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पौड़ी नगर पालिका की ज़मीन बेचने के मामले में सुर्खियों में यशपाल बेनाम, DM ने बैठाई जांच

पौड़ी के पालिकाध्यक्ष यशपाल बेनाम चर्चाओं में है. ताज़ा मामला नगरपालिका की ज़मीन को बेचने (से जुड़ा है.

पौड़ी के पालिकाध्यक्ष यशपाल बेनाम चर्चाओं में है. ताज़ा मामला नगरपालिका की ज़मीन को बेचने (से जुड़ा है.

सामाजिक कार्यकर्ता नमन चंदोला (Naman Chandola) ने इस मामले को उठाया और कहा कि पालिकाध्यक्ष को ज़मीन का लैंड यूज़ (Land Use) बदलने और उसे बेचने का अधिकार ही नहीं है.

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पौड़ी. वित्तीय अनियमितताओं समेत कई तरह के आरोपों में घिर चुके पौड़ी के पालिकाध्यक्ष यशपाल बेनाम (Pauri Muncipal council Chairman Yashpal Benam) एक बार फिर चर्चाओं में है. ताज़ा मामला नगरपालिका की ज़मीन को बेचने (Selling of Land) से जुड़ा है. मामले के सुर्खियों में आने के बाद पौड़ी  ज़िला प्रशासन (District Administration Pauri) ने इस मामले पर जांच बैठा दी है. यशपाल बेनाम का कहना है कि इसमें कुछ भी ग़लत नहीं हुआ है और ज़िलाधिकारी कह रहे हैं कि जांच के बाद सही-गलत कहना सही होगा. पौड़ी के लोग इस मामले में दूध का दूध और पानी का पानी करने की मांग कर रहे हैं.

सफ़ाईकर्मियों को बेची ज़मीन 

हर कार्यकाल में सुर्खियों में रहने वाले नगरपालिकाध्यक्ष यशपाल बेनाम इस बार फिर पालिका की ज़मीन को बेचने के मामले से सुर्खियों में हैं. उन्होंन 2000 में नजूल भूमि को फ्रीहोल्ड करवाकर पालिका के नाम करवाया और इस 3800 वर्ग मीटर भूमि को बेच दिया.

pauri municipal council land sold, यशपाल बेनाम ने 2000 में नजूल भूमि को फ्रीहोल्ड करवाकर पालिका के नाम करवाया और इस 3800 वर्ग मीटर भूमि को बेच दिया.
यशपाल बेनाम ने 2000 में नजूल भूमि को फ्रीहोल्ड करवाकर पालिका के नाम करवाया और इस 3800 वर्ग मीटर भूमि को बेच दिया.


दरअसल पालिका के स्वामित्व की जमीन पर लम्बे समय से एक वाल्मीकि बस्ती बसी हुई है. इसमें पालिका के ही 32 सफाईकर्मी और उनके परिवार रहते हैं. वर्ष 2000 से अब तक पिछले अध्यक्षों के नक्शेकदम पर चलते हुए पिछले कार्यकाल में बेनाम ने सर्किल रेट पर पालिका की भूमि लगभग 22 सफाईकर्मियों के नाम कर दी थी.

ग़लत साबित होने तक करें इंतज़ार 

सामाजिक कार्यकर्ता नमन चंदोला ने इस मामले को उठाया और कहा कि पालिकाध्यक्ष को ज़मीन का लैंड यूज़ बदलने और उसे बेचने का अधिकार ही नहीं है. इस मामले के खुलने के बाद पौड़ी के ज़िलाधिकारी डीएस गर्बियाल ने मामले में जांच बैठा दी.

हालांकि ज़िलाधिकारी यह भी कहते हैं कि जब तक ग़लत साबित न हो जाए तब तक पालिकाध्यक्ष को ग़लत कहना सही नहीं है और जांच के बाद ही कुछ कहना ठीक रहेगा.

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'ठप रास्तों का राज्य' : सिर्फ पौड़ी में ही 36 सड़कें पूरी तरह ठप, ढाई हफ्ते से संकट में फंसे हैं ग्रामीण

उत्तराखंड में रास्ते बंद होने से ग्रामीणों की समस्याएं बढ़ीं. (File Photo)

Uttarakhand Road Crisis : उत्तराखंड की सड़कों और यहां तक कि राजमार्गों तक की हकीकत बारिश के चलते सामने आ चुकी है. ग्रामीण समस्याओं से जूझ रहे हैं क्योंकि पौड़ी में बंद सड़कों में से 21 तो पीएमजीएसवाई की हैं.

