अलकनंदा के बगल में बिछाई गई पेयजल लाइन, नदी के उफ़ान में आते ही बही

सामाजिक कार्यकर्ता पूछते हैं कि जब पहले से ही यह आशंका थी तो इस लाइन को यहां बिछाया ही क्यों गया?

Sudhir Bhatt | News18 Uttarakhand
Updated: August 31, 2018, 3:56 PM IST
अलकनंदा के बगल में बिछाई गई पेयजल लाइन, नदी के उफ़ान में आते ही बही
अलकनन्दा नदी के किनारे बिछाई जा रही 6 किलोमीटर की पेयजल लाइन के सपोर्ट कई जगह नदी के तेज बहाव में बह गई है.
Sudhir Bhatt | News18 Uttarakhand
Updated: August 31, 2018, 3:56 PM IST
श्रीनगर गढ़वाल व मंडल मुख्यालय पौड़ी समेत समीपवर्ती क्षेत्रों की लाखों की आबादी के लिए 12 करोड़ 70 लाख 98 हजार रुपये की लागत से निर्माणाधीन श्रीनगर-पौड़ी वैकल्पिक पेयजल स्त्रोत योजना का निर्माणकार्य सवालों के घेरे में है. दरअसल योजना के तहत अलकनन्दा नदी के किनारे बिछाई जा रही 6 किलोमीटर की पेयजल लाइन के सपोर्ट कई जगह नदी के तेज बहाव में बह गई है, जिसकी आशंका पहले से ही थी. इसलिए लोग इसमें घोटाले की आशंका भी जता रहे हैं.

बता दें कि जलविद्युत परियोजना निर्माण के बाद अलकनन्दा नदी के जल प्रवाह में आई कमी से पैदा हुए पेयजल संकट को खत्म करने के लिए श्रीनगर-पौड़ी वैकल्पिक पेयजल स्त्रोत योजना का निर्माण किया जा रहा है.

देवप्रयाग जलनिगम ने जलविद्युत परियोजना के डिसिल्टिंग बेसिन टैंक से जलसंस्थान तक भूमिगत पेयजल लाइन बिछानी थी. लेकिन अनजाने कारणों से इसे भूमिगत बजाने के बजाय नदी किनारे ऊपर से निकाल दिया गया. बारिश में नदी का प्रवाह बढ़ने के बाद यह पाइप लाइन नदी में बह गई.

कमाल की बात यह है कि जल संस्थान के अधिकारी मानते हैं कि नदी के बगल से पाइपलाइन बिछाने से उसमें समस्या पैदा होने की आशंका है. जल संस्थान  के सहायक अभियंता कृष्णकांत ने न्यूज़ 18 के सवाल के जवाब में कहा कि जिस तरह पेयजल लाइन बिछाई गई है उसमें समस्या आने की आशंका थी.

सामाजिक कार्यकर्ता देवेन्द्र फरस्वाण को इसमें घोटाले की आशंका भी नज़र आती है. वह कहते हैं कि यह समझने के लिए बहुत ज़्यादा जानकार नहीं होना चाहिए कि नदी के बढ़ते ही उसके बगल में बिछी लाइन बह जाएगी. वह पूछते हैं कि जब पहले से ही यह आशंका थी तो इस लाइन को यहां बिछाया ही क्यों गया?

फरस्वाण आशंका जताते हैं कि जानबूझकर ऐसा किया गया ताकि पैसे की बंदरबांट की जा सके क्योंकि लाइन के बहने के बाद उसकी क्वालिटी को लेकर सवाल नहीं हो सकते. इसके अलावा बार-बार पेयजल लाइन डालने के नाम पर पैसा बनाया जा सकता है.

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