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साढ़े तीन माह के लिए बंद होने वाला बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग खुला रहेगा

साढ़े तीन माह के लिए बंद होने वाला बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग खुला रहेगा

डीएम टिहरी ने हाईवे बंदी के निर्णय को स्थगित किया.

चारधाम सड़क परियोजना के तहत कठोर पहाड़ी चट्टानों को कंट्रोल ब्लास्टिंग के जरिए तोड़ने के लिए हाईवे को कौडियाला से देवप्रयाग के बीच साढ़े 3 माह के लिए रोज रात 10 बजे से सुबह 4 बजे तक बंद रखा जाना था.

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आज सोमवार की रात से साढ़े तीन माह के लिए बंद होने वाला बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग फिलहाल अग्रिम नए आदेश तक खुला रहेगा. इसपर आवाजाही की जा सकेगी. इस मामले पर मिले नए आदेश के बाद फिलहाल हाईवे बंद करने के निर्णय को स्थगित कर दिया गया है. पीडब्लूडी राजमार्ग खंड को डीएम टिहरी के मिले इस आशय के निर्देश के बाद फिलहाल 15 फरवरी तक बद्रीनाथ हाईवे पर रात में भी सफर किया जा सकेगा. 15 फरवरी को डीएम टिहरी सोनिका ने टिहरी में एसएसपी टिहरी, पीडब्लूडी एनएच के अधिकारियों और ठेकेदारों के साथ बैठक कर इस पर अगली तारीख तय करेंगी.

गौरतलब है कि चारधाम सड़क परियोजना के तहत कठोर पहाड़ी चट्टानों को कंट्रोल ब्लास्टिंग के जरिए तोड़ने के लिए हाईवे को कौडियाला से देवप्रयाग के बीच साढ़े 3 माह के लिए रोज रात 10 बजे से सुबह 4 बजे तक बंद रखा जाना था. रोज रात को 6 घंटों के लिए हाईवे बंद होने से इमरजेंसी तौर पर हाईवे से गुजरने वालों के लिए काफी दिक्कतें होने वाली थी. हालांकि बद्रीनाथ हाईवे बंद होने पर वैकल्पिक मार्गों से आवाजाही हो सकती थी. लेकिन इसमें 1 से 2 घंटे का अतिरिक्त समय लगता.

पीडब्लूडी एनएच द्वारा रोज रात 10 से सुबह 4 बजे तक हाईवे बंद करने का निर्णय लिया गया था, लेकिन पुलिस द्वारा इसका समय शाम को 8 से सुबह 6 बजे तक कर दिया गया था. बताया जा रहा है कि ऐसा पुलिस द्वारा भारी-भरकम वाहनों के कारण किया गया था, क्योंकि, भारी वाहनों की धीमी गति के कारण उन्हें कौडियाला से देवप्रयाग तक की दूरी तय करने में समय लगता. इससे जनसुरक्षा और हाईवे निर्माणकार्य में भी दिक्क्तें आतीं.

बहरहाल डीएम टिहरी के अचानक हाईवे बंदी के निर्णय को स्थगित करने के बाद लोकनिर्माण विभाग के राजमार्ग खंड की सारी तैयारियां धरी की धरी रह गईं. साढ़े तीन माह तक हाईवे बंद रहने के निर्णय के चलते डीएम और एसएसपी के आदेश पर हाईवे निर्माणकार्य और उसके बंद या खुले होने संबंधी सूचनाओं के लिए देवप्रयाग थाने में कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है. यह कंट्रोल रूम इस संबंध में सभी सूचनाएं संबंधित क्षेत्रीय थानों को देने के साथ जिला पुलिस प्रशासन को भी देता.

हाईवे बंद रहने के दौरान गढ़वाल क्षेत्र के सबसे बड़े और रेफरल सेंटर राजकीय मेडिकल कॉलेज के बेस अस्पताल से इमरजेंसी में मरीज को हायर सेंटर रेफर करने के मद्देनजर भी व्यवस्था की गई
थी. इसके तहत बेस अस्पताल से मरीज को रेफर करने से पूर्व इस बारे में जानकारी सीएमओ टिहरी को दी जाती, जिसके बाद हाईवे को इमरजेंसी के दृष्टिगत एम्बुलेंस के लिए क्लियर किया जाता.

