कोटद्वार में वन विभाग पर वन गुज्जरों की झोपड़ी में आग लगाने का आरोप... हाईकोर्ट पहुंचा मामला

कोटद्वार में ग्वालगढ़ इलाके के जंगलों में रह रहे गुज्जरों  का आरोप है कि अतिक्रमण हटाने के नाम पर उनकी झोपड़ी में आग लगा दी गई है.
कोटद्वार में ग्वालगढ़ इलाके के जंगलों में रह रहे गुज्जरों का आरोप है कि अतिक्रमण हटाने के नाम पर उनकी झोपड़ी में आग लगा दी गई है.

पार्षदों के हंगामा करने के बाद वन मंत्री ने इस मामले के दोषियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने का ऐलान किया है.

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कोटद्वार. देहरादून के बाद कोटद्वार से भी वनकर्मियों के वन गुज्जरों के साथ ज़्यादती की ख़बर आ रही है. हालांकि यह भी सच है कि कोटद्वार रेंज के ग्वालगढ़ इलाके के जंगलों में रह रहे गुज्जरों का अतिक्रमण हटाना वन विभाग के लिए सिरदर्द बन चुका है. अब गुज्जरों का आरोप है कि अतिक्रमण हटाने के नाम पर उनकी झोपड़ी में आग लगा दी गई है. एक जनहित याचिका के माध्यम से यह मामला अब हाईकोर्ट तक पहुंच गया है तो इस मामले में राजनीति भी तेज हो गई है. पार्षदों के हंगामा करने के बाद वन मंत्री ने इस मामले के दोषियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने का ऐलान किया है.

'लॉकडाउन से फंसे'

गुज्जरों का आरोप है कि लॉकडाउन के कारण वे ग्रीष्मकालीन प्रवास के लिए दूसरे स्थान नहीं जा सके लेकिन वन विभाग ने उनकी एक नहीं सुनी और कोटद्वार रेंजर ब्रिज बिहारी शर्मा और उनकी टीम ने उनकी झोपड़ी तोड़ डाली. वन गुज्जरों ने वन कर्मचारियों का  विरोध किया तो उनकी झोपड़ी में आग लगा दी गई.



गुज्जरों के समर्थन में उतरे नगर निगम पार्षदों ने रेंज ऑफिस में जमकर हंगामा भी काटा था जिसके बाद विभागीय स्तर पर जांच की जा रही है. वहीं अब मामला हाईकोर्ट भी जा पहुंचा है. गुज्जर समुदाय की ओर से हाईकोर्ट में पीआईएल दाखिल किए जाने से वन विभाग की मुश्किलें और बढ़ गई हैं.

उच्च स्तरीय जांच

इस सबके बीच वन मंत्री हरक सिंह रावत का कहना है कि मामले की उच्च स्तरीय जांच की जा रही है. वन विभाग के आला अधिकारी को इसकी जांच सौंपी गई है जो 15 दिनों के भीतर अपनी जांच विभाग को सौपेंगे.

वन मंत्री का कहना है कि देहरादून में गुज्जरों के साथ हुई मारपीट की घटना और कोटद्वार में गुज्जरों की झोपड़ी में आग लगाए जाने के मामले में जो भी कर्मचारी या अधिकारी दोषी पाया जाता है उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी.
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