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पौड़ी गढ़वाल. लगातार बारिश के चलते उत्तराखंड ‘बंद सड़कों का प्रदेश’ बनकर सामने आया है. पौड़ी जनपद में बारिश और भूस्खलन के कारण जहां 36 सड़कें पूरी तरह ठप हैं, वहीं 16 दिनों बाद भी मैठाणाघाट-नौलापुर जिला सड़क को ट्रैफिक के लिए खोला नहीं जा सका है. एक जनपद में दर्जनों सड़कों के बंद होने से सबसे ज़्यादा मुसीबत ग्रामीणों की हो गई है क्योंकि गांव किसी एकाध ही मुख्य सड़क से जुड़े होते हैं और उनके रोज़मर्रा के जीवन की चीज़ों की सप्लाई ठप हो जाती है. यही हाल पैठाणी-बड़ेथ सड़क का भी है, जो ढाई सप्ताह बाद किसी तरह खोली गई लेकिन बार-बार बंद होने से खासकर ग्रामीणों को ही भारी समस्याएं हो रही हैं.

सिर्फ पौड़ी में बंद 36 सड़कों का आंकड़ा यह है कि 33 तो सिर्फ ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कें हैं, जिनमें से 21 बंद सड़कें प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना की हैं. इससे साफ तौर पर समझा जा सकता है कि ग्रामीण आबादी किस तरह की मुश्किलों से जूझ रही है. पौड़ी के ज़िला मजिस्ट्रेट विजयकुमार जोगदंडे ने रास्ते बंद होने की पुष्टि करते हुए कहा कि प्रशासन इन सड़कों को फिर से खोलने के काम में जुटा हुआ है, जिसमें कई विभागों की मदद ली जा रही है.

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और क्या है बाकी रास्तों का हाल?
कल यानी मंगलवार को ही खबर आई थी कि गंगोत्री हाईवे पर सुखी टॉप इलाके में भूस्खलन के चलते रास्ता बंद हो गया. यहां बोल्डर इतने ज़्यादा गिरे थे कि बॉर्डर रोड्स संगठन यानी बीआरओ रेस्क्यू कर मलबा हटाने की कवायद कर रहा था. लोग और वाहन फंस गए थे. इसके अलावा यह भी बताया जा चुका है कि राज्य के इस प्रमुख हाईवे पर बड़ेथ के पास एक टनल निर्माण के चलते रास्ता 22 सितंबर तक बंद रहेगा. इसका रूट डायवर्ट कर दिया गया है.

उत्तराखंड में डेल्टा वंश के AY.12 वैरिएंट का पहला केस, ट्रैस किए जा रहे मरीज़ के कॉंटैक्ट

न्यूज़18 क्रिएटिव

Covid-19 in Uttarakhand : पौड़ी गढ़वाल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी का कहना है कि संक्रमित मरीज़ ने कहां कहां यात्रा की है, इसका पूरा रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है और उसके तमाम संपर्कों को तलाशकर नज़र रखी जा रही है.

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देहरादून. पौड़ी गढ़वाल ज़िले के कोटद्वार में कोविड 19 संक्रमित एक मरीज़ मिला, जो उत्तराखंड में डेल्टा वैरिएंट के सब लीनियेज AY.12 से पीड़ित पहला मरीज़ है. उत्तराखंड में तीसरी लहर को लेकर अंदेशे जताए जा रहे हैं कि एक महीने बाद राज्य में तीसरी लहर का प्रकोप देखा जा सकता है. ऐसे में, इस तरह का पहला केस मिलने से चिंता का माहौल बन रहा है. AY.12 के इस मामले में राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने ज़रूरी गाइडलाइन्स देकर मरीज़ को होम क्वारंटाइन कर दिया है. मरीज़ पर नियमित रूप से स्वास्थ्य विभाग की टीम निगरानी कर रही है.

डेल्टा वैरिएंट के AY.12 से पीड़ित पहले केस के मामले में पीड़ित के​ रिश्तेदारों और उसके संपर्क में अन्य लेागों को ट्रैस किया जा रहा है. पौड़ी गढ़वाल ज़िले में पिछले 24 घंटों में चूंकि 15 नए संक्रमित पाए गए हैं इसलिए ज़िले के सभी एंट्री पॉइंटों पर कोविड 19 टेस्ट करवाए जाने की खबरें भी हैं. समाचार एजेंसी एएनआई की खबर के मुताबिक पौड़ी गढ़वाल के सीएमओ मनोज शर्मा ने कहा कि मरीज़ की ट्रैवल हिस्ट्री चेक की जा रही है.