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'ठप रास्तों का राज्य' : सिर्फ पौड़ी में ही 36 सड़कें पूरी तरह ठप, ढाई हफ्ते से संकट में फंसे हैं ग्रामीण

'ठप रास्तों का राज्य' : सिर्फ पौड़ी में ही 36 सड़कें पूरी तरह ठप, ढाई हफ्ते से संकट में फंसे हैं ग्रामीण

Uttarakhand Road Crisis : उत्तराखंड की सड़कों और यहां तक कि राजमार्गों तक की हकीकत बारिश के चलते सामने आ चुकी है. ग्रामीण समस्याओं से जूझ रहे हैं क्योंकि पौड़ी में बंद सड़कों में से 21 तो पीएमजीएसवाई की हैं.

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पौड़ी गढ़वाल. लगातार बारिश के चलते उत्तराखंड ‘बंद सड़कों का प्रदेश’ बनकर सामने आया है. पौड़ी जनपद में बारिश और भूस्खलन के कारण जहां 36 सड़कें पूरी तरह ठप हैं, वहीं 16 दिनों बाद भी मैठाणाघाट-नौलापुर जिला सड़क को ट्रैफिक के लिए खोला नहीं जा सका है. एक जनपद में दर्जनों सड़कों के बंद होने से सबसे ज़्यादा मुसीबत ग्रामीणों की हो गई है क्योंकि गांव किसी एकाध ही मुख्य सड़क से जुड़े होते हैं और उनके रोज़मर्रा के जीवन की चीज़ों की सप्लाई ठप हो जाती है. यही हाल पैठाणी-बड़ेथ सड़क का भी है, जो ढाई सप्ताह बाद किसी तरह खोली गई लेकिन बार-बार बंद होने से खासकर ग्रामीणों को ही भारी समस्याएं हो रही हैं.

सिर्फ पौड़ी में बंद 36 सड़कों का आंकड़ा यह है कि 33 तो सिर्फ ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कें हैं, जिनमें से 21 बंद सड़कें प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना की हैं. इससे साफ तौर पर समझा जा सकता है कि ग्रामीण आबादी किस तरह की मुश्किलों से जूझ रही है. पौड़ी के ज़िला मजिस्ट्रेट विजयकुमार जोगदंडे ने रास्ते बंद होने की पुष्टि करते हुए कहा कि प्रशासन इन सड़कों को फिर से खोलने के काम में जुटा हुआ है, जिसमें कई विभागों की मदद ली जा रही है.

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और क्या है बाकी रास्तों का हाल?
कल यानी मंगलवार को ही खबर आई थी कि गंगोत्री हाईवे पर सुखी टॉप इलाके में भूस्खलन के चलते रास्ता बंद हो गया. यहां बोल्डर इतने ज़्यादा गिरे थे कि बॉर्डर रोड्स संगठन यानी बीआरओ रेस्क्यू कर मलबा हटाने की कवायद कर रहा था. लोग और वाहन फंस गए थे. इसके अलावा यह भी बताया जा चुका है कि राज्य के इस प्रमुख हाईवे पर बड़ेथ के पास एक टनल निर्माण के चलते रास्ता 22 सितंबर तक बंद रहेगा. इसका रूट डायवर्ट कर दिया गया है.

उत्तराखंड में डेल्टा वंश के AY.12 वैरिएंट का पहला केस, ट्रैस किए जा रहे मरीज़ के कॉंटैक्ट

उत्तराखंड में डेल्टा वंश के AY.12 वैरिएंट का पहला केस, ट्रैस किए जा रहे मरीज़ के कॉंटैक्ट

Covid-19 in Uttarakhand : पौड़ी गढ़वाल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी का कहना है कि संक्रमित मरीज़ ने कहां कहां यात्रा की है, इसका पूरा रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है और उसके तमाम संपर्कों को तलाशकर नज़र रखी जा रही है.

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देहरादून. पौड़ी गढ़वाल ज़िले के कोटद्वार में कोविड 19 संक्रमित एक मरीज़ मिला, जो उत्तराखंड में डेल्टा वैरिएंट के सब लीनियेज AY.12 से पीड़ित पहला मरीज़ है. उत्तराखंड में तीसरी लहर को लेकर अंदेशे जताए जा रहे हैं कि एक महीने बाद राज्य में तीसरी लहर का प्रकोप देखा जा सकता है. ऐसे में, इस तरह का पहला केस मिलने से चिंता का माहौल बन रहा है. AY.12 के इस मामले में राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने ज़रूरी गाइडलाइन्स देकर मरीज़ को होम क्वारंटाइन कर दिया है. मरीज़ पर नियमित रूप से स्वास्थ्य विभाग की टीम निगरानी कर रही है.

