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गायब हो गए श्रीयंत्र टापू के शहीदों के स्मारक के लिए आए 45 लाख रुपये, राज्य आंदोलनकारियों ने बताया षड्यंत्र

Sudhir Bhatt | News18 Uttarakhand
Updated: November 28, 2019, 11:20 AM IST
गायब हो गए श्रीयंत्र टापू के शहीदों के स्मारक के लिए आए 45 लाख रुपये, राज्य आंदोलनकारियों ने बताया षड्यंत्र
श्रीयंत्र टापू के शहीदों की याद में बनने वाले संग्रहालय, स्मारक और पुस्तकालय के लिए शासन से मिले 45 लाख रुपये गायब हो गए हैं. राज्य आंदोलनकारी इस घोटाले की जांच की मांग कर रहे हैं.

राज्य आंदोलनकारी कहते हैं कि श्रीयंत्र टापू (Sriyanta Island) पर संग्रहालय और स्मारक न बनाया जाना जानबूझकर इतिहास को मिटाने की कोशिश है.

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श्रीनगर. राज्य आंदोलन (Uttarakhand separate state movement) के दौरान 10 नवम्बर, 1995 को पुलिसिया दमन में शहीद हुए आंदोलनकारियों के मामले की जांच 24 साल बाद भी ठंडे बस्ते में ही है. यह उत्तराखंड राज्य के लिए शहीद (martyr for uttarakhand) होने वालों के प्रति सरकारों के रवैये के बारे में बताने के लिए काफ़ी है. और इसी रवैये का नतीजा है कि शहीदों की याद में बनने वाले संग्रहालय (museum), स्मारक (memorial) और पुस्तकालय (library) के लिए शासन से मिले 45 लाख रुपये गायब हो गए हैं. राज्य आंदोलनकारी इस घोटाले की जांच की मांग कर रहे हैं.

45 लाख आने की पुष्टि 

अलकनन्दा नदी की दो मुख्य धाराओं के बीच मौजूद श्रीयंत्र टापू पर 24 साल पहले पुलिसिया कार्रवाई में दो युवा राज्य आंदोलनकारी यशोधर बेंजवाल और राजेश रावत शहीद हो गए थे. श्रीयंत्र टापू कांड में पुलिसिया दमन में कई लोग घायल भी हुए थे और 52 आंदोलनकारियों पर मुकदमे दर्ज किए गए थे.

सात साल पहले शहीदों की याद में संग्रहालय, स्मारक और लाइब्रेरी के लिए शासन ने 45 लाख रुपये दिए थे. तत्कालीन नगरपालिका अध्यक्ष कृष्णानंद मैठाणी स्वीकार करते हैं कि शहीद संग्रहालय निर्माण के लिए शासन से यह पैसा मिला था. वह यह भी कहते हैं कि उनके कार्यकाल में तो काम शुरु नहीं हो पाया और अब वह पैसा कहां है इसका कुछ पता नहीं.

पालिकाध्यक्ष को पता नहीं 

श्रीनगर की मौजूदा पालिकाध्यक्ष पूनम तिवारी को भी इस पैसे के बारे में कुछ पता नहीं. उनकी सफ़ाई यह है कि उन्हें निर्वाचित हुए दो-तीन महीने ही हुए हैं इसलिए उन्हें इस बारे में जानकारी नहीं है. हालांकि पूनम तिवारी यह दावा करती हैं कि जो पैसा जिस काम के लिए आया है उसी में खर्च किया जाएगा.

इतिहास को मिटाने की कोशिश 
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यह हैरत की बात लगती है कि शहीदों की याद में बनने वाले म्यूजियम के लिए मिली 45 लाख रूपये की बड़ी धनराशि लापता हो गई और किसी को कानोंकान खबर भी नहीं हुई और शासन स्तर से भी कोई पूछताछ नहीं हुई. राज्य आंदोलनकारी इसे दुखद बताते हैं यह षड्यंत्र की आशंका भी जताते हैं.

राज्य आंदोलनकारी योगेन्द्र कांडपाल कहते हैं उत्तराखंड में आई सरकारों का रवैया राज्य आंदोलनकारियों के प्रति शुरु से ही उपेक्षा वाला रहा है. श्रीयंत्र टापू पर संग्रहालय और स्मारक न बनाया जाना जानबूझकर इतिहास को मिटाने की कोशिश है.

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First published: November 28, 2019, 11:18 AM IST
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