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दूसरी तरफ, रुद्रप्रयाग ज़िले में डेल्टा प्लस वैरिएंट का एक और केस मिलने के बाद ज़िले में इस वैरिएंट के कुल मामले 15 हो गए. वहीं ऊधमसिंह नगर में भी 3 और केस मिलने के बाद इस वैरिएंट के कुल मरीज़ 5 हो गए हैं. जबकि यहां एक संक्रमित मरीज़ लापता बताया जा रहा है. इस ज़िले के बॉर्डरों पर उत्तराखंड प्रशासन ने चेकिंग बढ़ाने का दावा किया है.

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क्या है AY.12 वैरिएंट?
भारत में कोविड के जीनोमिक्स संस्थान Insacog ने AY.12 को डेल्टा वैरिएंट की सब लीनियेज बताया है. इस वैरिएंट के कई केस देश भर में सामने आ चुके हैं. इज़राइल में कोरोना के मामलों में हाल में जो उछाल आया, इस सब ​लीनियेज का ताल्लुक उससे बताया जाता है. Insacog के मुताबिक डेल्टा और AY.12 वैरिएंट अणु स्तर की संरचना में काफी हद तक समान नज़र आते हैं और इनके बीच के अंतर के बारे में अभी ज़्यादा जानकारी नहीं है.

उत्तराखंड : कोटद्वार उपस्वास्थ्य केंद्र में टीका लगने के 12 घंटे बाद बच्ची की मौत

डेढ़ माह की बच्ची की मौत के बाद शोक में डूबे परिजन और जांच करने आए पुलिस अधिकारी.

स्वास्थ्य अधिकारी शैलेंद्र बड़थ्वाल का कहना है कि डेढ़ माह की बच्ची का शव नीला पड़ा हुआ था, जिसे देखकर लगता है कि बच्ची को हृदय संबंधी बीमारी थी, जिसके चलते बच्ची पर टीके का साइड इफेक्ट हो गया. हालांकि उन्होंने कहा कि बच्ची का पोस्टमॉर्टम होने के बाद मौत के असल कारण का पता लग पाएगा.

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कोटद्वार. कोटद्वार के नाथपुर इलाके में टीका लगने के 12 घंटों के भीतर डेढ़ महीने की एक बच्ची की मौत हो गई. बच्ची को कल उपस्वास्थ्य केंद्र लालपानी में टीका लगाया गया था.

कोटद्वार के लालपानी इलाके में टीका लगने के बाद डेढ़ महीने की बच्ची की अचानक मौत ने स्वास्थ्य विभाग के हाथ-पैर फुला दिए हैं. मामला आज गुरुवार सुबह का है. बताया जा रहा है कि उपस्वास्थ्य केंद्र लालपानी में कल ही बच्ची के 6 हफ्ते के होने पर टीका लगाया गया था. जिसके बाद रात के समय बच्ची की तबीयत बिगड़नी शुरू हो गई. मां ने बच्ची को दूध पिला कर सुला दिया. सुबह जब बच्ची को उठाने की कोशिश की गई तो वह मृत पाई गई. सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की टीम ने तत्काल जांच शुरू कर दी है.

बच्चे की मां रश्मि ने बताया कि टीका लगने के बाद से ही उनकी बच्ची की हालत बिगड़नी शुरू हो गई थी और देर रात बच्ची काफी रोने लगी थी, लेकिन उन्होंने यह सोचकर डॉक्टर को नहीं दिखाया कि बच्ची को अभी टीका लगा है. उन्होंने बच्ची को दूध पिलाया और सुलाने की कोशिश की, कुछ समय बाद बच्ची सो गई. लेकिन जब सुबह 7:00 बजे उसे जगाने की कोशिश की गई तो वह नहीं जगी.

स्वास्थ्य अधिकारी शैलेंद्र बड़थ्वाल का कहना है कि बच्ची का शव नीला पड़ा हुआ था, जिसे देखकर लगता है कि बच्ची को हृदय संबंधी बीमारी थी, जिसके चलते बच्ची पर टीके का साइड इफेक्ट हो गया. हालांकि उन्होंने कहा कि बच्ची का पोस्टमॉर्टम होने के बाद मौत के असल कारण का पता लग पाएगा. इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उस उपकेंद्र का भी निरीक्षण कर उन तीनों टीकों की भी जांच की, जो बच्चों को लगाए जा रहे हैं. प्रशासन की ओर से बच्ची के शव का पंचनामा कर शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है.