डेल्टा वैरिएंट के AY.12 से पीड़ित पहले केस के मामले में पीड़ित के​ रिश्तेदारों और उसके संपर्क में अन्य लेागों को ट्रैस किया जा रहा है. पौड़ी गढ़वाल ज़िले में पिछले 24 घंटों में चूंकि 15 नए संक्रमित पाए गए हैं इसलिए ज़िले के सभी एंट्री पॉइंटों पर कोविड 19 टेस्ट करवाए जाने की खबरें भी हैं. समाचार एजेंसी एएनआई की खबर के मुताबिक पौड़ी गढ़वाल के सीएमओ मनोज शर्मा ने कहा कि मरीज़ की ट्रैवल हिस्ट्री चेक की जा रही है.

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दूसरी तरफ, रुद्रप्रयाग ज़िले में डेल्टा प्लस वैरिएंट का एक और केस मिलने के बाद ज़िले में इस वैरिएंट के कुल मामले 15 हो गए. वहीं ऊधमसिंह नगर में भी 3 और केस मिलने के बाद इस वैरिएंट के कुल मरीज़ 5 हो गए हैं. जबकि यहां एक संक्रमित मरीज़ लापता बताया जा रहा है. इस ज़िले के बॉर्डरों पर उत्तराखंड प्रशासन ने चेकिंग बढ़ाने का दावा किया है.

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क्या है AY.12 वैरिएंट?
भारत में कोविड के जीनोमिक्स संस्थान Insacog ने AY.12 को डेल्टा वैरिएंट की सब लीनियेज बताया है. इस वैरिएंट के कई केस देश भर में सामने आ चुके हैं. इज़राइल में कोरोना के मामलों में हाल में जो उछाल आया, इस सब ​लीनियेज का ताल्लुक उससे बताया जाता है. Insacog के मुताबिक डेल्टा और AY.12 वैरिएंट अणु स्तर की संरचना में काफी हद तक समान नज़र आते हैं और इनके बीच के अंतर के बारे में अभी ज़्यादा जानकारी नहीं है.

उत्तराखंड : कोटद्वार उपस्वास्थ्य केंद्र में टीका लगने के 12 घंटे बाद बच्ची की मौत

उत्तराखंड : कोटद्वार उपस्वास्थ्य केंद्र में टीका लगने के 12 घंटे बाद बच्ची की मौत

स्वास्थ्य अधिकारी शैलेंद्र बड़थ्वाल का कहना है कि डेढ़ माह की बच्ची का शव नीला पड़ा हुआ था, जिसे देखकर लगता है कि बच्ची को हृदय संबंधी बीमारी थी, जिसके चलते बच्ची पर टीके का साइड इफेक्ट हो गया. हालांकि उन्होंने कहा कि बच्ची का पोस्टमॉर्टम होने के बाद मौत के असल कारण का पता लग पाएगा.

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कोटद्वार. कोटद्वार के नाथपुर इलाके में टीका लगने के 12 घंटों के भीतर डेढ़ महीने की एक बच्ची की मौत हो गई. बच्ची को कल उपस्वास्थ्य केंद्र लालपानी में टीका लगाया गया था.

कोटद्वार के लालपानी इलाके में टीका लगने के बाद डेढ़ महीने की बच्ची की अचानक मौत ने स्वास्थ्य विभाग के हाथ-पैर फुला दिए हैं. मामला आज गुरुवार सुबह का है. बताया जा रहा है कि उपस्वास्थ्य केंद्र लालपानी में कल ही बच्ची के 6 हफ्ते के होने पर टीका लगाया गया था. जिसके बाद रात के समय बच्ची की तबीयत बिगड़नी शुरू हो गई. मां ने बच्ची को दूध पिला कर सुला दिया. सुबह जब बच्ची को उठाने की कोशिश की गई तो वह मृत पाई गई. सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की टीम ने तत्काल जांच शुरू कर दी है.

बच्चे की मां रश्मि ने बताया कि टीका लगने के बाद से ही उनकी बच्ची की हालत बिगड़नी शुरू हो गई थी और देर रात बच्ची काफी रोने लगी थी, लेकिन उन्होंने यह सोचकर डॉक्टर को नहीं दिखाया कि बच्ची को अभी टीका लगा है. उन्होंने बच्ची को दूध पिलाया और सुलाने की कोशिश की, कुछ समय बाद बच्ची सो गई. लेकिन जब सुबह 7:00 बजे उसे जगाने की कोशिश की गई तो वह नहीं जगी.

