भवन हैं. 26 कॉलेजों के पास भूमि है और इन पर भवनों का निर्माण चल रहा है. 17 कॉलेज ऐसे हैं जिनके लिए भूमि की तलाश की जा रही है. 9 डिग्री कॉलेज ऐसे में जिनके पास भूमि है और जल्द ही भवन का निर्माण होने की उम्मीद है.

इसके अलावा राज्य के डिग्री कॉलेजों में शिक्षकों के तकरीबन एक हज़ार पद खाली हैं. डिग्री कॉलेजों में लगभग 2,387 लोगों के स्टाफ की कमी है.

इस कड़वी हकीक़त को समझकर राज्य सरकार भी हरकत में आ गई है. उच्च शिक्षा विभाग ने इस दिशा में कवायद शुरू कर दी है. राज्य कैबिनेट ने प्रति पीरियड मानदेय देकर गेस्ट टीचर्स की तैनाती का फैसला लिया है.

40 कॉलेजों को ढांचागत सुविधाओं के लिये 2-2 करोड़ की धनराशि जारी करने का दावा किया जा रहा है. 25 कॉलेजों को राष्ट्रीय स्तर के मानकों के अनुसार बनाने की कोशिश की जा रही है. सरकार दावा कर रही है कि जल्द ही उच्च शिक्षा विभाग की गाड़ी पटरी पर आ जायेगी.

जाहिर है पहाड़ से बढ़ते पलायन को रोकने के लिये उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी ठोस कदम उठाए जाने की ज़रूरत है. सरकार और राज्य का उच्च शिक्षा विभाग भी इस बात को बखूबी समझता है यही वजह है कि नई सरकार बनते ही इस दिशा में कोशिश भी शुरू कर दी गई हैं.

लेकिन बच्चों का भविष्य तभी संवर पायेगा जब महाविद्यालयों में मूलभूत सुविधाओं के साथ शिक्षक भी मानकों के हिसाब से नियुक्त किए जाएं.

 
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