कोटद्वार में अवैध चेनेलाइजेशन ने अब ली टीनेजर की जान, नाराज ग्रामीणों ने किया पथराव

पौड़ी के कोटद्वार इलाके में नदियों का अवैध उत्खनन हुआ जानलेवा.

Uttarakhand News : उत्तराखंड के गढ़वाल रीजन के कोटद्वार की नदियों में अनियमित चेनेलाइज़ेशन लोगों की जान पर भारी पड़ रहा है. लोगों ने इसे रोकने की मांग की है, जो अफसरों ने इस बारे में अब जांच के आदेश दिए हैं.

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कोटद्वार. पौड़ी ज़िले की नदियों में चल रहा अनियमित चेनेलाइजेशन लोगों की जान पर भारी पड़ रहा है. ताज़ा मामला सुखरौ नदी का है, जहां चेनेलाइजेशन के चलते बने गहरे गड्ढे की वजह से एक टीनेजर पानी में डूब गया. कोटद्वार भाबर की नदियों में खनन के कारण गहरे गड्ढे बन चुके हैं, जो अब लगातार बच्चों की मौतों का कारण बन रहे हैं. बुधवार दोपहर जब ऐसी एक और दुर्घटना हुई, तो स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने नदी किनारे खनन करने वालों पर पथराव तक कर डाला. इस पूरे घटनाक्रम के बाद चेनेलाइज़ेशन का अवैध कारोबार केंद्र में आ गया है.

बुधवार दोपहर सुखरौ नदी के गड्ढे में फंसने से 15 वर्षीय प्रियांशु की मौत हो गई. सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस और एसडीआरएफ की टीम ने सवा तीन घंटे की मशक्कत के बाद शव को बाहर निकाला. गौरतलब कि इससे पहले 7 जून को खोह नदी में ऐसे ही गड्ढे में डूबने से चार बहनों के इकलौते भाई की मौत हो गई थी. इससे पहले भी खोह नदी में दो बच्चे डूब गए थे. लगातार जारी इस सिलसिले में ताज़ा मामले ने अवैध खनन और सिस्टम पर सवालिया निशान लगाया है.

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मृतक प्रियांशु के दोस्त विजय ने बताया कि प्रियांशु की चप्पल नदी में बही तो वह चप्पल निकालने नदी में चला गया, लेकिन नदी में बन गए गड्ढे की गहराई का उसे अंदाज़ा नहीं था इसलिए फंसकर डूब गया. आसपास के लोगों की सूचना के बाद पुलिस और एसडीआरएफ की टीमों ने सर्च अभियान शुरू किया. बरामद शव को पुलिस ने राजकीय बेस अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया. वहीं मामले से गुस्साए लोगों ने खननकारियों पर पथराव कर चेनेलाइजेशन का काम रोकने की मांग की. इस मामले में, कोटद्वार एसडीएम योगेश मेहरा ने मामले की जांच के आदेश दिए. एसडीएम ने कहा कि नियमों के विरुद्ध चेनेलाइजेशन की जांच की जाएगी.

जम्मू-कश्मीर के गुलमर्ग में उत्तराखंड का लाल मनदीप सिंह नेगी शहीद, CM तीरथ सिंह रावत ने दी श्रद्धांजलि

मनदीप सिंह नेगी अपने माता-पिता की इकलौती संतान थे.

Mandeep Singh Negi Shaheed: जम्मू कश्मीर (Jammu and Kashmir) के गुलमर्ग (Gulmarg) में तैनात उत्तराखंड के पौड़ी के जवान मनदीप सिंह नेगी शहीद (Mandeep Singh Negi martyred) हो गए हैं. मनदीप अपने माता-पिता की इकलौती संतान थे.

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पौड़ी गढ़वाल. जम्मू कश्मीर (Jammu and Kashmir) के गुलमर्ग (Gulmarg) में तैनात जवान मनदीप सिंह नेगी (Mandeep Singh Negi Martyred) देश की सुरक्षा करते हुए ड्यूटी के दौरान शहीद हो गए हैं. पौड़ी जनपद के पोखड़ा ब्लॉक के अंतर्गत सकनोली गांव के रहने वाले मनदीप सिंह नेगी की शहादत की सूचना के बाद से पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है. देश की रक्षा में बॉर्डर पर तैनात शहीद मनदीप सिंह नेगी 23 साल की कम उम्र में ही वीरगति को प्राप्त हुए. मनदीप सिंह 20 साल की उम्र में थल सेना का हिस्सा बन गए थे. 11वीं गढ़वाल राइफल्स के जवान के रूप में इन दिनों वो अपनी सेवा जम्मू कश्मीर के गुलमर्ग इलाके में दे रहे थे.