स्वास्थ्य अधिकारी शैलेंद्र बड़थ्वाल का कहना है कि बच्ची का शव नीला पड़ा हुआ था, जिसे देखकर लगता है कि बच्ची को हृदय संबंधी बीमारी थी, जिसके चलते बच्ची पर टीके का साइड इफेक्ट हो गया. हालांकि उन्होंने कहा कि बच्ची का पोस्टमॉर्टम होने के बाद मौत के असल कारण का पता लग पाएगा. इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उस उपकेंद्र का भी निरीक्षण कर उन तीनों टीकों की भी जांच की, जो बच्चों को लगाए जा रहे हैं. प्रशासन की ओर से बच्ची के शव का पंचनामा कर शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है.

कोटद्वार में अवैध चेनेलाइजेशन ने अब ली टीनेजर की जान, नाराज ग्रामीणों ने किया पथराव

कोटद्वार में अवैध चेनेलाइजेशन ने अब ली टीनेजर की जान, नाराज ग्रामीणों ने किया पथराव

Uttarakhand News : उत्तराखंड के गढ़वाल रीजन के कोटद्वार की नदियों में अनियमित चेनेलाइज़ेशन लोगों की जान पर भारी पड़ रहा है. लोगों ने इसे रोकने की मांग की है, जो अफसरों ने इस बारे में अब जांच के आदेश दिए हैं.

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कोटद्वार. पौड़ी ज़िले की नदियों में चल रहा अनियमित चेनेलाइजेशन लोगों की जान पर भारी पड़ रहा है. ताज़ा मामला सुखरौ नदी का है, जहां चेनेलाइजेशन के चलते बने गहरे गड्ढे की वजह से एक टीनेजर पानी में डूब गया. कोटद्वार भाबर की नदियों में खनन के कारण गहरे गड्ढे बन चुके हैं, जो अब लगातार बच्चों की मौतों का कारण बन रहे हैं. बुधवार दोपहर जब ऐसी एक और दुर्घटना हुई, तो स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने नदी किनारे खनन करने वालों पर पथराव तक कर डाला. इस पूरे घटनाक्रम के बाद चेनेलाइज़ेशन का अवैध कारोबार केंद्र में आ गया है.

बुधवार दोपहर सुखरौ नदी के गड्ढे में फंसने से 15 वर्षीय प्रियांशु की मौत हो गई. सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस और एसडीआरएफ की टीम ने सवा तीन घंटे की मशक्कत के बाद शव को बाहर निकाला. गौरतलब कि इससे पहले 7 जून को खोह नदी में ऐसे ही गड्ढे में डूबने से चार बहनों के इकलौते भाई की मौत हो गई थी. इससे पहले भी खोह नदी में दो बच्चे डूब गए थे. लगातार जारी इस सिलसिले में ताज़ा मामले ने अवैध खनन और सिस्टम पर सवालिया निशान लगाया है.

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मृतक प्रियांशु के दोस्त विजय ने बताया कि प्रियांशु की चप्पल नदी में बही तो वह चप्पल निकालने नदी में चला गया, लेकिन नदी में बन गए गड्ढे की गहराई का उसे अंदाज़ा नहीं था इसलिए फंसकर डूब गया. आसपास के लोगों की सूचना के बाद पुलिस और एसडीआरएफ की टीमों ने सर्च अभियान शुरू किया. बरामद शव को पुलिस ने राजकीय बेस अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया. वहीं मामले से गुस्साए लोगों ने खननकारियों पर पथराव कर चेनेलाइजेशन का काम रोकने की मांग की. इस मामले में, कोटद्वार एसडीएम योगेश मेहरा ने मामले की जांच के आदेश दिए. एसडीएम ने कहा कि नियमों के विरुद्ध चेनेलाइजेशन की जांच की जाएगी.

जम्मू-कश्मीर के गुलमर्ग में उत्तराखंड का लाल मनदीप सिंह नेगी शहीद, CM तीरथ सिंह रावत ने दी श्रद्धांजलि

जम्मू-कश्मीर के गुलमर्ग में उत्तराखंड का लाल मनदीप सिंह नेगी शहीद, CM तीरथ सिंह रावत ने दी श्रद्धांजलि

Mandeep Singh Negi Shaheed: जम्मू कश्मीर (Jammu and Kashmir) के गुलमर्ग (Gulmarg) में तैनात उत्तराखंड के पौड़ी के जवान मनदीप सिंह नेगी शहीद (Mandeep Singh Negi martyred) हो गए हैं. मनदीप अपने माता-पिता की इकलौती संतान थे.

