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गजब! आवारा पशुओं के पीछे भागेगा परिवहन विभाग, DM ने दिया ये आदेश...
Pauri-Garhwal News in Hindi

Sudhir Bhatt | News18 Uttarakhand
Updated: January 3, 2020, 6:27 PM IST
गजब! आवारा पशुओं के पीछे भागेगा परिवहन विभाग, DM ने दिया ये आदेश...
पौड़ी के ज़िलाधिकारी ने पशुओं से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए आवारा पशुओं पर रेडियम रिफ़्लेक्टर लगाने को कहा है.

परिवहन विभाग ने पशुपालन विभाग को पत्र भेजने की बात कहकर पशुओं को पकड़ने में मदद मांगी है लेकिन पशुपालन विभाग ने हाथ खड़े कर दिए हैं.

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पौड़ी गढ़वाल. आज तक आपने परिवहन विभाग को वाहनों का ही जिम्मा उठाते देखा होगा, लेकिन राज्य में शायद पहली बार विभाग अब पशुओं को भी काबू करेगा और पौड़ी जनपद से इसकी शुरुआत होगी. आप चौंके ज़रूर होंगे लेकिन यह सच है. पौड़ी के ज़िलाधिकारी ने पशुओं से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए आवारा पशुओं पर रेडियम रिफ़्लेक्टर लगाने को कहा है. इस आदेश से परिवहन विभाग विभाग के अधिकारियों की नींद उड़ गई है और उस पर पशुपालन विभाग ने भी किसी तरह की मदद करने से इनकार कर दिया है.

कैसे करेंगे? 

पौड़ी के जिलाधिकारी एसके बर्णवाल ने कहा है कि रात को आवारा पशुओं के सड़क पर मौजूद होने की वजह से दुर्घटना की आशंका बनी रहती है और पहाड़ी रास्तों में यह जानलेवा साबित हो सकती है. इसलिए परिवहन विभाग को कहा गया है कि इन पर रेडियम रिफ़्लेक्टर स्टिकर लगाए जाएं.



लेकिन परिवहन विभाग को समझ नहीं आ रहा है कि वाहन और वाहन चालकों को तो वह काबू करे लेकिन गाय और सांड को कैसे काबू करे जिनके सींगों पर उन्हें रिफ्लेक्टर टेप लगाना है. पौड़ी के आरटीओ सुनील शर्मा कहते हैं कि आक्रामक गाय और सांडों के सींगों पर रिफ्लेक्टर लगाने पर फिर भी सोचा जा सकता है लेकिन आवारा कुत्तों, सुअरों, गधों और घोड़ों पर रिफ्लेक्टर कैसे लगाए जाएंगे.



पशुपालन विभाग ने खड़े किए हाथ

परेशान परिवहन विभाग ने पशुपालन विभाग को पत्र भेजने की बात कहकर पशुओं को पकड़ने में मदद मांगी है लेकिन पशुपालन विभाग ने हाथ खड़े कर दिए हैं. पौड़ी के सीवीओ एसके बर्तवाल ने पत्र मिलने से ही इनकार कर दिया और साफ़ शब्दों में कहा कि पशुपालन विभाग का काम पशुओं के स्वास्थ्य  की देख-रेख और उसमें सलाह देने है. पशुओं को पकड़ना या उन पर रिफ़्लेक्टर्स लगाना नगर पालिकाओं और नगर निगम का काम है.

ज़िले के मालिक का फ़रमान हो तो उसका पालन न करने का सवाल ही पैदा नहीं होता लेकिन अब संकट यह है कि ऐसा किया कैसे जाए? परेशान होकर हाथ खड़े कर चुके दोनों विभाग अब नगर पालिकाओं और नगर निगम से मदद मांग रहे हैं तो पहले ही आवारा पशुओं से परेशान नगर निकाय संसाधनों का रोना रो रहे हैं. ऐसे में सवाल यह है कि अचानक वीवीआईपी हो चुके आवारा पशुओं को गिरफ्त में कैसे लिया जाए.

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First published: January 3, 2020, 2:32 PM IST
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