NCERT की किताबें पाठ्यक्रम में शामिल करने को तैयार नहीं पौड़ी के प्राइवेट स्कूल

स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबों को राज्य सरकार द्वारा पाठ्यक्रम में आवश्यक किए जाने के स्पष्ट आदेशों का पौड़ी जिले में पालन नहीं किया जा रहा है. खासतौर पर प्राइवेट स्कूल किसी भी सूरत में इन्हें मानने को तैयार नहीं हैं.

Sudhir Bhatt | News18 Uttarakhand
Updated: April 17, 2019, 4:20 PM IST
NCERT की किताबें पाठ्यक्रम में शामिल करने को तैयार नहीं पौड़ी के प्राइवेट स्कूल
स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबों को राज्य सरकार द्वारा पाठ्यक्रम में आवश्यक किए जाने के स्पष्ट आदेशों का पौड़ी जिले में पालन नहीं किया जा रहा है. खासतौर पर प्राइवेट स्कूल किसी भी सूरत में इन्हें मानने को तैयार नहीं हैं.
Sudhir Bhatt | News18 Uttarakhand
Updated: April 17, 2019, 4:20 PM IST
स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबों को राज्य सरकार द्वारा पाठ्यक्रम में आवश्यक किए जाने के स्पष्ट आदेशों का पौड़ी जिले में पालन नहीं किया जा रहा है. खासतौर पर प्राइवेट स्कूल किसी भी सूरत में इन्हें मानने को तैयार नहीं हैं. राज्य सरकार द्वारा भले ही प्रदेश के सभी स्कूलों में शिक्षा के स्तर में एकरूपता लाने के लिए पाठ्यक्रम में एनसीईआरटी की किताबों को आवश्यक रूप से शामिल करने के आदेश दिए गए हों, लेकिन इन आदेशों का असर निजी स्कूलों पर पड़ता नजर नहीं आ रहा है. स्थिति ये है कि निजी स्कूल सरकारी आदेशों का धड़ल्ले से उल्लंघन कर रहे हैं. अभिभावक इसका विरोध कर रहे हैं, लेकिन स्कूल प्रबंधन उनपर चुप रहने का दबाव डाल रहा है. इस कारण अभिभावक भी खुलकर इस विषय पर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं.

अभिभावकों को डर है कि अगर वे खुलकर सामने आए तो स्कूल प्रबंधन उनके बच्चों को परेशान करने लगेगा. इससे उनकी परेशानियां बढ़ जाएंगी. ऐसे में अभिभावक चुप रहना ही ज्यादा उचित मान रहे हैं.

दूसरी तरफ आरटीई कार्यकर्ता और अभिभावक कुशलनाथ का कहना है कि एनसीईआरटी की किताबों के मामले पर प्राइवेट स्कूल सरकार के आदेश को मानने को तैयार नहीं हैं. वो इसके पीछे कई कारण बताते हैं. उनका कहना है कि निजी स्कूल प्रबंधन एनसीईआरटी की किताबों को लेकर कई तरह की भ्रांतियां फैला रहे हैं. इनमें अच्छा कोर्स नहीं होने के साथ गुणवत्तापरक शिक्षण सामग्री का न होना है. इसके साथ ही उनका कहना है कि प्राइवेट स्कूल निजी प्रकाशकों की पुस्तकों को बेचकर मोटा मुनाफा कमा रहे हैं. साफ है कि एनसीईआरटी की किताबों को उपलब्ध कराने पर उनके मुनाफे का खेल बंद हो जाएगा.

दूसरी तरफ राजकीय शिक्षक संघ ने राज्य सरकार से इस मामले पर निजी स्कूलों पर जुर्माना समेत सख्त कार्रवाई की वकालत की है. राजकीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संगठन के प्रांतीय संगठन मंत्री मुकेश काला का कहना है कि पिछले शैक्षणिक सत्र में राज्य सरकार ने सभी स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबों को कोर्स में लागू करने का जो आदेश दिया था, वो सराहनीय था. लेकिन प्राइवेट स्कूलों द्वारा इसका पालन न करना दुर्भाग्यपूर्ण है.

उनका कहना है कि फीस, अनुशासन और पाठ्यक्रम को लेकर प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर सख्ती जरूरी है. शिक्षा के स्तर पर समानता इसलिए भी जरूरी है ताकि बच्चों के अंदर हीन भावना न पैदा हो. उन्होंने सरकार से मांग करते हुए कहा कि ऐसे प्राइवेट स्कूल जो शासनादेश नहीं मान रहे हैं, उनपर सख्त जुमार्ने का प्रावधान करने के साथ अन्य कार्रवाई की जाए.

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