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श्रीनगर जल विद्युत परियोजना की नहर में रिसाव से कई गांवों पर मंडरा रहा ख़तरा... जीवीके बेपरवाह

Sudhir Bhatt | News18 Uttarakhand
Updated: November 18, 2019, 6:30 PM IST
श्रीनगर जल विद्युत परियोजना की नहर में रिसाव से कई गांवों पर मंडरा रहा ख़तरा... जीवीके बेपरवाह
श्रीनगर जल विद्युत परियोजना के बांध से पावरहाउस तक पानी पहुंचाने वाली नहर में कई जगह पर लीकेज हो रही है जो ग्रामीणों की जान आफ़त में डाल सकती है.

गढ़वाल विश्वविद्यालय (Garhwal University) के भूविज्ञान विभागाध्यक्ष प्रोफ़ेसर यशपाल सुन्दरियाल (Geology HOD Professor Yashpal Sundriyal) साफ़ शब्दों में कहते हैं कि नहर का डिज़ाइन और गुणवत्ता बहुत ख़राब है.

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श्रीनगर. अलकनंदा (Alaknanda) में बनी 330 मेगावाट क्षमता की जलविद्युत परियोजना (Hydro power project) कभी भी किसी बड़ी जनहानि का सबब बन सकती है. बांध (Dam) से पावरहाउस (Power House) तक पानी पहुंचाने वाली नहर में कई जगह पर लीकेज (Leakage in Canal) हो रही है जो ग्रामीणों की जान आफ़त में डाल सकती है. इस आशंका की तस्दीक भूवैज्ञानिक भी कर रहे हैं और मुख्यमंत्री के निर्देश पर बनी एक समिति ने इस मामले की जांच भी की है लेकिन इस परियोजना को संचालित कर रही कंपनी जीवीके को इसकी कतई भी परवाह नहीं है.

दहशत में ग्रामीण 

330 मेगावाट विद्युत क्षमता की श्रीनगर जलविद्युत परियोजना की शक्ति नहर में फिर शुरु हुए रिसाव ने ग्रामीणों की नींद उड़ा दी है. पिछले साल किसी तरह नहर में टल्ले लगाकर किए गए ट्रीटमेंट के फेल होने के बाद अब नहर के लीकेज से रास्तों में चौड़ी दरारें पड़ गई हैं.

भूकटाव की वजह से मंगसू, गुगली और सुरासू गांवों पर खतरा पैदा हो गया है. स्थानीय ग्रामीण अब यहां से विस्थापन की मांग कर रहे हैं क्योंकि उन्हें लगातार यह डर सताता रहता है कि नहर की लीकेज से कभी भी उनकी जान पर बन सकती है.

ख़राब डिज़ाइन, ख़राब गुणवत्ता 

नहर निर्माण के वक्त से ही नहर के डिज़ाइन, निर्माणशैली और गुणवत्ता पर भी सवाल उठते रहे हैं. वाडिया इंस्टीट्यूट और गढ़वाल विश्वविद्यालय के भूवैज्ञानिकों की जांच में भी इस बात की पुष्टि हुई है. गढ़वाल विश्वविद्यालय के भूविज्ञान विभागाध्यक्ष प्रोफ़ेसर यशपाल सुन्दरियाल साफ़ शब्दों में कहते हैं कि नहर का डिज़ाइन और गुणवत्ता बहुत ख़राब है और अब इसकी वजह से ख़तरा बहुत बढ़ गया है.

leakage in srinagar canal, नहर निर्माण के वक्त से ही नहर के डिज़ाइन, निर्माणशैली और गुणवत्ता पर भी सवाल उठते रहे हैं.
नहर निर्माण के वक्त से ही नहर के डिज़ाइन, निर्माणशैली और गुणवत्ता पर भी सवाल उठते रहे हैं.

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मुख्यमंत्री के निर्देश पर पिछले वर्ष एक उच्चस्तरीय चार सदस्यीय कमेटी ने इस मामले की जांच भी की थी लेकिन इसकी रिपोर्ट में क्या है यह पता नहीं चल सका है. कीर्तिनगर के तहसीलदार हरिहर उनियाल कहते हैं कि जांच रिपोर्ट मुख्यमंत्री के पास है और इसलिए वह इस मामले में कुछ नहीं कह सकते.

जीवीके को परवाह नहीं 

हैरत की बात यह है कि पिछले 3 सालों से लगातार कभी लीकेज तो कभी नहर को पूरा भरकर ओवरफ्लो किया जा रहा है. इससे जनता की जान को जोखिम में डाला जा रहा है लेकिन परियोजना का संचालन करने वाली संस्था जीवीके को न तो शासन-प्रशासन के निर्देशों की परवाह है और न ही किसी जनांदोलन, न भूवैज्ञानिकों की चेतावनी की.

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First published: November 18, 2019, 6:28 PM IST
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