पौड़ी के DM की खास पहल उत्‍तराखंड के लिए बनी मिसाल, जानिए कैसे?

डीएम पौड़ी की पहल पर 13 शिक्षाविदों, साहित्यकारों और संस्कृतिकर्मियों की काफी मेहनत के बाद तैयार गढ़वाली पुस्तकों को प्रचलित स्थानीय आभूषणों धगुलि, हंसुलि, छुबकि, झुमकि, पैजबी के नाम पर एक से कक्षा 5 तक कक्षावार रखे हैं.

Sudhir Bhatt | News18 Uttarakhand
Updated: July 23, 2019, 5:35 PM IST
पौड़ी के DM की खास पहल उत्‍तराखंड के लिए बनी मिसाल, जानिए कैसे?
उत्तराखंड में पहली बार गढ़वाली को पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है.
Sudhir Bhatt | News18 Uttarakhand
Updated: July 23, 2019, 5:35 PM IST
राज्य में पौड़ी जनपद के लिए सोमवार का दिन ऐतिहासिक रहा जब किसी क्षेत्रीय भाषा को स्कूलों में लागू करने वाला पौड़ी गढ़वाल पहला जनपद बन गया. गढ़वाली भाषा के संरक्षण-संवर्द्धन के उद्देश्य से स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल की गई है और इसे फिलहाल 1 से 5वीं तक की कक्षाओं में मॉडल के रूप में पौड़ी ब्लॉक स्कूलों से शुरू किया गया है.

पौड़ी के इतने ब्‍लॉक में शुरू होगा ये प्रोजेक्‍ट
पौड़ी के डीएम डीएस गबरियाल की पहल पर उत्तराखंड में पहली बार पौड़ी जनपद से गढ़वाली को पाठ्यक्रम में शामिल कर उसकी पढ़ाई स्कूलों में शुरू कर दी गई है. गढ़वाली पाठ्यक्रम के लिए मॉडल रूप से चयनित पौड़ी ब्लॉक के 79 स्कूलों में 1 से पांचवीं तक की कक्षाओं के 51000 बच्चों को पहले दिन गढ़वाली पढ़ाई गई. गढ़वाली में तैयार पुस्तकों को पढ़ाने वाले शिक्षकों ने इसे नया अनुभव बताया.

पौड़ी ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय उफल्डा की शिक्षिका पूनम डोभाल और जलमा पुंडीर ने इसे नया अनुभव बताया. उन्होंने कहा,'पहले दिन गढ़वाली पुस्तकों से पढ़ाने की शुरुआत उन्होंने जानवरों को लेकर शामिल एक गढ़वाली कविता से की, जिसे बच्चों ने बड़े उत्साह से पढ़ा. साथ ही उनका कहना है कि डीएम पौड़ी की ये पहल सराहनीय है और इससे क्षेत्रीय भाषा को प्रोत्साहन मिलेगा.'

मॉडल रूप से चयनित पौड़ी ब्लॉक के 79 स्कूलों में 1 से पांचवीं तक की कक्षाओं के 51000 बच्चों को पहले दिन गढ़वाली पढ़ाई गई.


गढ़वाली पुस्तकों को ऐसे तैयार किया गया है
डीएम पौड़ी की पहल पर 13 शिक्षाविदों, साहित्यकारों और संस्कृतिकर्मियों की काफी मेहनत के बाद तैयार गढ़वाली पुस्तकों को प्रचलित स्थानीय आभूषणों धगुलि, हंसुलि, छुबकि, झुमकि, पैजबी के नाम पर एक से कक्षा 5 तक कक्षावार रखे हैं. आम तौर पर घर में गढ़वाली बोलने वाले बच्चों ने पहले दिन स्कूलों में गढ़वाली को चाव से पढ़ा. उनके लिए भी पहली बार गढ़वाली को स्कूल में पढ़ना नया अनुभव था जिसे उन्होंने खुद ही बताया.
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छात्र नीरज कुमार और कार्तिक नेगी का कहना है कि गढ़वाली को बहुत पहले स्कूलों में शामिल किया जाना चाहिए था, लेकिन पहला दिन गढ़वाली को स्कूल में पढ़ना काफी अच्छा लगा. शामिल की गई गढ़वाली पुस्तकों में बहुत सी रोचक जानकारियां दी गई हैं जिन्हें पढ़ना अच्छा लग रहा है.

ऐसी है किताब
पाठ्यपुस्तक में न केवल राज्य के इतिहास बल्कि समाज, विज्ञान, लोकज्ञान, कविता, गीत, नाटक और कहानियों को भी गढ़वाली भाषा में बताया गया है. जिले के पौड़ी ब्लॉक से प्रायोगिक तौर पर शुरू की गई इस पहल के सफल रहने पर पूरे जनपद के प्राइवेट और सरकारी स्कूलों में इसे लागू किया जायेगा. ऐसे में पहले दिन ही शिक्षकों ने इसे सरसता से पढ़ाया तो बच्चों ने भी इसे उत्साह से अपनाया है.

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First published: July 23, 2019, 5:05 PM IST
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