सुविधाओं की कमी के चलते पहाड़ों पर नहीं आना चाहते डॉक्टर
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सुविधाओं की कमी के चलते पहाड़ों पर नहीं आना चाहते डॉक्टर
सरकार भले ही पहाड़ों में स्वास्थ्य सुविधा सुधारने के लिए प्रयास कर रही हो, लेकिन हालात सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं. तैनाती के बावजूद डॉक्टर पहाड़ चढ़ने को तैयार नहीं हैं. टिहरी जिले में 36 डॉक्टरों की तैनाती हुई, लेकिन 19 डॉक्टरों ने सीएमओ कार्यालय में ज्वाइनिंग दी, जिसमें से सिर्फ 14 डॉक्टर ही तैनाती स्थल पर पहुंचे हैं.

सरकार भले ही पहाड़ों में स्वास्थ्य सुविधा सुधारने के लिए प्रयास कर रही हो, लेकिन हालात सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं. तैनाती के बावजूद डॉक्टर पहाड़ चढ़ने को तैयार नहीं हैं. टिहरी जिले में 36 डॉक्टरों की तैनाती हुई, लेकिन 19 डॉक्टरों ने सीएमओ कार्यालय में ज्वाइनिंग दी, जिसमें से सिर्फ 14 डॉक्टर ही तैनाती स्थल पर पहुंचे हैं.

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सरकार भले ही पहाड़ों में स्वास्थ्य सुविधा सुधारने के लिए प्रयास कर रही हो, लेकिन हालात सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं. तैनाती के बावजूद डॉक्टर पहाड़ चढ़ने को तैयार नहीं हैं. टिहरी जिले में 36 डॉक्टरों की तैनाती हुई, लेकिन 19 डॉक्टरों ने सीएमओ कार्यालय में ज्वाइनिंग दी, जिसमें से सिर्फ 14 डॉक्टर ही तैनाती स्थल पर पहुंचे हैं.

लंबे समय से डॉक्टरों की कमी झेल रहे टिहरी जिले को 25 मार्च 2015 को 36 डॉक्टर मिले.सभी नौ विकासखंडों में आवश्यकता के अनुसार डॉक्टरों की पोस्टिंग की गई, लेकिन एक महीने बाद भी आधे से अधिक डॉक्टरों ने ज्वाइनिंग नहीं ली है.

कई डॉक्टरों ने तो सीएमओ कार्यालय में ज्वाइनिंग भी ली और पोस्टिंग स्थल पर जाकर अस्पताल का जायजा भी लिया, लेकिन दूरस्थ क्षेत्र होने के चलते दूसरे ही दिन वापसी कर ली. अब ये डॉक्टर देहरादून, ऋषिकेश, हरिद्वार में नियुक्ति के लिए नेताओं और मंत्रियों की जुगत में लगे हैं.



आइए एक नजर डालते हैं नवनियुक्त डॉक्टरें की सूची पर-
विकासखंड का नाम     कुल डॉक्टर         ज्वाइन करने वाले डॉक्टर

चंबा                                     7                                4

फकोट                                 4                                 1

नंदगांव                                4                                3

पिलखी                                3                                 2

प्रतापनगर                           6                                 3

हिंडोलाखाल                        6                                 1

कीर्तिनगर                            2                                2

थत्यूड़                                 3                                 3

छाम                                    1                                 -

कुल  योग                            36                             19

स्वास्थ्य सुविधाओं से सबसे अधिक पिछड़े क्षेत्र भिलंगना में तो एक भी डॉक्टर नहीं पहुंचा. वहीं जिला मुख्यालय के बौराड़ी अस्पताल में 25 डॉक्टरों की एवज में 7 डॉक्टरों से काम चलाया जा रहा है. यही नहीं करीब आठ महीने से सीएमएस का पद भी खाली पड़ा है.

डॉक्टरों का मानना है कि सुविधाओं की कमी के चलते पहाड़ों पर डॉक्टर नहीं आना चाहते. दरअसल पहाड़ों में भगवान भरोसे चल रहे स्वास्थ्य महकमे के डॉक्टरों को अब एक ऐसे और कोर्स की जरूरत है, जो पहाड़ की पीड़ा को समझने में उनकी मदद करें और उनमें सोए हुए सेवाभाव को जाग्रत कर सकें. ऐसे में सवाल तो कई उठते हैं, लेकिन बड़ा सवाल यही है कि हमेशा से मूलभूत सुविधाओं से जूझ रहे पहाड़ों में आखिर हालात कब सुधरेंगे.

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