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पौड़ी गढ़वाल. जम्मू कश्मीर (Jammu and Kashmir) के गुलमर्ग (Gulmarg) में तैनात जवान मनदीप सिंह नेगी (Mandeep Singh Negi Martyred) देश की सुरक्षा करते हुए ड्यूटी के दौरान शहीद हो गए हैं. पौड़ी जनपद के पोखड़ा ब्लॉक के अंतर्गत सकनोली गांव के रहने वाले मनदीप सिंह नेगी की शहादत की सूचना के बाद से पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है. देश की रक्षा में बॉर्डर पर तैनात शहीद मनदीप सिंह नेगी 23 साल की कम उम्र में ही वीरगति को प्राप्त हुए. मनदीप सिंह 20 साल की उम्र में थल सेना का हिस्सा बन गए थे. 11वीं गढ़वाल राइफल्स के जवान के रूप में इन दिनों वो अपनी सेवा जम्मू कश्मीर के गुलमर्ग इलाके में दे रहे थे.

शहीद मनदीप सिंह नेगी अपने माता-पिता की इकलौती संतान थे. मनदीप सिंह नेगी की शहादत की सूचना मिलने के बाद से पूरा परिवार सदमें में है. पोखड़ा ब्लॉक के सकनोली गांव में उनकी माता और पिता रहते हैं. शहीद के पिता सतपाल सिंह नेगी गांव में किसानी का काम किया करते हैं, जबकि शहीद की माता हेमंती देवी गृहणी हैं.



माता-पिता की इकलौती संतान थे मनदीप

शहीद मनदीप सिंह नेगी के गांव के प्रधान मेहरबान सिंह ने बताया कि सेना की ओर से उन्हें फोन आया था जिसमें सेना के अधिकारियों ने बताया कि ड्यूटी के दौरान मनदीप सिंह नेगी शहीद हो गए हैं. इसकी सूचना उनके द्वारा शहीद के पिता को दी गई. सूचना के बाद से शहीद की मां का रो-रोकर बुरा हाल है. प्रधान की ओर से मिली जानकारी के अनुसार शहीद का पार्थिव शरीर कल हवाई मार्ग से कश्मीर से देहरादून के लिए रवाना होगा और फिर बाई रोड़ चौबट्टाखाल विधानसभा क्षेत्र के सकनोली गांव लाया जाएगा. वहीं शहीद मनदीप सिंह नेगी की शहादत की सूचना पर मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने भी गहरा दुःख व्यक्त किया है.

पौड़ी गढ़वाल : बरसाती नदी में बहते सांड को मिला चट्टान का सहारा और फिर... देखें वीडियो

पौड़ी गढ़वाल : बरसाती नदी में बहते सांड को मिला चट्टान का सहारा और फिर... देखें वीडियो

पौड़ी गढ़वाल के धुमाकोट थाना के सिमड़ी में एक सांड ने तेज बहाव वाली बरसाती नदी से जिंदगी की जंग जीत ली. हालांकि वह नदी के तेज बहाव में बहने लगा था. अंततः एक चट्टान का सपोर्ट मिलने के बाद उसने अपनी जिंदगी बचा ली.

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पौड़ी गढ़वाल. हिम्मत हो और किस्मत साथ दे तो आप किसी भी संकट से बच निकलते हैं. कहते हैं कि ऐसी स्थिति में मौत भी छू कर निकल जाती है, आपको ले नहीं जा सकती. ऐसा ही नजारा आज देखने को मिला पौड़ी गढ़वाल में. पौड़ी जनपद के धुमाकोट थाना के सिमड़ी से आए वीडियो में देखा जा सकता है कि एक सांड तेज बहाव वाली बरसाती नदी पार कर रहा है. नदी के तेज बहाव में उसके पांव बार-बार डगमगा रहे हैं. उत्तेजना में उसकी पूंछ बिल्कुल उठी हुई है, लेकिन वह अपनी धुन में नदी पार करने की कोशिश करता है. तभी नदी के तेज बहाव ने उसके पांव उखाड़ दिए और वह नदी में बहने लगा.

पानी की ताकत के सामने बिखर गई सांड की ताकत

इस बेहद खौफनाक दृश्य से पहले पास मौजूद लोगों ने उसे बचाने का प्रयास भी किया, लेकिन इससे पहले ही सांड के पांव पानी के तेज बहाव में एक बार जब उखड़े, तो फिर वो बहता चला गया. पहले उसने खुद को बचाने की बहुत कोशिशें कीं, लेकिन पानी के रौद्र रूप के आगे उसकी एक न चली. हालांकि इस दौरान उसने पानी की तेज धार के बीच संतुलन बनाकर बाहर निकलने के लिए काफी जद्दोजहद भी की, लेकिन पानी के प्रेशर के आगे उसे प्रयास नाकाम साबित होते दिखे.

