पूर्व सैनिक रैलीः दर्द और गर्व दोनों दिखे शहीदों के परिजनों के चेहरों पर

Sudhir Bhatt | News18India
Updated: October 13, 2017, 7:55 PM IST
पूर्व सैनिक रैलीः दर्द और गर्व दोनों दिखे शहीदों के परिजनों के चेहरों पर
Sudhir Bhatt | News18India
Updated: October 13, 2017, 7:55 PM IST
देवभूमि उत्तराखंड न केवल अपनी समृद्ध और ऐतिहासिक संस्कृति के लिए जाना जाता है बल्कि देश के लिए हंसते-हंसते जान न्योच्छावर करने वाले रणबांकुरों के लिए भी जाना जाता है. उत्तराखंड के शहीद होने वाले हर सैनिक के परिजनों के लिए जहां शहादत एक गौरव होती है वहीं जीवन में उनकी कमी उनकी आंखों को हमेशा यादों के सहारे नम करती रहती है.

देवभूमि उत्तराखंड की गौरवशाली परम्परा में देश पर कुर्बान हुए हर सैनिक के रूप में किसी ने अपने पिता खोया, किसी ने बेटा तो किसी ने छोटी सी उम्र में अपने पति को. ऐसे हर एक परिजन को अपने लाडले की शहादत पर फक्र भी है तो जीवन भर का दुख भी.

श्रीनगर में आयोजित पूर्व सैनिक रैली में जब शहीदों के परिजनों को सम्मानित किया गया तो शहीदों की यादें उनके परिजनों की आंखों से नमी को छुपा नहीं सकी.

सम्मानित होने वाली वीर नारियों में मंजू देवी भी शामिल थीं जिन्होंने 21 वर्ष की उम्र में अपने पति को उस समय खोया जब विवाह के कुछ माह ही बीते थे.

आनन्द सिंह का बेटा कुछ समय पूर्व आतंकवादियों से लोहा लेते हुए शहीद हो गया था. अपनों को खोने का दर्द इनके चेहरे पर दिखता है और साथ ही सेना पर गर्व का अहसास भी नज़र आता है.

पूर्व सैनिक रैली के दौरान उन 8 पूर्व सैनिकों को भी सम्मानित किया गया जो सेवाकाल के दौरान किसी घटना में दिव्यांग हो गए.

इस दौरान उन 11 वीर नारियों को भी दस हजार रुपये का चेक देकर सम्मानित किया गया जिन्होंने देश की रक्षा करते हुए अपने बेटों और सुहाग को खो दिया. वीर नारियों और पूर्व सैनिकों को सम्मानित करने वाले 6 माउंटेन डिवीजन के जनरल आफिसर कमांड मेजर जनरल कबीन्द्र सिंह ने कहा कि शहीदों की वीर गाथाएं हमेशा हर सैनिक को देश सेवा के लिए प्रेरित करती हैं.

 
First published: October 13, 2017
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