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मां धारीदेवी : इस शक्तिपीठ में भक्तों को मां काली के अलग-अलग रूपों के दर्शन होते हैं

Sudhir Bhatt | News18 Uttarakhand
Updated: October 5, 2019, 1:21 PM IST
मां धारीदेवी : इस शक्तिपीठ में भक्तों को मां काली के अलग-अलग रूपों के दर्शन होते हैं
इस शक्तिपीठ में मां आद्यशक्ति के मुख के दर्शन होते हैं.

धारीदेवी शक्तिपीठ में विभिन्न प्रहरों के दौरान भक्तों को मां काली के अलग-अलग रूपों के दर्शन होते हैं. प्रात: जहां मां के बाल्यावस्था के दर्शन होते हैं वहीं दिन में युवावस्था एवं सायं वृद्धावस्था रूप के दर्शन होते हैं.

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पौड़ी गढ़वाल. चार धाम, 52 गढ़ और 108 शक्तिपीठों की देवभूमि उत्तराखंड पौराणिक काल से ही धर्म, संस्कृति और अध्यात्म का केन्द्र रहा है. यहां मौजूद विभिन्न शक्तिपीठ (Shaktipeeth) हमेशा से श्रद्धालुओं की आस्था एवं विश्वास के प्रतीक रहे हैं. इन्हीं में से एक है पौड़ी (Pauri) और रुद्रप्रयाग (Rudraprayag) जनपद की सीमाओं पर स्थित मां धारीदेवी शक्तिपीठ (Maa Dharidevi Shaktipeeth) जहां दर्शनों को पहुंचने वाली भक्तों की भीड़ मां के प्रति उनकी अगाध श्रद्धा का परिचायक है.

अलकनन्दा नदी (Alaknanda River) के अविरल शांत प्रवाह के मध्य में मां धारीदेवी शक्तिपीठ मंदिर स्थित है. श्रीनगर गढ़वाल (Srinagar Garhwal) से 15 किलोमीटर दूर बद्रीनाथ हाईवे पर स्थित इस शक्तिपीठ में मां आद्यशक्ति के मुख के दर्शन होते हैं. महाकाली के रूप में विराजमान मां धारी का ये चमत्कार ही माना जाता है कि 1894 की विनाशकारी बाढ़ में भी मां धारी की प्रतिमा को कोई नुकसान नहीं हुआ. दूसरी तरफ माना जाता है कि सैकड़ों लोगों की जान लेने वाली वर्ष 2013 की केदारनाथ आपदा मां धारी की प्रतिमा को मूल स्थल से जबरन हटाने का परिणाम थी.

अलकनन्दा नदी के अविरल शांत प्रवाह के मध्य में मां धारीदेवी शक्तिपीठ मंदिर स्थित है.


मां काली के अलग-अलग रूपों के दर्शन होते हैं

धारीदेवी शक्तिपीठ में विभिन्न प्रहरों के दौरान भक्तों को मां काली के अलग-अलग रूपों के दर्शन होते हैं. प्रात: जहां मां के बाल्यावस्था के दर्शन होते हैं वहीं दिन में युवावस्था व सायं वृद्धावस्था रूप के दर्शन होते हैं. देवी के विभिन्न रूपों के दर्शन कर भक्तों के आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहता.

जलविद्युत परियोजना निर्माण से शक्तिपीठ का मूल स्थल परियोजना की झील में समाने के कारण इसे अपलिफ्ट कर मूल स्थान से ऊपर उठा दिया गया है. बावजूद इसके भक्तों की मां धारी पर अगाध श्रद्धा और विश्वास है. मां धारीदेवी के शरण में पहुंचने के बाद दुख दर्द के समाप्त होने का अहसास ही मां के भक्तों को यहां बार-बार आने को प्रेरित करता है. विशेषतौर पर नवरात्र के दौरान मां धारीदेवी के दर्शन का अलग ही महात्म्य माना जाता है.

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First published: October 5, 2019, 1:21 PM IST
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