नदी की धार Vs सांड की ताकत



सांड की यह कोशिश हुई कामयाब

तभी तेज प्रवाह में बहते सांड को संयोग से एक चट्टान का सहारा मिला. घबराया सांड कुछ देर तक तो अपनी सांसें दुरुस्त करता रहा और फिर उसने एकबार खुद को बचाने की जद्दोजहद शुरू की और आखिरकार किसी तरह उसने खुद को पानी से बाहर निकालकर अपनी जिदंगी बचा ली.

हमलावर हो गया था सांड

धुमाकोट थाने के प्रभारी निरीक्षक विनय कुमार का कहना है कि सांड को पानी में जाने से रोकने की बहुत कोशिशें की गईं, लेकिन सांड लोगों पर हमलावर हो गया. तब लोगों ने अपनी जान बचाई और सांड को जाने दिया. इसके बाद ये घटना हुई. उन्होंने कहा कि कुछ दूर तक नदी में बहने के बाद सांड खुद ही नदी से बाहर निकल आया.

Alert : उत्तराखंड में नदियां हुईं खतरनाक, अलकनंदा में डूबे गढ़वाल के निचले इलाके

Alert : उत्तराखंड में नदियां हुईं खतरनाक, अलकनंदा में डूबे गढ़वाल के निचले इलाके

वीडियो और तस्वीरों में नदियों के उफनने का खतरा दिखाई दे रहा है. श्रीनगर और गढ़वाल में अलकनंदा के रौद्र रूप के नज़ारे और खबरें सामने आ रही हैं. लगातार पाइए अपडेट्स, सिर्फ न्यूज़18 पर.

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देहरादून. राज्य के तमाम पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश के कारण नदियों के उफनने से काफी मुश्किल स्थितियां बन गई हैं. ताज़ा खबर की मानें तो श्रीनगर और पौड़ी गढ़वाल के कई निचले इलाके पानी में डूब गए हैं. वास्तव में अलकनंदा नदी का जलस्तर तेज़ी से बढ़ जाने से नदी कई स्थानों पर छलक उठी है और किनारों को तोड़कर बह रही है. अलकनंदा ने कई निचले इलाकों को डुबो दिया है, तो वहीं, ऋषिकेश में गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान तक पहुंच जाने से चिंता बढ़ चुकी है. स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग ने वहां अलर्ट जारी कर दिया है.

समाचार एजेंसी एएनआई ने ताज़ा खबर देते हुए बताया ​है कि अलकनंदा नदी का प्रवाह बढ़ जाने निचले इलाके चपेट में आ गए हैं और बाढ़ जैसे हालात बन रहे हैं. इससे पहले अलकनंदा के जलस्तर को लेकर स्टेट कंट्रोल रूम द्वारा अलर्ट जारी किए जाने की खबर आई थी. ऋषिकेश के साथ ही, पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, पौड़ी गढ़वाल और चमोली में नदियों के रौद्र रूप धारण करने के कगार पर पहुंचने की खबरें आ रही हैं. न्यूज़ 18 आपको लगातार इन हालात को लेकर अपडेट कर रहा है.

SEE VIDEO : अलर्ट : उत्तराखंड में उफान पर नदियां, खिसक रही ज़मीन तो दरक रही हैं चट्टानें



इससे पहले, न्यूज़18 ने तस्वीरों और वीडियो के ज़रिये पिथौरागढ़ और ऋषिकेश में नदियों के उफनने के हालात बयान किए थे. राज्य के पहाड़ी ज़िलों में कई जगह भू कटाव और भूस्खलन की खबरें बनी हुई हैं. यात्रियों और लोगों से बेहद सतर्क रहने की अपील भी लगातार की जा रही है.

Mask नहीं पहना तो मह‍िला पर सवार हुईं 'देवी' देखकर पुल‍िस भी हुई हैरान, Video Viral

Mask नहीं पहना तो मह‍िला पर सवार हुईं 'देवी' देखकर पुल‍िस भी हुई हैरान, Video Viral

Uttarakhand News: उत्तराखंड के पौड़ी में जब एक महिला ग़लत तरीके से मास्क पहने पकड़ी गई तो उसने एक नया ड्रामा शुरू कर दिया, जिसमें उसने कुछ ऐसी एक्टिंग की जिससे ऐसा लगे मानो उस पर देवी सवार हो गई है.

