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NIT को श्रीनगर से शिफ़्ट करने की तैयारी, ऋषिकेश में ज़मीन की तलाश, कुरुक्षेत्र भी लाइन में

NIT को श्रीनगर से शिफ़्ट करने की तैयारी, ऋषिकेश में ज़मीन की तलाश, कुरुक्षेत्र भी लाइन में

एनआईटी श्रीनगर (फ़ाइल फ़ोटो)

एनआईटी श्रीनगर (फ़ाइल फ़ोटो)

यह भी कहा जा रहा है कि किराया ज्यादा होने पर एनआईटी उत्तराखंड को एनआईटी कुरुक्षेत्र में भी शिफ्ट किया जा सकता है.

श्रीनगर गढ़वाल में मौजूद राज्य के एकमात्र एनआईटी पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं. एनआईटी को मैदानी क्षेत्र में शिफ्ट करने संबंधी आशंका पर दिखाई गई न्यूज़ ख़बर की पुष्टि हुई है. एनआईटी प्रबंधन ने ऋषिकेश में कुछ स्थानों को एनआईटी के लिए चिन्हित कर लिया है और किसी भी वक्त एनआईटी का अस्थायी कैम्पस श्रीनगर से ऋषिकेश या कुरुक्षेत्र शिफ्ट हो सकता है.

साल 2008 में जब तत्कालीन सीएम रमेश पोखरियाल निशंक ने पौड़ी में एनआईटी को श्रीनगर में स्थापित करने की घोषणा की थी तो उत्तराखंड में इस पर हैरत के साथ खुशी हुई थी लेकिन 10 साल बाद स्थाई कैम्पस निर्माण तो दूर उसके लिए आज तक ज़मीन ही फाइनल नहीं हो पाई है.

अब एनआईटी को मैदानी क्षेत्र में शिफ्ट करने की कवायद शुरू हो गई है. एनआईटी प्रबंधन ने ऋषिकेश में कुछ स्थानों को एनआईटी के अस्थाई कैम्पस को शिफ्ट करने के लिए चिन्हित भी कर लिया है जिसकी पुष्टि खुद एनआईटी प्रबंधन ने की है. एनआईटी के सहायक कुलसचिव जगदीप सिंह ने न्यूज़ 18 को बताया कि एनआईटी कैंपस के लिए जगह ढूंढ रही समिति ने ऋषिकेश में कुछ स्थानों पर जगह देखी हैं. इसके पीछे तर्क यह है कि कक्षाओं का बहिष्कार कर रहे छात्र-छात्राओं को वापस एनआईटी में लाया जा सके.

दरअसल बदरीनाथ हाइवे पर दुर्घटना में घायल अपनी छात्रा साथी के निशुल्क इलाज के बाद टैम्परेरी कैम्पस शिफ्टिंग और सुविधाओं की मांग को लेकर 19 दिनों के आंदोलन के बाद कैंपस छोड़ चुके छात्र-छात्राएं 19वें दिन भी एनआईटी नहीं पहुंचे हैं. छात्रों के आंदोलन के आगे आखिरकार घुटने टेकते हुए एनआईटी प्रबंधन ने कैम्पस शिफ्टिंग की उनकी मांग पर लगभग फैसला कर लिया है और ऋषिकेश में एनआईटी की चयन कमेटी ने चिन्हित किए गए स्थानों पर किराए को लेकर मोलभाव भी शुरू कर दिया है.

यह भी कहा जा रहा है कि किराया ज्यादा होने पर एनआईटी उत्तराखंड को एनआईटी कुरुक्षेत्र में भी शिफ्ट किया जा सकता है. हालांकि पिछले महीने 25 अक्टूबर को श्रीनगर दौरे के दौरान मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने दावा किया था कि एनआईटी को किसी भी सूरत में श्रीनगर से शिफ्ट नहीं किया जाएगा.

दिलचस्प बात यह है कि एनआईटी को स्थायी तौर पर सुमाड़ी में बनाने और अस्थायी कैम्पस को स्थाई किए जाने की घोषणा के बाद एनआईटी को मैदानी क्षेत्र में ले जाने की कई बार कोशिशें भी हुई हैं. एक साल पहले भी छात्र कैम्पस शिफ्टिंग को लेकर आंदोलन कर चुके थे लेकिन जनांदोलन और राज्य सरकार के हस्तक्षेप पर मामला ठंडा पड़ा था.

लेकिन एनआईटी को मैदान क्षेत्र में शिफ्ट करने के कोशिशें पूरी तरह बंद कभी नहीं पड़ीं और छात्रा की दुर्घटना के बाद एक बार फिर इसे तूल दे दिया गया है. इस बार यह प्रयास पूरे होते भी दिख रहे हैं जो यह पहाड़ी जनमानस के लिए बड़ा धक्का होगा.

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