शहीद मनदीप सिंह नेगी अपने माता-पिता की इकलौती संतान थे. मनदीप सिंह नेगी की शहादत की सूचना मिलने के बाद से पूरा परिवार सदमें में है. पोखड़ा ब्लॉक के सकनोली गांव में उनकी माता और पिता रहते हैं. शहीद के पिता सतपाल सिंह नेगी गांव में किसानी का काम किया करते हैं, जबकि शहीद की माता हेमंती देवी गृहणी हैं.



माता-पिता की इकलौती संतान थे मनदीप

शहीद मनदीप सिंह नेगी के गांव के प्रधान मेहरबान सिंह ने बताया कि सेना की ओर से उन्हें फोन आया था जिसमें सेना के अधिकारियों ने बताया कि ड्यूटी के दौरान मनदीप सिंह नेगी शहीद हो गए हैं. इसकी सूचना उनके द्वारा शहीद के पिता को दी गई. सूचना के बाद से शहीद की मां का रो-रोकर बुरा हाल है. प्रधान की ओर से मिली जानकारी के अनुसार शहीद का पार्थिव शरीर कल हवाई मार्ग से कश्मीर से देहरादून के लिए रवाना होगा और फिर बाई रोड़ चौबट्टाखाल विधानसभा क्षेत्र के सकनोली गांव लाया जाएगा. वहीं शहीद मनदीप सिंह नेगी की शहादत की सूचना पर मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने भी गहरा दुःख व्यक्त किया है.

पौड़ी गढ़वाल : बरसाती नदी में बहते सांड को मिला चट्टान का सहारा और फिर... देखें वीडियो

ठीक इसी समय लड़खड़ाए सांड के पांव और वह तेज धार में बहने लगा.

पौड़ी गढ़वाल के धुमाकोट थाना के सिमड़ी में एक सांड ने तेज बहाव वाली बरसाती नदी से जिंदगी की जंग जीत ली. हालांकि वह नदी के तेज बहाव में बहने लगा था. अंततः एक चट्टान का सपोर्ट मिलने के बाद उसने अपनी जिंदगी बचा ली.

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पौड़ी गढ़वाल. हिम्मत हो और किस्मत साथ दे तो आप किसी भी संकट से बच निकलते हैं. कहते हैं कि ऐसी स्थिति में मौत भी छू कर निकल जाती है, आपको ले नहीं जा सकती. ऐसा ही नजारा आज देखने को मिला पौड़ी गढ़वाल में. पौड़ी जनपद के धुमाकोट थाना के सिमड़ी से आए वीडियो में देखा जा सकता है कि एक सांड तेज बहाव वाली बरसाती नदी पार कर रहा है. नदी के तेज बहाव में उसके पांव बार-बार डगमगा रहे हैं. उत्तेजना में उसकी पूंछ बिल्कुल उठी हुई है, लेकिन वह अपनी धुन में नदी पार करने की कोशिश करता है. तभी नदी के तेज बहाव ने उसके पांव उखाड़ दिए और वह नदी में बहने लगा.

पानी की ताकत के सामने बिखर गई सांड की ताकत

इस बेहद खौफनाक दृश्य से पहले पास मौजूद लोगों ने उसे बचाने का प्रयास भी किया, लेकिन इससे पहले ही सांड के पांव पानी के तेज बहाव में एक बार जब उखड़े, तो फिर वो बहता चला गया. पहले उसने खुद को बचाने की बहुत कोशिशें कीं, लेकिन पानी के रौद्र रूप के आगे उसकी एक न चली. हालांकि इस दौरान उसने पानी की तेज धार के बीच संतुलन बनाकर बाहर निकलने के लिए काफी जद्दोजहद भी की, लेकिन पानी के प्रेशर के आगे उसे प्रयास नाकाम साबित होते दिखे.

नदी की धार Vs सांड की ताकत



सांड की यह कोशिश हुई कामयाब

तभी तेज प्रवाह में बहते सांड को संयोग से एक चट्टान का सहारा मिला. घबराया सांड कुछ देर तक तो अपनी सांसें दुरुस्त करता रहा और फिर उसने एकबार खुद को बचाने की जद्दोजहद शुरू की और आखिरकार किसी तरह उसने खुद को पानी से बाहर निकालकर अपनी जिदंगी बचा ली.

