ईमानदारी और कर्मठता के लिए जाने जाते हैं 5 बार सांसद और 2 बार CM रहे बीसी खंडूड़ी

हकीकत है कि भुवन 85 साल के मेजर जनरल (रिटायर्ड) का स्वास्थ अब उन्हें राजनीति में सक्रिय रहने की अनुमति नहीं दे रहा है.

News18 Uttarakhand
Updated: March 15, 2019, 1:52 PM IST
ईमानदारी और कर्मठता के लिए जाने जाते हैं 5 बार सांसद और 2 बार CM रहे बीसी खंडूड़ी
पौड़ी सांसद मेजर जनरल (रिटायर्ड) भुवन चंद्र खंडूूड़ी (फ़ाइल)
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Updated: March 15, 2019, 1:52 PM IST
बेटे मनीष खंडूड़ी के कांग्रेस में शामिल होने की चर्चाओं के बीच मेजर जनरल (रिटायर्ड) भुवन चंद्र खंडूड़ी एक बार फिर चर्चाओं में हैं. दरअसल उत्तराखंड ही नहीं देश भर में खंडूड़ी की पहचान एक बेहद ईमानदार और कर्मठ कार्यकर्ता के रूप में है. 1991 में पौड़ी गढ़वाल से सांसद बनने के बाद तो यहां से खंडूड़ी को हराना लगभग नामुमकिन माना जाता रहा. हालांकि पांच बार के सांसद और दो बार राज्य के  मुख्यमंत्री रहे खंडूड़ी अपने पांचवें कार्यकाल में स्वास्थ्य कारणों से सक्रिय नहीं रह पाए लेकिन बीजेपी नेतृत्व उनका टिकट काटने की बात भी नहीं कर रहा है और उनकी सहमति से ही टिकट दिए जाने की बात कह रहा है. एक नज़र इस पर कि पौड़ी में खंडूड़ी होने का मतलब क्या है....

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भुवनचंद्र खंडूड़ी का जन्म 1934 में देहरादून में हुआ था. स्कूली पढ़ाई गढ़वाल से करने के बाद उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय, सैन्य अभियांत्रिकी महाविद्यालय (सीएमई) पुणे, इन्स्टीटूयूट ऑफ इंजीनियर्स, नई दिल्ली और रक्षा प्रबंध संस्थान सिकन्दराबाद से भी शिक्षा हासिल की. पढ़ाई के बाद 1974 में खंडूड़ी भारतीय सेना की कोर ऑफ इन्जीनियर्स में शामिल हो गए और 1990 में रिटायर हो गए. भारतीय सेना में विशिष्ट सेवा के लिए उन्हें 1982 में राष्ट्रपति ने अति विशिष्ट सेवा मेडल प्रदान किया था.



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मेजर जनरल (रिटायर्ड) भुवन चंद्र खंडूड़ी (फ़ाइल फ़ोटो)


 

सेना से रिटायरमेंट लेने के बाद खंडूड़ी राजनीति में आए और पहली बार 1991 में पौड़ी गढ़वाल क्षेत्र से लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए. वह 10वीं, 12वीं, 13वीं, 14वीं और 16वीं लोकसभा के लिए पौड़ी से चुनाव जीते. 2007 से 2009 तक वह उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बने लेकिन रमेश पोखरियाल निशंक ने उन्हें अपदस्थ कर दिया. चुनाव से 6 महीने पहले 2011 में एक बार फिर खंडूड़ी को राज्य का मुख्यमंत्री बनाया गया. इसके बाद हुए मार्च 2012 में हुए चुनाव में वह कोटद्वार से विधानसभा का चुनाव हार गए. इसके लिए पार्टी में भितरघात को ज़िम्मेदार माना गया था. खंडूड़ी के चुनाव हारने की वजह से बीजेपी सरकार नहीं बना पाई थी.
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बहरहाल 2014 के लोकसभा चुनावों में जीत हासिल कर मेजर जनरल (रिटायर्ड) भुवन चंद्र खंडूड़ी पांचवीं बार सांसद बने थे. सवा तेरह लाख मतदाताओं और 14 विधानसभाओं वाली पौड़ी गढ़वाल लोकसभा सीट से उन्होंने 1,84,526 वोटों से जीत हासिल की थी. लेकिन इस बार शारीरिक अस्वस्थता के चलते लगभग ढाई साल से संसदीय क्षेत्र में सक्रिय नहीं रह पाए और पहली बार स्थानीय निवासी अपने सांसद से शिकायत करते दिखे. रुद्रप्रयाग के निवासियों ने तो यहां तक मांग कर दी कि बेहतर हो कि इस बार किसी स्वस्थ व्यक्ति को टिकट दिया जाए.

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मेजर जनरल (रिटायर्ड) भुवन चंद्र खंडूड़ी (फ़ाइल फ़ोटो)


पौड़ी के ही यमकेश्वर से विधायक उनकी बेटी ऋतु खंडूड़ी भी मानती हैं कि स्वास्थ्य कारणों से अपने संसदीय क्षेत्र में कुछ कम सक्रिय रह पाए. हालांकि वह कहती हैं कि संसद में उनकी उपस्थिति लगातार बनी रही और वह लोगों की आवाज़ उठाते रहे.

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लेकिन यह हकीकत है कि भुवन 85 साल के मेजर जनरल (रिटायर्ड) का स्वास्थ अब उन्हें राजनीति में सक्रिय रहने की अनुमति नहीं दे रहा है. बेटे के कांग्रेस में शामिल होने की चर्चाओं के बीच बीजेपी से 5 बार सांसद और 2 बार मुख्यमंत्री रहे खंडूड़ी के लिए चुनौती यह भी है कि लोग उन्हें कैसे याद रखते हैं.

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