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गढ़वाल के सबसे बड़े अस्पताल में 5 महीने से नवजातों की भर्ती बंद... डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे स्त्री रोग, सर्जरी विभाग भी

Sudhir Bhatt | News18 Uttarakhand
Updated: December 13, 2019, 1:05 PM IST
गढ़वाल के सबसे बड़े अस्पताल में 5 महीने से नवजातों की भर्ती बंद... डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे स्त्री रोग, सर्जरी विभाग भी
निकू वॉर्ड में गंभीर हालत में नवजात बच्चों को भर्ती कराया जाता है और उनकी 24 घंटे निगरानी की ज़रूरत पड़ती है. डॉक्टर न होने की वजह से यहां इनक्यूबेटर खाली पड़े हैं.

एमएस प्रोफ़ेसर केपी सिंह कहते हैं कि बाल रोग विभाग, स्त्री रोग विभाग और सर्जरी में डॉक्टरों की कमी है. इस बारे में शासन को बताया जा चुका है.

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श्रीनगर. उत्तराखंड (Utatrakhand) के पहाड़ी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं (health services in hilly areas) उपलब्ध करवाना राज्य सरकार की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक रही है और इस चुनौती के आगे 19 साल से राज्य सरकारें नाकाम ही नज़र आई हैं.  गढ़वाल (garhwal) के पर्वतीय क्षेत्रों के सबसे बड़े अस्पताल श्रीनगर स्थित राजकीय बेस चिकित्सालय (srinagar base hospital) की हालत ऐसी है कि यहां गंभीर स्थिति में लाए जाने वाले ज़्यादातर मरीज़ों को इलाज ही नहीं मिल पाता. बाल रोग विभाग (pediatrics department) में डॉक्टर न होने से बच्चों की भर्ती बंद कर दी गई है वहीं सर्जरी विभाग (surgery department) में एक, तो स्त्री रोग विभाग (gynecology) भी 2 ही डॉक्टरों के भरोसे चल रहे हैं. एमएस डॉक्टरों की कमी स्वीकार करते हैं और अपनी मजबूरी जताते हैं.

डॉक्टर नहीं, मरीज़ परेशान 

गढ़वाल के पहाड़ी क्षेत्रों के सबसे बड़े राजकीय बेस अस्पताल में बाल रोग विभाग का निकू वार्ड 5 महीने से बंद है क्योंकि डॉक्टर ही नहीं हैं. इस वॉर्ड में गंभीर हालत में नवजात बच्चों को भर्ती कराया जाता है और उनकी 24 घंटे निगरानी की ज़रूरत पड़ती है. डॉक्टर न होने की वजह से यहां इनक्यूबेटर खाली पड़े हैं.

इस सरकारी अस्पताल में आने वाले गरीब वर्ग से जुड़े लोगों का कहना है कि उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया गया है. बच्चों की जान आफ़त में है. सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए.

ऐसा नहीं है कि केवल बालरोग विभाग की ही यह स्थिति है. बेहद महत्वपूर्ण सर्जरी विभाग में एक डॉक्टर, तो स्त्री रोग विभाग मात्र दो डॉक्टर ही ऑपरेशन कर रहे हैं. यह हाल तब है जब इन दोनों विभागों में रोज़ पहुंचने वाली बड़ी संख्या में मरीज़ों को ऑपरेशन की ज़रूरत पड़ती है.

बेबस अस्पताल प्रबंधन 

इस मामले पर अस्पताल प्रशासन अपनी बेबसी जाहिर कर रहा है. श्रीनगर बेस अस्पताल के एमएस प्रोफ़ेसर केपी सिंह कहते हैं कि बाल रोग विभाग, स्त्री रोग विभाग और सर्जरी में डॉक्टरों की कमी है. इस बारे में शासन को बताया जा चुका है.गढ़वाल के पर्वतीय क्षेत्रों के सबसे बड़े अस्पताल का ही यह हाल है तो समझा जा सकता है कि छोटे अस्पतालों का क्या हाल होगा. साफ है कि मरीजों को अपनी जान बचाने की जद्दोजहद खुद ही करनी होगी और ऐसे में खस्ताहाल सड़कों पर घंटों का सफर तय कर मैदानी क्षेत्रों तक पहुंचने में अपनी जान भी गंवानी होगी.

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First published: December 13, 2019, 1:02 PM IST
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