बढ़ती गर्मी से सूखने लगे हैं उत्तराखंड के प्राकृतिक जल स्रोत

मौसम में लगातार हो रहे बदलाव और अनियोजित विकास के चलते पहाड़ों से प्राकृतिक जल स्रोतो पर खतरा मंडराने लगा है.

ETV UP/Uttarakhand
Updated: March 14, 2018, 5:26 PM IST
बढ़ती गर्मी से सूखने लगे हैं उत्तराखंड के प्राकृतिक जल स्रोत
बढ़ती गर्मी के कारण सूख रहे हैं प्राकृतिक जल स्रोत.
ETV UP/Uttarakhand
Updated: March 14, 2018, 5:26 PM IST
उत्तराखंड में गर्मियों की दस्तक के साथ ही पहाड़ों पर इसका असर भी दिखना शुरू हो चुका है. कोटद्वार और उसके आसपास के पहाड़ों में आधा दर्जन से ज्यादा प्राकृतिक जल स्रोत सूख चुके हैं, जबकि कई सारे स्रोतों में पानी बेहद कम हो चुका है. मौसम में लगातार हो रहे बदलाव और अनियोजित विकास के चलते पहाड़ों से प्राकृतिक जल स्रोतो पर खतरा मंडराने लगा है.

कोटद्वार से 15 किलोमीटर दूरी पर बसे दुगड्डा क्षेत्र के नजदीक बना चूनाधार स्रोत की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. जिस चूनाधार स्रोत से कभी हजारों परिवारों को पीने का पानी मिला करता था, वो आज सूखने की कगार पर आ पहुंचा है.

हर साल इस स्रोत का पानी कम होता जा रहा है, जो बेहद चिंता का सबब बना हुआ है. इसके साथ ही चूना पर्वत से और भी कई पानी की धाराएं निकला करती थी, जो आज विलुप्त हो चुकी हैं. चूना धार स्थानीय लोगों के साथ ही यात्रियों के लिए ठंडे और ताजा पानी पीने का मुख्य स्रोत है. आज भी यहां से गुजरने वाले यात्री इसी प्राकृतिक स्रोत में पानी पीकर अपनी प्यास बुझाते है.

बीते एक दशक में पौड़ी गढ़वाल के प्राकृतिक जल स्रोतों के सूखने के चलते पेयजल संकट की जो तस्वीर उभर कर सामने आई है. उससे चिंता और भी बढ़ जाती है. दुगड्डा नगर पालिका अध्यक्ष दीपक डोबाल कहते है कि प्राकृतिक जल स्रोतों को बचाने की जरूरत है, लेकिन दुग्गड़ा के पास जितने भी स्रोत हैं, वो रिजर्व फॉरेस्ट की भूमि पर हैं, इसलिए पालिका उनका रख रखाव नहीं कर सकती.

(रिपोर्टः अनुपम भारद्वाज)
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