हमलावर हो गया था सांड

धुमाकोट थाने के प्रभारी निरीक्षक विनय कुमार का कहना है कि सांड को पानी में जाने से रोकने की बहुत कोशिशें की गईं, लेकिन सांड लोगों पर हमलावर हो गया. तब लोगों ने अपनी जान बचाई और सांड को जाने दिया. इसके बाद ये घटना हुई. उन्होंने कहा कि कुछ दूर तक नदी में बहने के बाद सांड खुद ही नदी से बाहर निकल आया.

Alert : उत्तराखंड में नदियां हुईं खतरनाक, अलकनंदा में डूबे गढ़वाल के निचले इलाके

अलकनंदा नदी में बाढ़ जैसे हालात बने.

वीडियो और तस्वीरों में नदियों के उफनने का खतरा दिखाई दे रहा है. श्रीनगर और गढ़वाल में अलकनंदा के रौद्र रूप के नज़ारे और खबरें सामने आ रही हैं. लगातार पाइए अपडेट्स, सिर्फ न्यूज़18 पर.

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देहरादून. राज्य के तमाम पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश के कारण नदियों के उफनने से काफी मुश्किल स्थितियां बन गई हैं. ताज़ा खबर की मानें तो श्रीनगर और पौड़ी गढ़वाल के कई निचले इलाके पानी में डूब गए हैं. वास्तव में अलकनंदा नदी का जलस्तर तेज़ी से बढ़ जाने से नदी कई स्थानों पर छलक उठी है और किनारों को तोड़कर बह रही है. अलकनंदा ने कई निचले इलाकों को डुबो दिया है, तो वहीं, ऋषिकेश में गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान तक पहुंच जाने से चिंता बढ़ चुकी है. स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग ने वहां अलर्ट जारी कर दिया है.

समाचार एजेंसी एएनआई ने ताज़ा खबर देते हुए बताया ​है कि अलकनंदा नदी का प्रवाह बढ़ जाने निचले इलाके चपेट में आ गए हैं और बाढ़ जैसे हालात बन रहे हैं. इससे पहले अलकनंदा के जलस्तर को लेकर स्टेट कंट्रोल रूम द्वारा अलर्ट जारी किए जाने की खबर आई थी. ऋषिकेश के साथ ही, पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, पौड़ी गढ़वाल और चमोली में नदियों के रौद्र रूप धारण करने के कगार पर पहुंचने की खबरें आ रही हैं. न्यूज़ 18 आपको लगातार इन हालात को लेकर अपडेट कर रहा है.

SEE VIDEO : अलर्ट : उत्तराखंड में उफान पर नदियां, खिसक रही ज़मीन तो दरक रही हैं चट्टानें



इससे पहले, न्यूज़18 ने तस्वीरों और वीडियो के ज़रिये पिथौरागढ़ और ऋषिकेश में नदियों के उफनने के हालात बयान किए थे. राज्य के पहाड़ी ज़िलों में कई जगह भू कटाव और भूस्खलन की खबरें बनी हुई हैं. यात्रियों और लोगों से बेहद सतर्क रहने की अपील भी लगातार की जा रही है.

Mask नहीं पहना तो मह‍िला पर सवार हुईं 'देवी' देखकर पुल‍िस भी हुई हैरान, Video Viral

उत्तराखंड के पौड़ी में जब एक महिला ग़लत तरीके से मास्क पहने पकड़ी गई तो उसने एक नया ड्रामा शुरू कर दिया

Uttarakhand News: उत्तराखंड के पौड़ी में जब एक महिला ग़लत तरीके से मास्क पहने पकड़ी गई तो उसने एक नया ड्रामा शुरू कर दिया, जिसमें उसने कुछ ऐसी एक्टिंग की जिससे ऐसा लगे मानो उस पर देवी सवार हो गई है.

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कोरोना से बचाव के नियम तोड़ने वालों में से कई कानून के शिकंजे में फंसने पर एक से बढ़कर एक बहाने बनाते देखे गए हैं. मास्क नहीं लगाने की वजह किसी ने दम घुटना बताया, तो किसी ने पकड़े जाने ले कुछ वक़्त पहले ही मास्क उतारने का दावा किया. किसी ने जेब में मास्क होने की बात कही, तो कोई चालान काटने वाले से ही उलझता दिखा, लेकिन उत्तराखंड के पौड़ी में जब एक महिला ग़लत तरीके से मास्क पहने पकड़ी गई तो उसने एक नया ड्रामा शुरू कर दिया, जिसमें उसने कुछ ऐसी एक्टिंग की जिससे ऐसा लगे मानो उस पर देवी सवार हो गई है.

