रोजगार देने के उद्देश्य से खोला गया बांस प्रशिक्षण केंद्र बंदी की कगार पर

बांस के जरिए बेरोजगारों को रोजगार देने के उद्देश्य से खोला गया बांस प्रशिक्षण केंद्र बंदी की कगार पर है.कभी एक करोड़ का टर्नओवर और 100 से ज्यादा बेरोजगारों को रोजगार देने वाले केंद्र में आज मात्र एक कर्मचारी रह गया है.

News18 Uttarakhand
Updated: September 7, 2018, 1:01 PM IST
रोजगार देने के उद्देश्य से खोला गया बांस प्रशिक्षण केंद्र बंदी की कगार पर
बांस प्रशिक्षण केंद्र में सौ की जगह रह गए हैं गिने चुने कारीगर
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Updated: September 7, 2018, 1:01 PM IST
बांस के जरिए बेरोजगारों को रोजगार देने के उद्देश्य से खोला गया बांस प्रशिक्षण केंद्र बंदी की कगार पर है.कभी एक करोड़ का टर्नओवर और 100 से ज्यादा बेरोजगारों को रोजगार देने वाले केंद्र में आज मात्र एक कर्मचारी रह गया है.उत्तराखंड बांस एवं रेशा विकास परिषद की ओर से साल 2005 में कोटद्वार के पनियाली क्षेत्र में खोला गया बांस प्रशिक्षण केंद्र के हालात बेहद खराब हो चुके है.केंद्र में लगी दो करोड़ रुपये की मशीनें धूल फांक रही हैं जबकि यह केंद्र एक मात्र संविधा कर्मचारी के भरोसे केंद्र चल रहा है.बांस से बने फर्नीचर की दुनिया भर में तेजी से मांग बढ़ रही है.ऐसे में लोगों को रोजगार देने और प्रशिक्षण देकर स्वःरोजगार से जोड़ने के लिए बांस प्रशिक्षण केंद्र एक बड़ा जरिया हो सकता है.

ऐसा नहीं है कि केंद्र के हालात शुरुआत से ही ऐसे रहे हों.प्रशिक्षण केंद्र के खुलने के चार सालों तक बड़ी संख्या में महिलाओं और युवाओं ने यहां से प्रशिक्षण लिया और रोजगार प्राप्त किया.केंद्र को बांस से बने फर्नीचर और सजावट के सामान बनाने का खूब काम मिलता था जिसके लिए 100 से भी ज्यादा कुशल कारीगर केंद्र में काम किया करते थे.लेकिन सरकारों की अनदेखी और परिषद के उच्च अधिकारियों की सुस्ती का नतीजा रहा कि कुछ ही सालों में केंद्र के हालात खराब हो गए.

बजट की कमी और प्रचार-प्रसार न होने से केंद्र गुमनामी के अंधेरे में पहुंच गया है.वहीं केंद्र की दुर्दशा को लेकर कैबिनेट मंत्री ने अफसोस जाहिर किया है.वन एवं पर्यावरण मंत्री हरक सिंह रावत का कहना है कि केंद्र के लिए जल्द ही बजट स्वीकृत किया जाएगा. साथ ही दूसरे प्रदेशों से बांस लाने की बजाय उत्तराखंड में ही बांस की प्लान्टेशन की जाएगी.

( अनुपम भारद्वाज की रिपोर्ट )
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