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NIT प्रबंधन में ‘गड़बड़’ लोगों के निलंबन की तैयारी, छात्रों को भी किया जा सकता है शिफ़्ट

देश के कुल 31 एनआईटी में से एक और राज्य के एकमात्र एनआईटी श्रीनगर के छात्र इसे शहर से बाहर शिफ्ट करवाने पर आमादा हैं.

देश के कुल 31 एनआईटी में से एक और राज्य के एकमात्र एनआईटी श्रीनगर के छात्र इसे शहर से बाहर शिफ्ट करवाने पर आमादा हैं.

धन सिंह रावत ने कहा कि जावड़ेकर से यह भी बात हुई है कि ऐसे कुछ छात्र जिन्हें यहां बहुत ज़्यादा दिक्कत है उन्हें उनके राज्यों में स्थानांतरित कर दिया जाए.

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श्रीनगर गढ़वाल स्थित राज्य के एकमात्र एनआईटी को शिफ्ट किए जाने के मामले पर 56 दिन से कक्षाओं का बहिष्कार कर दिल्ली के जंतर-मंतर में आंदोलन कर रहे छात्रों पर राज्य सरकार अब और सख्त हो गई है. छात्रों के लम्बे आंदोलन पर एनआईटी के अंदर से ही साजिश की बात कहती रही राज्य सरकार के अनुरोध पर किसी भी वक्त एनआईटी प्रबंधन में जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों पर एमएचआरडी निलम्बन या फिर तबादले की कारवाई कर सकती है. इतना ही नहीं आंदोलन के लिए जिम्मेदार कुछ छात्रों को किसी दूसरे एनआईटी में भी भेजा जा सकता है.

देश के कुल 31 एनआईटी में से एक और राज्य के एकमात्र एनआईटी श्रीनगर के छात्र इसे शहर से बाहर शिफ्ट करवाने पर आमादा हैं. राज्य सरकार साफ़ कर चुकी है कि एनआईटी को श्रीनगर से बाहर नहीं जाने दिया जाएगा. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार 4 अक्टूबर से कक्षाओं का बहिष्कार कर रहे छात्रों के साथ ही मामले को ठीक से हैंडल कर पाने में नाकाम एनआईटी प्रबंधन के खिलाफ राज्य सरकार के आग्रह पर एमएचआरडी किसी भी वक्त सख्त ऐक्शन ले सकता है.

उच्च शिक्षामंत्री और श्रीनगर विधायक धन सिंह रावत ने इसके संकेत दिए. न्यूज़ 18 के सवाल पर धन सिंह रावत ने कहा कि एनआईटी प्रबंधन में ऐसे लोगों का तबादला या निलंबन किया जा सकता है जो ‘गड़बड़ हैं’. उन्होंने कहा कि इस संबंध में उनकी और मुख्यमंत्री की भी केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर से बात हो गई है.

रावत ने यह भी कहा कि जावड़ेकर से यह भी बात हुई है कि ऐसे कुछ छात्र जिन्हें यहां बहुत ज़्यादा दिक्कत है उन्हें उनके राज्यों में स्थानांतरित कर दिया जाए. इसके साथ ही राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री ने फिर दोहराया कि एनआईटी को श्रीनगर से स्थानांतरित नहीं होने दिया जाएगा.

बता दें कि श्रीनगर के पॉलिटेक्निक भवनों में अस्थाई तौर पर संचालित किए जा रहे एनआईटी को पहले 500 एकड़ भूमि पर बनाया जाना था लेकिन ज़मीन की कमी के चलते इसे 300 एकड़ में सीमित कर दिया गया है लेकिन एक साथ पूरी भूमि की व्यवस्था आज तक नहीं हो सकी.

खास बात यह है कि 980 छात्र-छात्राओं वाले एनआईटी के लिए सुमाड़ी में प्रस्तावित ज़मीन पर पहले तो भूगर्भीय जांच रिपोर्ट में निर्माण की सहमति दे दी गई और असहमति जताई गई. राज्य सरकार ने इसे भी साज़िश मानकर जांच शुरू करवा दी है.

बहरहाल यह तो साफ़ है कि राज्य और केन्द्र सरकार के भूमि चयन और एनआईटी के स्थायी परिसर निर्माण में लापरवाही की वजह से छात्रों को आंदोलन का आधार मिल गया लेकिन सुविधाओं और संसाधनों की मांग की जगह कैम्पस शिफ्टिंग की दलील किसी के गले नहीं उतर रही.

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