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श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में रैगिंग में सीनियर्स निलंबित... डरे हुए जूनियर्स का शिकायत से ही इनकार

Sudhir Bhatt | News18 Uttarakhand
Updated: December 16, 2019, 1:03 PM IST
श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में रैगिंग में सीनियर्स निलंबित... डरे हुए जूनियर्स का शिकायत से ही इनकार
भारी दबाव में कॉलेज प्रशासन को रैगिंग जैसी घटना नहीं होने का लिखित पत्र देने वाले जूनियर स्टूडेंटस ने रैगिंगे के मामले पर चुप्पी साध ली है.

यह मामला रैगिंग का है तो फिर उन्हें कॉलेज से निकालने या साल 2017 की तरह इस बार भी दोषियों को हल्के में क्यों छोड़ा गया.

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श्रीनगर. राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर गढ़वाल में रैगिंग की घटना के मामले ने उच्च शिक्षण संस्थाओं में रैगिंग से बचाव के पुख्ता कदमों के दावों की हकीकत खोलकर रख दी है. हैरत की बात तो यह है कि जिस तरह पूरे मामले को हल्के में लेते हुए पीड़ित स्टूडेंटस से ही उनकी शिकायत दबाव में वापस करवाने के बाद आरोपी सीनियर्स और जेआर डॉक्टर पर निलम्बन की कार्रवाई की गई उसने कॉलेज प्रशासन के इस तरह के मामलों से निपटने के तरीकों पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

गालियों का ऑडियो रिकॉर्ड

मेडिकल कॉलेज श्रीनगर में एमबीबीएस छात्रों के साथ रैगिंग की घटना में कड़े प्रावधानों और पुष्टि के बावजूद हल्के अंदाज में दो सीनियर्स छात्रों और एक जेआर डॉक्टर पर 15 दिन से 3 महीने तक की निलम्बन कार्रवाई कर कॉलेज प्रशासन ने पल्ला झाड़ लिया है. भारी दबाव में कॉलेज प्रशासन को रैगिंग जैसी घटना नहीं होने का लिखित पत्र देने वाले जूनियर स्टूडेंटस ने भी इस मामले पर चुप्पी साध ली है.

लेकिन न्यूज़ 18 के पास मौजूद एक्सक्लूसिव ऑडियो क्लिप से इस बात का पता चलता है कि सीनियर स्टूडेंट्स ने न सिर्फ़ जूनियर छात्रों से गाली-गलौच की बल्कि उन्हें बुरी तरह धमकाया और मारपीट की. ऑडियो में सीनियर्स की गालीगलौच और मारपीट को साफ सुना जा सकता है. सीनियर्स के दिए गए काम न करने पर जूनियर छात्रों को मुर्गा भी बनाया गया.

'मामला सुलझा लिया है'

रैगिंग के दौरान जब एक छात्र की तबियत बिगड़ गई और उसे उल्टियां होने लगीं तो आनन-फानन में उसे वहां से इलाज के लिए ले जाया गया. तस्वीरों में साफ़ है कि सभी स्टूडेंट्स के बाल तक काटे गए हैं जो एक ही समय में कटे हैं. स्थिति यह है कि डरे हुए छात्र रैगिंग होने से इनकार कर रहे हैं और कह रहे हैं कि उन्होंने मामला सुलझा लिया है.

मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य सीएमएस रावत कहते हैं कि इस मामले में 2013 के एक सीनियर छात्र की संलिप्तता सामने आ रही है. अब यह सुनिश्चित किया जाएगा कि फिर ऐसा न हो.रैगिंग है या नहीं?

इस मामले में दिलचस्प सवाल यह है कि जब मेडिकल कॉलेज प्रशासन और पीड़ित छात्र मामले को रैगिंग की घटना नहीं मान रहे हैं तो फिर एंटी रैगिंग कमेटी मामले को क्यों सुन रही थी. और अगर यह मामला रैगिंग का है तो फिर उन्हें कॉलेज से निकालने या साल 2017 की तरह इस बार भी दोषियों को हल्के में क्यों छोड़ा गया? उनके ख़िलाफ़ आपराधिक मुकदमा दर्ज करने के साथ अर्थदंड क्यों नहीं वसूला गया?

साफ़ है कि कड़ी कार्रवाई न होने से ही रैगिंग जैसी घटनाओं को न केवल बढ़ावा मिलता है बल्कि ऐसे तत्वों के भी हौसले बढ़ते हैं.

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First published: December 16, 2019, 1:01 PM IST
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