महिला के व्यवहार में अचानक आए इस बदलाव को देखकर भी वहां मौजूद पुलिस वाले हैरान नहीं हुए. सभी चुपचाप इस महिला की हरकत को देखते रहे. इन पुलिसवालों को ये समझते देर नहीं लगी कि महिला कोई ड्रामा कर रही है, लेकिन वो ये समझना चाह रहे थे कि आख़िर इस ड्रामे की थीम क्या है?

लेकिन इतना जरूर हुआ कि इतनी मेहनत की वजह से पुलिस ने इस बार इस महिला का चालान नहीं काटा. हालांकि पुलिस ने ड्रामा करने वाली महिला को चेतावनी दी और कहा कि अगली बार घर के बाहर बिना मास्क के पकड़े जाने पर उसका कोई ड्रामा काम नहीं आएगा. अब महिला का देवी वाला नाटक सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है.



एसआई दीपा मल्ल ने बताया क‍ि स्‍कूटी पर दो सवार थे और मास्‍क सही से नहीं पहना था. इसके बाद उन महिला पर देवी जैसा कुछ आया और उनको ह‍िदायत देकर छोड़ द‍िया. पुल‍िस ने महिला को कोरोना गाइडलाइन का पालन करने को कहा गया था जिस दौरान ये घटना हुई.

उत्तराखंड के 9 जिले खतरनाक, मई के 14 दिनों में पिछले 1 साल से ज्‍यादा कोविड मौतें!

सांकेतिक तस्वीर.

इस साल 30 अप्रैल तक पिछले करीब 13 महीनों में जितनी मौतें कोरोना संक्रमण के चलते रिकॉर्ड हुईं, उनसे ज़्यादा आधे महीने में होने से स्वास्थ्य सेवाएं, ग्रामीण इलाकों में हालात और सरकारी कोशिशें चर्चा के केंद्र में हैं.

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देहरादून. कोरोना संक्रमण उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में किस कदर फैल चुका है, इसकी बानगी इस आंकड़े ​से मिल रही है कि राज्य के नौ पहाड़ी ज़िलों में मई के आधे महीने में ही जितनी जानें कोविड 19 से जा चुकी हैं, वो इस साल 15 मार्च से 30 अप्रैल के बीच हुई मौतों से भी ज्‍यादा हैं. पिछले साल जब उत्तराखंड में कोरोना का पहला केस आया था, तबसे डेटा जुटा रही एक निजी संस्था ने इस विश्लेषण के जरिये चेताया भी है, कारण भी बताए हैं.

पहले अगर डेटा ही देख लें तो साफ पता चलता है कि 15 मार्च 2020 को उत्तराखंड में पहला कोरोना केस सामने आया था. तबसे 30 अप्रैल 2021 तक राज्य के नौ पहाड़ी ज़िलों में कोरोना से कुल 312 मौतें का सरकारी आंकड़ा सामने आया. लेकिन चिंताजनक तस्वीर यह है कि इन्हीं ज़िलों में 1 मई से 14 मई के बीच कुल मौतों की संख्या 331 रही.

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कितने भीतर तक पहुंचा वायरस?
हालात गंभीर इसलिए हो रहे हैं कि एक तो पहाड़ी ज़िले और उस पर भी दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों तक संक्रमण पहुंच चुका है. पौड़ी ज़िले के कुर्खयाल गांव में 141 में से 51 लोग जांच में पॉज़िटिव पाए गए. इस तस्वीर से चिंता की बात तो साफ है ही, यह भी ज़ाहिर है कि पहले ही सीमित स्वास्थ्य सेवाएं कितनी कम पड़ रही हैं.

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उत्तराखंड के नौ पहाड़ी ज़िलों में कोरोना मौतों के आंकड़ों से चिंता बढ़ी.


गांवों तक नहीं पहुंच रहीं दवाएं!
चमोली ज़िले में हालात कितने खतरनाक हैं, उसकी बानगी एरणी गांव के प्रधान मोहन नेगी ने दी. नेगी के हवाले से एक रिपोर्ट में कहा गया कि 'मेरे गांव में 80 फीसदी लोगों को बुखार है लेकिन कोई टेस्ट और इलाज उपलब्ध नहीं है. अफसरों ने वादा किया था, एक टीम आई भी थ जो कुछ सैंपल लेकर गई और कुछ दवाएं थमा गई.'

