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राजकीय मेडिकल कॉलेज के एमबीबीएस डॉक्टर मुश्किल में

राजकीय मेडिकल कॉलेज के एमबीबीएस डॉक्टर मुश्किल में

सरकारी क्षेत्र के राज्य में पहला राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर गढ़वाल में बतौर प्रभारी प्राचार्य का जिम्मा संभालते ही जिलाधिकारी पौड़ी के सामने नई मुश्किल खड़ी हो गई है.

सरकारी क्षेत्र के राज्य में पहला राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर गढ़वाल में बतौर प्रभारी प्राचार्य का जिम्मा संभालते ही जिलाधिकारी पौड़ी के सामने नई मुश्किल खड़ी हो गई है.

सरकारी क्षेत्र के राज्य में पहला राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर गढ़वाल में बतौर प्रभारी प्राचार्य का जिम्मा संभालते ही जिलाधिकारी पौड़ी के सामने नई मुश्किल खड़ी हो गई है.

सरकारी क्षेत्र के राज्य में पहला राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर गढ़वाल में बतौर प्रभारी प्राचार्य का जिम्मा संभालते ही जिलाधिकारी पौड़ी के सामने नई मुश्किल खड़ी हो गई है. कॉलेज से एक दिन बाद पासआऊट होने वाले 55 एमबीबीएस छात्र-छात्राओं को कॉलेज में ही बतौर जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर के तौर पर तैनात किया जाना है लेकिन कॉलेज में पद खाली नहीं होने से स्थिति बिगड़ गई है.

कॉलेज में अभी एमबीबीएस दूसरे बैच के पासआऊट 85 छात्र-छात्राएं बतौर जेआर डॉक्टर कार्यरत हैं और 31 मार्च को उनका कार्यकाल पूरा होने के बाद ही तीसरे बैच के 55 छात्र-छात्राओं को उनकी जगह तैनात किया जा सकेगा. ऐसे में सभी 55 चिकित्सकों को एक महीने तक खाली बैठकर इंतजार करना होगा.

गौरतलब है कि मेडिकल कॉलेज श्रीनगर से एमबीबीएस डॉक्टरों के अब तक दो बैच निकल चुके हैं. प्रथम पासआऊट बैच के सभी छात्र-छात्राएं डॉक्टर बनने के बाद राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में सेवाएं दे रहे हैं. 2010 में पासआऊट दूसरे बैच के 85 एमबीबीएस छात्र-छात्राएं मेडिकल कॉलेज में बतौर जूनियर रेंजिडेंट डॉक्टर अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

मेडिकल कॉलेज में एक साल से बतौर जेआर डॉक्टर अपनी सेवाएं दे रहे सभी 85 जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों को अनुबंध के मुताबिक एक साल की जेआर के तौर पर सेवाएं देने के बाद पर्वतीय क्षेत्रों के खाली अस्पतालों में तैनात किया जाना है. परेशानी यह है कि जहां 85 जेआर डॉक्टरों का एक साल का कार्यकाल 31 मार्च को समाप्त हो रहा है तो वहीं कॉलेज से पासआऊट होने वाले 55 एमबीबीएस डॉक्टरों को बतौर जेआर डॉक्टर मेडिकल कॉलेज में तैनात किया जाना है.

ऐसे में जाहिर सी बात है कि सभी 55 एमबीबीएस डॉक्टरों को जेआर डॉक्टर के तौर पर मेडिकल कॉलेज में सेवाएं देने के लिए एक महीने का इंतजार करना ही पड़ेगा. कॉलेज प्राचार्य का अतिरिक्त प्रभार मिलने के बाद पहली बार मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य कक्ष में पहुंचे डीएम पौड़ी चन्द्रशेखर भट्ट से मामले पर पासआऊट होने वाले सभी 55 एमबीबीएस डॉक्टरों ने मुलाकात की.

डीएम पौड़ी और मेडिकल कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य चन्द्रशेखर भट्ट का कहना है कि शासन को मामले से अवगत करा दिया गया है और जल्द इसका समाधान निकाल लिया जायेगा. ऐसे में शासन के सामने सवाल है कि मेडिकल कॉलेज में जेआर डॉक्टरों के पद खाली न होने से कैसे 55 और डॉक्टरों को जेआर डॉक्टर की जिम्मेदारी दी जाये और यदि नहीं दी जाती है तो फिर ये उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ होगा.

Tags: Pauri Garhwal news, Uttarakhand news

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