सलेक्‍शन के बाद भी मेडिकल कॉलेज नहीं पहुंचे 16 डॉक्‍टर्स, प्रशासन ने लिया ये फैसला

उत्तराखंड चिकित्सा चयन बोर्ड से विगत 10 मार्च को चयनित सभी विशेषज्ञ डॉक्टरों को 2 सप्ताह में ज्वाइनिंग देनी थी, लेकिन आज तक ये डॉक्टर स्‍थायी नियुक्ति के बाद भी पहाड़ नहीं चढ़ सके हैं.

Sudhir Bhatt | News18 Uttarakhand
Updated: July 21, 2019, 6:28 PM IST
सलेक्‍शन के बाद भी मेडिकल कॉलेज नहीं पहुंचे 16 डॉक्‍टर्स, प्रशासन ने लिया ये फैसला
कॉलेज के बेस अस्पताल में डॉक्टरों की कमी भी बनी हुई है.
Sudhir Bhatt | News18 Uttarakhand
Updated: July 21, 2019, 6:28 PM IST
राजकीय मेडिकल श्रीनगर गढ़वाल के लिए पहली बार 15 विभागों में स्थायी रूप से चयनित 22 डॉक्टरों में से 16 जहां चार महीने बाद भी पहाड़ नहीं चढ़ सके हैं, तो वहीं एक बार फिर 11 डॉक्टरों का चयन मेडिकल कॉलेज के लिए हुआ है. ऐसे में पहली खेप के डॉक्टरों के कॉलेज में ज्वाइनिंग नहीं देने के बाद नई खेप के डॉक्टर कॉलेज में तैनाती लेंगे इस पर सशंय है. खास बात यह है कि पूर्व में चयनित सभी 16 डॉक्टरों को 2 सप्ताह में ज्वाइनिंग देनी थी, लेकिन अब इसके लिए अतिरिक्त समय मांग कर चयनित डॉक्टर न केवल पदों को घेरकर बैठे हैं बल्कि नये डॉक्टर भी इस वजह से नहीं आ पा रहे हैं.

स्‍थायी नियुक्ति की मांग के बाद भी...
गौरतलब है कि उत्तराखंड चिकित्सा चयन बोर्ड से विगत 10 मार्च को चयनित सभी विशेषज्ञ डॉक्टरों को 2 सप्ताह में ज्वाइनिंग देनी थी, लेकिन आज तक ये डॉक्टर स्‍थायी नियुक्ति के बाद भी पहाड़ नहीं चढ़ सके हैं. इस वजह से केवल कॉलेज में शिक्षकों की बल्कि कॉलेज के बेस अस्पताल में डॉक्टरों की कमी भी बनी हुई है.

खास बात यह है कि मेडिकल कॉलेज में संविदा पर तैनात रहे डॉक्टरों की हमेशा से ये शिकायत रही है कि उन्हें स्थायी नियुक्ति नहीं मिलने के कारण नौकरी के प्रति उनके अंदर असुरक्षा का भाव ही उन्हें मेडिकल कॉलेज छोड़ने पर विवश करता है. ऐसे में अब जबकि पहली बार डॉक्टरों को स्थायी नियुक्तियां दी गई हैं तो वो कॉलेज में तैनाती क्यों नहीं ले रहे हैं और यही सवाल मेडिकल कॉलेज प्रशासन और शासन को भी परेशान किये हुए है.

क्‍या ये है वजह?
हालांकि माना जा रहा है कि गढ़वाल के पहाड़ी क्षेत्रों के श्रीनगर स्थित इकलौते सरकारी मेडिकल कॉलेज को चयनित डॉक्टर अपनी प्राथमिकताओं में अंतिम पायदान पर मानते हैं. वह इच्छानुरूप मैदानी क्षेत्र के किसी अच्छे कॉलेज में चयन नहीं होने पर अंतिम विकल्प के रूप में ही मेडिकल कॉलेज श्रीनगर को वो चुनते हैं.

बहरहाल, कारण जो भी हों लेकिन राजकीय मेडिकल कॉलेज में विशेषज्ञ डॉक्टरों के साथ शिक्षकों की कमी न केवल नए पीजी कोर्सेज के संचालन में बाधा खड़े किये हुए है बल्कि यूजी कक्षाओं के संचालन में भी दिक्कतें भविष्य में बढ़ सकती हैं.
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First published: July 21, 2019, 6:28 PM IST
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