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क्या इस तरह से होगी पहाड़ में उच्च शिक्षा बेहतर!
Pauri-Garhwal News in Hindi

Anupam Bhardwaj | News18 Uttarakhand
Updated: March 6, 2020, 5:29 PM IST
क्या इस तरह से होगी पहाड़ में उच्च शिक्षा बेहतर!
पौड़ी गढ़वाल से भी एक निजी विश्वविद्यालय को लेकर भी सोशल मीडिया पर ख़बरें वायरल हैं कि यह नियमों को ताक पर रखकर चल रहा है.

पोखड़ा ब्लॉक में स्थित इस निजी विश्वविद्यालय में कागजों पर आधा दर्जन से ज्यादा डिग्री कोर्स कराए जा रहे हैं.

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कोटद्वार. कभी शिक्षा के हब के रूप में मशहूर रहे उत्तराखंड में सिस्टम की लापरवाहियों से एक के बाद एक गड़बड़ियां सामने आ रही हैं. बिना रजिस्ट्रेशन के स्कूलों में आपराधिक वारदातों से प्रदेश का नाम खराब हुआ तो उच्च शिक्षा में भी हालात कुछ ठीक नहीं रहे. निजी एमबीबीएस और आयुर्वेद कॉलेजों ने  मनमाने ढंग से फ़ीस बढ़ा दी तो हाईकोर्ट की कड़ाई के बाद ही सरकार हरकत में आई. इसकी वजह से देश भर से पढ़ने के लिए उत्तराखंड आने वालों में भी संशय पैदा हुआ. अब पौड़ी गढ़वाल से भी एक निजी विश्वविद्यालय को लेकर भी सोशल मीडिया पर ख़बरें वायरल हैं कि यह नियमों को ताक पर रखकर चल रहा है.

इंफ़्रास्ट्रक्चर, फ़ैकल्टी पर सवाल

पौड़ी के सूदूर पोखड़ा ब्लॉक में स्थित हिमालयन गढ़वाल विश्वविद्याय गजों पर आधा दर्जन से ज्यादा डिग्री कोर्स कराए जा रहे हैं. आरोप है कि विश्वविद्यालय के पास इन्हें संचालित करने के लिए पूरे क्लासरूम और इंफ्रास्ट्रक्चर तक नहीं है. यूजीसी के मानकों के अनुरूप न तो फ़ैकल्टी रखी गई है और न ही समय पर वेतन का भुगतान किया जाता है.



लेकिन बताया जा रहा है कि समस्या इससे बड़ी है. विश्वविद्यालय के कुछ स्टडी सेंटर्स की हालत तो बड़ा प्रश्नचिन्ह लग रहा है. पौड़ी गढ़वाल के थलीसैंण में कुछ कंप्यूटर रखकर बीसीए की पढ़ाई के नाम पर एक स्टडी सेंटर संचालित किया जा रहा है. यहां से विश्वविद्यालय की डिग्री दी जा रही है.



यह भी कहा जा रहा है कि आरोप लगे हैं कि विश्वविद्यालय को डिस्टैंस एजुकेशन के मोड पर चलाया जा रहा है. चूंकि इसका कैंपस सुदूर पोखड़ा ब्लॉक में स्थित है इसलिए यहां छात्र भौतिक रूप से उपस्थित नहीं होते. छात्रों से फीस पूरी वसूली जाती है और शिक्षा देने के नाम पर उनकी फर्जी उपस्थिति रिकॉर्ड में दिखा दी जाती.

चांसलर की सफ़ाई

इन तमाम आरोपों को लेकर न्यूज़ 18 ने विश्वविद्यालय के चांसलर एसके गुप्ता से फोन पर बात की. उन्होंने इन सभी आरोपों को ग़लत बताया और कहा कि विश्वविद्यालय को यूजीसी के नियमों के अनुरूप चलाया जा रहा है और जो आरोप लगे हैं वह ग़लत हैं.

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का अच्छा खासा कैंपस है, जिसमें छात्र पढ़ाई करते हैं.

ज़मीनी हकीकत

लेकिन न्यूज़ 18 को कोटद्वार में ही विश्वविद्यालय से पास आउट हुआ एक छात्र मिला, नाम न छापने की शर्त पर उसने बताया कि तीन साल के अध्ययनकाल में उसे कभी विश्वविद्यालय के पोखड़ा में स्थित मूल परिसर में नहीं जाना पड़ा. एडमिशन के लिए विश्वविद्यालय ने कोटद्वार में ही एक कैंप लगाया था और  यहीं एडमिशन से लेकर फीस जमा करने तक की सारी फॉर्मेलिटीज पूरी की.

कमाल की बात यह है कि डिग्री लेने के लिए भी उसे पोखड़ा नहीं जाना पड़ा और वह उसे घर बैठे मिल गई. फ़िलहाल यह युवक कोटद्वार में अपना व्यवसाय कर रहा है.

न्यूज़ 18 ने उच्च शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धन सिंह रावत से भी इस संबंध में बात करने की कोशिश की लेकिन गैरसैंण में चल रहे बजट सत्र में व्यस्त होने की वजह से उनसे बात नहीं हो पाई. जब भी हमें उनका पक्ष प्राप्त होगा, हम उसे छापेंगे.

 

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First published: March 6, 2020, 5:29 PM IST
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