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बद्रीनाथ यात्रा पर संकट, हाथीपहाड़ के पास भारी भूस्‍खलन

बद्रीनाथ यात्रा पर संकट, हाथीपहाड़ के पास भारी भूस्‍खलन

हालिया भूस्‍खलन के बाद बद्रीनाथ यात्रा की तैयारी को लेकर एक बार फिर प्रशासन के दावे पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं. जोशीमठ से आगे मारवाड़ी के पास भूस्खलन में हाथीपहाड़ का लगभग 150 मीटर का हिस्सा धंस गया है, जबकि 400-500 मीटर के हिस्से में मलबा आ रखा है.

हालिया भूस्‍खलन के बाद बद्रीनाथ यात्रा की तैयारी को लेकर एक बार फिर प्रशासन के दावे पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं. जोशीमठ से आगे मारवाड़ी के पास भूस्खलन में हाथीपहाड़ का लगभग 150 मीटर का हिस्सा धंस गया है, जबकि 400-500 मीटर के हिस्से में मलबा आ रखा है.

हालिया भूस्‍खलन के बाद बद्रीनाथ यात्रा की तैयारी को लेकर एक बार फिर प्रशासन के दावे पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं. जोशीमठ से आगे मारवाड़ी के पास भूस्खलन में हाथीपहाड़ का लगभग 150 मीटर का हिस्सा धंस गया है, जबकि 400-500 मीटर के हिस्से में मलबा आ रखा है.

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    हालिया भूस्‍खलन के बाद बद्रीनाथ यात्रा की तैयारी को लेकर एक बार फिर प्रशासन के दावे पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं. जोशीमठ से आगे मारवाड़ी के पास भूस्खलन में हाथीपहाड़ का लगभग 150 मीटर का हिस्सा धंस गया है, जबकि 400-500 मीटर के हिस्से में मलबा आ रखा है.

    अपर मुख्य सचिव राकेश शर्मा ने खुद इसकी पुष्टि की है, लेकिन उन्‍होंने बद्रीनाथ यात्रा को रोके जाने की खबरों को पूरी तरह से गलत बताया है. उन्‍होंने पत्रकारों से कहा कि सरकार ने वैकल्पिक इंतजाम किए हैं. इस तरह की व्यवस्थाएं की गई हैं कि यात्रा बाधित न हो. बीआरओ के अधिकारियों ने आश्वस्त किया है कि रास्ते के इस हिस्से को 72 घंटे में दोबारा गाडि़यां चलने लायक बना दिया जाएगा.

    अपर मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि यात्रा को रोके जाने की खबरें बिल्कुल भी सही नहीं है. मारवाड़ी के पास भूस्खलन हुआ था, जिसके बाद बीआरओ ने मार्ग खोलने के प्रयास किए, लेकिन गुरुवार को 4:30 बजे दोबारा वहीं पर भूस्खलन हुआ.

    जिलाधिकारी व अन्य अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे. शासन से वरिष्ठ अधिकारियों को भी भेजा गया है साथ ही सचिव आपदा प्रबंधन, सचिव लोक निर्माण विभाग व आईजी गढ़वाल को मौके पर भेजा गया है. तीनों अधिकारियों को गोविंदघाट में कैम्प करने के निर्देश दिए गए हैं.

    अपर मुख्य सचिव ने बताया कि मुख्यमंत्री हरीश रावत ने स्वयं जोशीमठ पहुंच कर मौके का निरीक्षण किया है. गुरुवार को बद्रीनाथ मार्ग से 650 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया, इनमें से 150 को हेलीकॉप्टर से जबकि 500 श्रद्धालुओं को सड़क मार्ग से पहुंचाया गया.

    शर्मा ने कहा कि कोई भी यात्री किसी भी स्थान पर फंसा नहीं है, केवल 150 श्रद्धालु अपनी इच्छा से बद्रीनाथ में रूके हैं. जब तक मार्ग पूरी तरह से गाडि़यों की आवाजाही के लिए खुल नहीं जाता है, श्रद्धालुओं को वाहनों की अदला-बदली करके यात्रा कराई जाएगी.

    यात्रियों को 2 किमी का पैदल ट्रैक करना होगा, इसके बाद गोविंदघाट से गाड़ियों से उन्हें बद्रीनाथ पहुंचाया जाएगा. इसके लिए 30 गाड़ियां पहले से ही मौजूद है. बद्रीनाथ व अन्य स्थानों पर यात्रियों के लिए खाने-पीने की पूरी व्यवस्था की गई है.

    उन्होंने कहा कि सरकार का पूरा प्रयास है कि प्रकृति के अवरोध से यात्रा में किसी प्रकार की दिक्‍कतें न आए. साथ ही यात्रियों को असुविधाएं भी न हों. हमारी प्राथमिकता है कि यात्रा लगातार चलती रहे और यात्री भी पूरी तरह से सुरक्षित रहे.

    जब तक कि बद्रीनाथ मार्ग पर गाडि़यों की आवाजाही पूरी तरह शुरू नहीं हो जाती है, एक पैकेज तैयार किया जा रहा है. इसके तहत मात्र 750 रुपए के भुगतान पर गोविंदघाट से जोशीमठ हेलीकॉप्टर से जाया जा सकेगा.

     

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