उत्तराखंडः लैंसडाउन में स्वागत नहीं है... कोरोना के डर से कैंट बोर्ड ने बंद किए दरवाज़े, निराश लौट रहे पर्यटक

लैंसडाउन कैंट बोर्ड ने लैंसडाउन में पर्यटकों की आवाजाही पर 30 सितम्बर तक पूरी तरह से रोक लगा दी है.
लैंसडाउन कैंट बोर्ड ने लैंसडाउन में पर्यटकों की आवाजाही पर 30 सितम्बर तक पूरी तरह से रोक लगा दी है.

कैंट के नियमों के तहत उत्तराखंड के दूसरे जनपदों से आने वाले लोग भी बिना मेडिकल टेस्ट के लैंसडाउन में एंट्री नही कर सकेंगे.

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देहरादून. कोरोना वायरस का संक्रमण फैलने से रोकने के लिए लैंसडाउन कैंट बोर्ड ने लैंसडाउन में पर्यटकों की आवाजाही पर 30 सितम्बर तक पूरी तरह से रोक लगा दी है. कैंट बोर्ड के फ़ैसले के बाद की केंट सीमाओं पर बैरिकेड्स लगाकर चेकिंग की जा रही है. स्थानीय लोगों को भी मेडिकल टेस्ट के बाद ही कैंट क्षेत्र के अंदर एंट्री दी जा रही है. इस दौरान लैंसडाउन घूमने आए पर्यटकों को मौके से ही वापस लौटाया जा रहा है. इससे पर्यटक निराश हैं लेकिन कैंट बोर्ड का मानना है कि यह ज़रूरी कदम है.

सख्ती से रुका संक्रमण 

कैंट बोर्ड की मानें तो बाहर से पर्यटकों के आने से कैंट क्षेत्र में कोरोना संक्रमण की आशंका बढ़ जाएगी इसलिए फिलहाल 30 सितंबर तक किसी भी पर्यटक के लैंसडाउन आने पर पूरी तरह से पाबंदी रहेगी. हालांकि कैंट बोर्ड इस पर भी विचार कर रहा है कि एक अक्टूबर से नई गाइडलाइंस के तहत पर्यटकों को कुछ छूट दी जाए जिससे कि पर्यटक लैंसडाउन में आकर खूबसूरत प्राकृतिक नज़ारों का आनंद उठा सकें.



कैंट के नियमों के तहत उत्तराखंड के दूसरे जनपदों से आने वाले लोग भी बिना मेडिकल टेस्ट के लैंसडाउन में एंट्री नही कर सकेंगे. कैंट बोर्ड की ओर से स्थानीय लोगों को लैंसडाउन में प्रवेश करने के 14 दिन तक क्वारंटाइन किए जाने का प्रावधान किया गया है.

कैंट के सीईओ भूपति रोहित का कहना है कि कैंट बोर्ड की सख्ती का ही नतीजा है कि लैंसडाउन में कोरोना केस नहीं हैं. उन्होंने कहा कि 30 सितंबर के बाद ढील दी जा सकती है.
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