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कोरोना से बचाव के नियम तोड़ने वालों में से कई कानून के शिकंजे में फंसने पर एक से बढ़कर एक बहाने बनाते देखे गए हैं. मास्क नहीं लगाने की वजह किसी ने दम घुटना बताया, तो किसी ने पकड़े जाने ले कुछ वक़्त पहले ही मास्क उतारने का दावा किया. किसी ने जेब में मास्क होने की बात कही, तो कोई चालान काटने वाले से ही उलझता दिखा, लेकिन उत्तराखंड के पौड़ी में जब एक महिला ग़लत तरीके से मास्क पहने पकड़ी गई तो उसने एक नया ड्रामा शुरू कर दिया, जिसमें उसने कुछ ऐसी एक्टिंग की जिससे ऐसा लगे मानो उस पर देवी सवार हो गई है.

महिला के व्यवहार में अचानक आए इस बदलाव को देखकर भी वहां मौजूद पुलिस वाले हैरान नहीं हुए. सभी चुपचाप इस महिला की हरकत को देखते रहे. इन पुलिसवालों को ये समझते देर नहीं लगी कि महिला कोई ड्रामा कर रही है, लेकिन वो ये समझना चाह रहे थे कि आख़िर इस ड्रामे की थीम क्या है?

लेकिन इतना जरूर हुआ कि इतनी मेहनत की वजह से पुलिस ने इस बार इस महिला का चालान नहीं काटा. हालांकि पुलिस ने ड्रामा करने वाली महिला को चेतावनी दी और कहा कि अगली बार घर के बाहर बिना मास्क के पकड़े जाने पर उसका कोई ड्रामा काम नहीं आएगा. अब महिला का देवी वाला नाटक सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है.



एसआई दीपा मल्ल ने बताया क‍ि स्‍कूटी पर दो सवार थे और मास्‍क सही से नहीं पहना था. इसके बाद उन महिला पर देवी जैसा कुछ आया और उनको ह‍िदायत देकर छोड़ द‍िया. पुल‍िस ने महिला को कोरोना गाइडलाइन का पालन करने को कहा गया था जिस दौरान ये घटना हुई.

उत्तराखंड के 9 जिले खतरनाक, मई के 14 दिनों में पिछले 1 साल से ज्‍यादा कोविड मौतें!

उत्तराखंड के 9 जिले खतरनाक, मई के 14 दिनों में पिछले 1 साल से ज्‍यादा कोविड मौतें!

इस साल 30 अप्रैल तक पिछले करीब 13 महीनों में जितनी मौतें कोरोना संक्रमण के चलते रिकॉर्ड हुईं, उनसे ज़्यादा आधे महीने में होने से स्वास्थ्य सेवाएं, ग्रामीण इलाकों में हालात और सरकारी कोशिशें चर्चा के केंद्र में हैं.

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देहरादून. कोरोना संक्रमण उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में किस कदर फैल चुका है, इसकी बानगी इस आंकड़े ​से मिल रही है कि राज्य के नौ पहाड़ी ज़िलों में मई के आधे महीने में ही जितनी जानें कोविड 19 से जा चुकी हैं, वो इस साल 15 मार्च से 30 अप्रैल के बीच हुई मौतों से भी ज्‍यादा हैं. पिछले साल जब उत्तराखंड में कोरोना का पहला केस आया था, तबसे डेटा जुटा रही एक निजी संस्था ने इस विश्लेषण के जरिये चेताया भी है, कारण भी बताए हैं.

पहले अगर डेटा ही देख लें तो साफ पता चलता है कि 15 मार्च 2020 को उत्तराखंड में पहला कोरोना केस सामने आया था. तबसे 30 अप्रैल 2021 तक राज्य के नौ पहाड़ी ज़िलों में कोरोना से कुल 312 मौतें का सरकारी आंकड़ा सामने आया. लेकिन चिंताजनक तस्वीर यह है कि इन्हीं ज़िलों में 1 मई से 14 मई के बीच कुल मौतों की संख्या 331 रही.

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कितने भीतर तक पहुंचा वायरस?
हालात गंभीर इसलिए हो रहे हैं कि एक तो पहाड़ी ज़िले और उस पर भी दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों तक संक्रमण पहुंच चुका है. पौड़ी ज़िले के कुर्खयाल गांव में 141 में से 51 लोग जांच में पॉज़िटिव पाए गए. इस तस्वीर से चिंता की बात तो साफ है ही, यह भी ज़ाहिर है कि पहले ही सीमित स्वास्थ्य सेवाएं कितनी कम पड़ रही हैं.

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उत्तराखंड के नौ पहाड़ी ज़िलों में कोरोना मौतों के आंकड़ों से चिंता बढ़ी.


