चंद्रशेखर आजाद के करीबी व गढ़वाल के सबसे सक्रिय क्रांतिकारी थे भवानी सिंह रावत

8 अक्टूबर 1910 को ब्रिटिश आर्मी में कैप्टन रहे नाथू सिंह के घर जन्मे भवानी सिंह रावत का नाम गढ़वाल के सबसे सक्रिय क्रांतिकारियों में गिना जाता है. लैंसडाउन आर्मी स्कूल में शिक्षा ग्रहण करने के दौरान उन्होंने पाया कि अंग्रेजों के बच्चे उनके साथ भेदभाव किया करते हैं. उसी समय से उन्हें अंग्रेजों से नफरत होने लगी थी.

News18 Uttarakhand
Updated: October 8, 2018, 11:36 AM IST
चंद्रशेखर आजाद के करीबी व गढ़वाल के सबसे सक्रिय क्रांतिकारी थे भवानी सिंह रावत
भवानी सिंह रावत में बचपन से ही ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ आक्रोश था.
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Updated: October 8, 2018, 11:36 AM IST
देश की आजादी में क्रांतिकारियों का अहम योगदान रहा है. क्रांतिकारियों की बदौलत देश को अंग्रेजी हुकूमत से छुटकारा मिल पाया. इन्हीं वीर क्रांतिकारियों में शामिल है भवानी सिंह रावत का नाम. आज सोमवार 8 अक्टूबर को चंद्र शेखर आजाद के सहयोगी रहे भवानी सिंह रावत की जयंती मनाई जा रही है.

8 अक्टूबर 1910 को ब्रिटिश आर्मी में कैप्टन रहे नाथू सिंह के घर जन्मे भवानी सिंह रावत का नाम गढ़वाल के सबसे सक्रिय क्रांतिकारियों में गिना जाता है. लैंसडाउन आर्मी स्कूल में शिक्षा ग्रहण करने के दौरान उन्होंने पाया कि अंग्रेजों के बच्चे उनके साथ भेदभाव किया करते हैं. उसी समय से उन्हें अंग्रेजों से नफरत होने लगी थी. यानी आर्मी कैप्टन के परिवार से होने के बावजूद भवानी सिंह रावत में बचपन से ही ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ आक्रोश था. जब भवानी सिंह रावत ने हिन्दू कॉलेज में एडमिशन लिया तब वे यहां क्रांतिकारियों के संपर्क में आए. उन्होंने क्रांतिकारी विचारधारा को अपनाकर देश की आजादी को ही अपना लक्ष्य बना लिया.

भवानी सिंह रावत का चंद्रशेखर आजाद से गहरा नाता रहा है. काकोरी कांड के बाद चंद्रशेखर आजाद अपने क्रांतिकारी साथियों के साथ दुगड्डा आए थे. तब भवानी सिंह रावत का घर ही चंद्रशेखर आजाद का ठिकाना हुआ करता था. करीब एक हफ्ते तक चंद्रशेखर आजाद अपने चार साथियों के साथ दुगड्डा के नाथुपुर गांव में भवानी सिंह के घर पर रहे. आज भी उस घर में भवानी सिंह रावत का परिवार रहता है और आजाद की यादों को संजोए हुए है. उस दौरान आजाद ने दुगड्डा रेंज के जंगलों में भवानी सिंह और साथियों को शस्त्र प्रशिक्षण दिया था. जिस पेड़ पर आजाद ने निशाना लगाया था उस पेड़ के अवशेष आज भी उसी स्थान में देखे जा सकते हैं.

चंद्रशेखर आजाद की विचारधारा से भवानी सिंह रावत इतने प्रभावित थे कि वो आजाद को अपना आदर्श मानते थे. अपने आखिरी क्षणों में भी वे चंद्रशेखर आजाद को याद किया करते थे. यही वजह रही कि भवानी सिंह रावत की समाधि आजाद के प्रशिक्षण स्थल के पास ही बनाई गई है. यहां हर साल 8 अक्टूबर को क्रांतिकारी भवानी सिंह रावत को याद कर उन्हें श्रद्धांजलि दी जाती है.

(कोटद्वार से अनुपम की रिपोर्ट)

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First published: October 8, 2018, 11:36 AM IST
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