Home /News /uttarakhand /

सर पे बस्ता, सांसत में जान...ऐसे में कैसे सफल हो सर्वशिक्षा अभियान

सर पे बस्ता, सांसत में जान...ऐसे में कैसे सफल हो सर्वशिक्षा अभियान

उफनती नदी को पार कर के स्कूल जाने की कहानी को अब तक हमने कहानियों या फिर देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के संदर्भ में ही सुना था. लेकिन यह विडंबना के साथ एक सच्चाई भी है, उत्तराखंड के स्कूली बच्चों की. जिन्हें आज भी उफनती नदी को पार कर ही स्कूल की शिक्षा मिल पाती है.

उफनती नदी को पार कर के स्कूल जाने की कहानी को अब तक हमने कहानियों या फिर देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के संदर्भ में ही सुना था. लेकिन यह विडंबना के साथ एक सच्चाई भी है, उत्तराखंड के स्कूली बच्चों की. जिन्हें आज भी उफनती नदी को पार कर ही स्कूल की शिक्षा मिल पाती है.

उफनती नदी को पार कर के स्कूल जाने की कहानी को अब तक हमने कहानियों या फिर देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के संदर्भ में ही सुना था. लेकिन यह विडंबना के साथ एक सच्चाई भी है, उत्तराखंड के स्कूली बच्चों की. जिन्हें आज भी उफनती नदी को पार कर ही स्कूल की शिक्षा मिल पाती है.

अधिक पढ़ें ...
    उफनती नदी को पार कर के स्कूल जाने की कहानी को अब तक हमने कहानियों या फिर देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के संदर्भ में ही सुना था. लेकिन यह विडंबना के साथ एक सच्चाई भी है, उत्तराखंड के स्कूली बच्चों की. जिन्हें आज भी उफनती नदी को पार कर ही स्कूल की शिक्षा मिल पाती है.

    पौड़ी जिले के यमकेश्‍वर ब्लॉक में करीब एक दर्जन गांवों के बच्‍चों को आज भी सिर पर बैग रख जान जोखिम में डालकर शिक्षा ग्रहण करनी पड़ रही है. इलाके से गुजरने वाली खतरनाक हैवल नदी को लांघ कर ये बच्चे रोजना स्कूल चलें हम वाले स्लोगन को कठिनाई के बावजूद दर्शाते हैं.

    ऋषिकेश से महज तीस किलोमीटर दूर बैरागढ़ और घत्तुघाट से सटे दर्जनों गांवों के बच्चों को रोजाना इन दुर्गम रास्तों से गुजरना होता है. ये हालात सिर्फ बच्चों के साथ ही नहीं बल्कि उनके अभिभावकों के साथ भी लागू होते हैं. गामीणों को भी अपनी जान हथेली पर रख कर उफान मारती नदी को पार करना पड़ता है.

    अब बात उन शिक्षकों की भी होनी चाहिए, जिन्हें भी बच्चों के साथ नदी पार कर स्‍कूल आना पड़ता है,साथ में मिड डे मिल को भी सर पर साथ ले कर जाते हैं. हैवल नदी पर पुल बनाने के लिए स्थानीय लोगों ने कई बार जन प्रतिनिधियों से लेकर मुख्यमंत्री तक गुहार लगाई, लेकिन शायद सत्‍ताधीशों को यहां के बाशिंदों की आवाज सुनाई नहीं देती.

    विज्ञापन
    विज्ञापन

    राशिभविष्य

    मेष

    वृषभ

    मिथुन

    कर्क

    सिंह

    कन्या

    तुला

    वृश्चिक

    धनु

    मकर

    कुंभ

    मीन

    प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
    और भी पढ़ें
    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज

    अधिक पढ़ें

    अगली ख़बर