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NIT को 10 साल बाद मिलेगा परमानेंट कैंपस, 19 अक्टूबर को पौड़ी के सुमाड़ी गांव में होगा शिलान्यास

Deepankar Bhatt | News18 Uttarakhand
Updated: October 14, 2019, 1:49 PM IST
NIT को 10 साल बाद मिलेगा परमानेंट कैंपस, 19 अक्टूबर को पौड़ी के सुमाड़ी गांव में होगा शिलान्यास
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी का स्थाई कैंपस अब उत्तराखंड में ही बनेगा.

19 अक्टूबर को केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक पौड़ी जिले के सुमाड़ी गांव में NIT के स्थाई कैंपस का शिलान्यास करेंगे. इस दौरान सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत और उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत भी मौजूद रहेंगे.

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देहरादून. एक पहाड़ी राज्य के लिए इससे बड़ी खुशखबरी और राहत की बात नहीं हो सकती कि एक राष्ट्रीय संस्थान अब किसी दूसरी जगह शिफ्ट नहीं होगा. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी (NIT) का स्थाई कैंपस अब उत्तराखंड में ही बनेगा. जी हां, साल 2009 में जिस NIT की शुरुआत श्रीनगर गढ़वाल में
हुई, 10 साल बाद उस NIT को अपना परमानेंट कैंपस मिलने की शुरुआत होगी. 19 अक्टूबर को केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक (Ramesh Pokhriyal Nishank) पौड़ी जिले के सुमाड़ी गांव में NIT के स्थाई कैंपस का शिलान्यास करेंगे. इस दौरान सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत (CM Trivendra Singh Rawat) और उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत भी मौजूद
रहेंगे.

केंद्रीय मंत्री निशंक की बड़ी कामयाबी

NIT की शुरुआत साल 2009 में उस वक्त हुई थी जब मौजूदा मानव संसाधन विकास मंत्री निशंक उत्तराखंड के मुख्यमंत्री थे. इसके बाद उत्तराखंड में 3 और मुख्यमंत्री बदले, जिनमें भुवन चंद्र खंडूरी, विजय बहुगुणा और हरीश रावत शामिल रहे. पर कोई भी सीएम NIT का परमानेंट कैंपस फाइनल नहीं कर पाया. 2017 में मौजूदा सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इसे टॉप एजेंडे पर रखा, लेकिन बात फाइनल तभी हो पाई जब मई 2019 में हरिद्वार से सांसद और पूर्व सीएम रमेश पोखरियाल निशंक ने केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री का पद संभाला. उन्होंने फाइनल फैसला कर दिया कि श्रीनगर से NIT कहीं शिफ्ट नहीं होगा और शिलान्यास सुमाड़ी गांव में ही होगा.

2009 में शुरुआत के कुछ साल बाद ही स्टूडेंट्स डिमांड करने लगे कि कैंपस को मैदानी इलाके में या फिर किसी दूसरे राज्य में शिफ्ट किया जाए.


सालों चला NIT कैंपस का विवाद
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पहाड़ में कोई भी संस्थान चलाना बड़ी चुनौती है. यही कारण रहा कि 2009 में शुरुआत के कुछ साल बाद ही स्टूडेंट्स डिमांड करने लगे कि कैंपस को मैदानी इलाके में या फिर किसी दूसरे राज्य में शिफ्ट किया जाए. साल 2018 आते-आते बात इतनी बिगड़ गई कि दीपावली की छुट्टी से पहले स्टूडेंट्स कैंपस नहीं होने की वजह से बिना बताए छुट्टी पर चले गए. स्टूडेंट्स ने ऐसा हंगामा किया कि श्रीनगर से सैटेलाइट कैंपस जयपुर शिफ्ट करना पड़ा. वहीं कैंपस की शिफ्टिंग रोकने के लिए श्रीनगर की जनता भी कई बार सड़क पर उतरी. अब परमानेंट कैंपस के शिलान्यास की खबर से लोगों ने राहत की सांस ली है.

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First published: October 14, 2019, 1:49 PM IST
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