गांवों तक नहीं पहुंच रहीं दवाएं!
चमोली ज़िले में हालात कितने खतरनाक हैं, उसकी बानगी एरणी गांव के प्रधान मोहन नेगी ने दी. नेगी के हवाले से एक रिपोर्ट में कहा गया कि 'मेरे गांव में 80 फीसदी लोगों को बुखार है लेकिन कोई टेस्ट और इलाज उपलब्ध नहीं है. अफसरों ने वादा किया था, एक टीम आई भी थ जो कुछ सैंपल लेकर गई और कुछ दवाएं थमा गई.'

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इस पर राज्य सरकार का कहना है कि हर संभव कोशिश की जा रही है. इस बारे में न्यू इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट एक निजी फाउंडेशन के हवाले से यह भी कहती है कि हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर पहले ही बुरी तरह दबाव झेल रहा है और नाकाफी नज़र आ रहा है. फाउंडेशन के अनूप नौटियाल के हवाले से कहा गया कि समय से ठीक इलाज मिल जाए तो 90 फीसदी से ज़्यादा केस सामान्य ही हैं. "सरकार को हर संभव कोशिश करना चाहिए जैसे फोन पर डॉक्टरी सलाह देने और ग्रामीण या दूरस्थ इलाकों में कोविड किट की होम डिलीवरी आदि कदम उठाने ज़रूरी हैं."

उत्तराखंडः मैदानी इलाकों के अस्पताल में बेड फुल, पहाड़ की तरफ बढ़े कोरोना मरीज

उत्तराखंडः मैदानी इलाकों के अस्पताल में बेड फुल, पहाड़ की तरफ बढ़े कोरोना मरीज

Uttarakhand Corona News: उत्तराखंड के मैदानी इलाकों में कोविड अस्पतालों में बेड न मिलने से गढ़वाल की तरफ इलाज कराने पहुंच रहे मरीज. श्रीनगर के बेस हॉस्पिटल में 30 बेड वाला आईसीयू हुआ फुल. मरीजों के इलाज के लिए बढ़ाई जा रही सुविधाएं.

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पौड़ी गढ़वाल. राज्य में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच मैदानी इलाकों के सभी अस्पतालों में बेड फुल हो गए हैं. अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी भी है, जिसकी वजह से मरीज अब पहाड़ी इलाकों की तरफ बढ़ने लगे हैं. गढ़वाल के पर्वतीय क्षेत्रों के सबसे बड़े राजकीय बेस हॉस्पिटल श्रीनगर में पिछले कुछ दिनों में जिस तेजी से मरीज बढ़े हैं, वह इसका प्रमाण है. इस हॉस्पिटल में न सिर्फ उत्तराखंड, बल्कि यूपी, हरियाणा और दिल्ली से भी मरीज आ रहे हैं.

आमतौर पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए पहाड़ों से मैदानी क्षेत्रों में जाने का सिलसिला इन दिनों उल्टा हो गया है. तेज रफ्तार से बढ़ते कोरोना संक्रमण के मामलों के कारण प्रदेश के देहरादून, हरिद्वार आदि जैसे मैदानी क्षेत्रों के अस्पतालों में जगह नहीं बची है. ऐसे में वहां से निराश लौटते मरीज पहाड़ के अस्पतालों में पहुंच रहे हैं. पिछले कुछ दिनों में श्रीनगर के बेस हॉस्पिटल में बड़ी तादाद में कोरोना मरीज आए हैं, जिसके कारण अस्पताल के 30 बेड वाला आईसीयू फुल हो गया है. अस्पताल के अधीक्षक डॉ. केपी सिंह ने कहा कि मरीजों के बढ़ते दबाव के कारण 200 बेड वाले कोविड बेस अस्पताल में आईसीयू फुल हो गया है. इसलिए केवल आक्सीजन सपोर्ट बेड्स पर ही मरीजों को भर्ती किया जा रहा है.



डॉ. सिंह ने कहा कि अब नॉन कोविड 500 अतिरिक्त बेड्स पर कोरोना के इलाज की सुविधाएं जुटाई जा रही हैं. इस बीच अस्पताल में कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ती देख वेंटिलेटर्स भी लगाए जा रहे हैं. आईसीयू के नोडल अफसर डॉ. अजय विक्रम सिंह ने कहा कि इस बेस हॉस्पिटल में 120 वेटिंलेटर्स थे, जिनमें से 40 को देहरादून भेज दिया गया है. हाल के दिनों में यहां मरीजों की संख्या बढ़ने के बाद अब बचे सभी 80 वेटिंलेटर्स को भी इंस्टॉल कर लिया गया है.
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