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Uttarakhand Video : डर और अंधेरे में डूबा है पौड़ी का यह गांव, यहां मना है दीवाली मनाना

Uttarakhand Video : डर और अंधेरे में डूबा है पौड़ी का यह गांव, यहां मना है दीवाली मनाना

पौड़ी के गांव में विस्थापन की मांग लंबे समय से बनी हुई है.

पौड़ी के गांव में विस्थापन की मांग लंबे समय से बनी हुई है.

Diwali 2021 : दीवाली से जहां पूरा देश जगमग हो चुका है, तो वहीं वन कानूनों (Forest Laws) के जाल में फंसे ग्रामीण अंधेरे में जीने को मजबूर हैं. जश्न और धूमधाम से दूर इन ग्रामीणों की समस्या यह है कि जंगली जानवरों (Wildlife) से जान बची रहे. बरसों से ग्रामीण गांव के विस्थापन की मांग पर अड़े हैं, लेकिन मांग पर एक्शन का आलम यह है कि राज्य सरकार (Uttarakhand Government) ने अब तक प्रस्ताव भी नहीं भेजा है. न्यूज़18 ने अंधेरे में जी रहे इन लोगों के साथ बातचीत की और दीपावली के मौके पर इनका दर्द जाना. देखिए पूरी रिपोर्ट.

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पौड़ी गढ़वाल. पूरे देश में जहां दीपावली का त्योहार धूमधाम से मनाए जाने की तैयारियां ज़ोरों पर चल रही हैं, वहीं एक गांव ऐसा भी है, जहां हर त्योहार का मतलब जश्न नहीं बल्कि पाबंदी है. पौड़ी जनपद में एक ऐसा भी गांव है, जहां किसी भी त्योहार के मायने अलग हो जाते हैं. असल में, यहां वन कानूनों का ऐसा जाल फैला हुआ है कि यहां रहने वाली आबादी किसी भी तरह की धूमधाम नहीं कर सकती, पटाखे चलाना तो दूर यहां जगमग तक नहीं की जा सकती. त्योहारों की पाबंदी के बीच यह भी एक फैक्ट है कि इन गांवों में मूलभूत सुविधाओं तक पर सवालिया निशान लगा हुआ है.

वन कानूनों के चलते नैनीडांडा ब्लॉक के राजस्व ग्राम पाण्ड के ग्रामीण आज भी मूलभूत सुविधाओं को तरस रहे हैं. वन कानूनों के चलते गांव में न तो बिजली है, न सड़क. आलम ये है कि गांव में अपने ही घरों तक जाने के लिए ग्रामीणों को पहले फॉरेस्ट विभाग से परमिशन लेनी पड़ती है. सड़क तक पहुंचने के लिए भी ग्रामीणों को 8 किलोमीटर के घने जंगल और जंगली जानवरों के खतरे से होकर गुज़रना पड़ता है. कॉर्बेट टाइगर रिज़र्व के बफर ज़ोन में बसे करीब 75 परिवार वाले इस गांव में अब महज़ 15 परिवार ही रह गए हैं.

पाबंदियों के बीच क्या कह रहे हैं ग्रामीण?
कॉर्बेट टाइगर रिज़र्व के कोर ज़ोन से लगे बफर ज़ोन के इस गांव में किसी भी तरह के निर्माण पर भी पूरी तरह से पाबंदी है. गांव के आधे से ज्यादा मकान जर्जर हालत में हैं. इसके बावजूद ग्रामीण अपने मकानों की मरम्मत या नए निर्माण गांव में नहीं कर सकते. इस तरह जीने से तंग आ चुके ग्रामीण कई सालों से विस्थापन की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी मांग पर कोई सुनवाई नहीं है. है भी तो कछुआ गति से.

न्यूज़18 ने इस गांव के सुरेद्र प्रसाद, बनवारीलाल और सावित्री देवी आदि से बातचीत की तो सभी ने दर्द बयां किया. इन लोगों का कहना है कि यहां शादी ब्याह का उत्सव भी नहीं मना पाते. यहां पहले गांव में आने के लिए 12 रुपये की पर्ची कटती थी, अब 100 रुपये वसूले जा रहे हैं. ग्रामीणों ने यह भी कहा कि गांव के हालात जीने लायक नहीं हैं और इसी वजह से यहां से बड़ी आबादी पलायन कर चुकी है. वहीं, सरकार इस स्थिति को बदलने की कोशिश की बात कर रही है.

‘जल्द ही होगा विस्थापन’
उत्तराखंड के वन मंत्री हरक सिंह रावत का दावा है कि जल्द ही गांवों को विस्थापित कर दिया जाएगा. न्यूज़18 से बातचीत में उन्होंने कहा कि इस मामले पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है और जल्द ही विस्थापन के लिए एनजीटी को प्रस्ताव भेजा जाएगा. सालों से इन समस्याओं से जूझ रहे ग्रामीणों को यही इंतज़ार है कि कब उनके जीवन में उजाला होगा.

Tags: Diwali 2021, Forest land, Pauri news, Uttarakhand news

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