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लैंसडौन में एशियन हाथियों की मौतों पर नहीं लग रही लगाम

लैंसडौन में एशियन हाथियों की मौतों पर नहीं लग रही लगाम

लैंसडौन वन प्रभाग की लापरवाही एशियन हाथियों की जान पर भारी पड़ रही है.पिछले तीन महीने में तीन हाथियों की मौत ने इस वन प्रभाग के अधिकारियों की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा दिए हैं.रविवार को भी लैंसडौन डिवीजन की लालढांग रेंज के मैली स्रोत के जंगलों में एक 18 साल के टस्कर हाथी की मौत ने इस डिवीजन के अधिकारियों की कार्यकुशलता पर सवाल खड़े कर दिए है.

लैंसडौन वन प्रभाग की लापरवाही एशियन हाथियों की जान पर भारी पड़ रही है.पिछले तीन महीने में तीन हाथियों की मौत ने इस वन प्रभाग के अधिकारियों की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा दिए हैं.रविवार को भी लैंसडौन डिवीजन की लालढांग रेंज के मैली स्रोत के जंगलों में एक 18 साल के टस्कर हाथी की मौत ने इस डिवीजन के अधिकारियों की कार्यकुशलता पर सवाल खड़े कर दिए है.

लैंसडौन वन प्रभाग की लापरवाही एशियन हाथियों की जान पर भारी पड़ रही है.पिछले तीन महीने में तीन हाथियों की मौत ने इस वन प्रभाग के अधिकारियों की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा दिए हैं.रविवार को भी लैंसडौन डिवीजन की लालढांग रेंज के मैली स्रोत के जंगलों में एक 18 साल के टस्कर हाथी की मौत ने इस डिवीजन के अधिकारियों की कार्यकुशलता पर सवाल खड़े कर दिए है.

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लैंसडौन वन प्रभाग की लापरवाही एशियन हाथियों की जान पर भारी पड़ रही है.पिछले तीन महीने में तीन हाथियों की मौत ने इस वन प्रभाग के अधिकारियों की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा दिए हैं.रविवार को भी लैंसडौन डिवीजन की लालढांग रेंज के मैली स्रोत के जंगलों में एक 18 साल के टस्कर हाथी की मौत ने इस डिवीजन के अधिकारियों की कार्यकुशलता पर सवाल खड़े कर दिए है.

दरअसल मैली स्रोत के जंगलों में दो टस्कर हाथियों की वर्चस्व की लड़ाई में एक हाथी की तो मौत हो गई, लेकिन दूसरे घायल टस्कर हाथी का जंगल में कोई सुराग नहीं मिल रहा.वहीं दूसरी ओर रविवार को मिले टस्कर हाथी के शव का पोस्टमॉर्टम करने के बाद वन विभाग ने उसके दांतों को कब्जे में लेते हुए उसके शव को जंगल में ही दफन कर दिया.

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