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इस पर राज्य सरकार का कहना है कि हर संभव कोशिश की जा रही है. इस बारे में न्यू इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट एक निजी फाउंडेशन के हवाले से यह भी कहती है कि हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर पहले ही बुरी तरह दबाव झेल रहा है और नाकाफी नज़र आ रहा है. फाउंडेशन के अनूप नौटियाल के हवाले से कहा गया कि समय से ठीक इलाज मिल जाए तो 90 फीसदी से ज़्यादा केस सामान्य ही हैं. "सरकार को हर संभव कोशिश करना चाहिए जैसे फोन पर डॉक्टरी सलाह देने और ग्रामीण या दूरस्थ इलाकों में कोविड किट की होम डिलीवरी आदि कदम उठाने ज़रूरी हैं."

उत्तराखंडः मैदानी इलाकों के अस्पताल में बेड फुल, पहाड़ की तरफ बढ़े कोरोना मरीज

गढ़वाल के बेस हॉस्पिटल में दूर-दूर से आ रहे मरीज.

Uttarakhand Corona News: उत्तराखंड के मैदानी इलाकों में कोविड अस्पतालों में बेड न मिलने से गढ़वाल की तरफ इलाज कराने पहुंच रहे मरीज. श्रीनगर के बेस हॉस्पिटल में 30 बेड वाला आईसीयू हुआ फुल. मरीजों के इलाज के लिए बढ़ाई जा रही सुविधाएं.

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पौड़ी गढ़वाल. राज्य में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच मैदानी इलाकों के सभी अस्पतालों में बेड फुल हो गए हैं. अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी भी है, जिसकी वजह से मरीज अब पहाड़ी इलाकों की तरफ बढ़ने लगे हैं. गढ़वाल के पर्वतीय क्षेत्रों के सबसे बड़े राजकीय बेस हॉस्पिटल श्रीनगर में पिछले कुछ दिनों में जिस तेजी से मरीज बढ़े हैं, वह इसका प्रमाण है. इस हॉस्पिटल में न सिर्फ उत्तराखंड, बल्कि यूपी, हरियाणा और दिल्ली से भी मरीज आ रहे हैं.

आमतौर पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए पहाड़ों से मैदानी क्षेत्रों में जाने का सिलसिला इन दिनों उल्टा हो गया है. तेज रफ्तार से बढ़ते कोरोना संक्रमण के मामलों के कारण प्रदेश के देहरादून, हरिद्वार आदि जैसे मैदानी क्षेत्रों के अस्पतालों में जगह नहीं बची है. ऐसे में वहां से निराश लौटते मरीज पहाड़ के अस्पतालों में पहुंच रहे हैं. पिछले कुछ दिनों में श्रीनगर के बेस हॉस्पिटल में बड़ी तादाद में कोरोना मरीज आए हैं, जिसके कारण अस्पताल के 30 बेड वाला आईसीयू फुल हो गया है. अस्पताल के अधीक्षक डॉ. केपी सिंह ने कहा कि मरीजों के बढ़ते दबाव के कारण 200 बेड वाले कोविड बेस अस्पताल में आईसीयू फुल हो गया है. इसलिए केवल आक्सीजन सपोर्ट बेड्स पर ही मरीजों को भर्ती किया जा रहा है.



डॉ. सिंह ने कहा कि अब नॉन कोविड 500 अतिरिक्त बेड्स पर कोरोना के इलाज की सुविधाएं जुटाई जा रही हैं. इस बीच अस्पताल में कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ती देख वेंटिलेटर्स भी लगाए जा रहे हैं. आईसीयू के नोडल अफसर डॉ. अजय विक्रम सिंह ने कहा कि इस बेस हॉस्पिटल में 120 वेटिंलेटर्स थे, जिनमें से 40 को देहरादून भेज दिया गया है. हाल के दिनों में यहां मरीजों की संख्या बढ़ने के बाद अब बचे सभी 80 वेटिंलेटर्स को भी इंस्टॉल कर लिया गया है.

Uttarakhand: कोरोना से मचा हाहाकार! पौड़ी गढ़वाल के कोटद्वार और स्वर्गाश्रम क्षेत्र में कर्फ्यू का ऐलान

कोटद्वार और स्वर्गाश्रम क्षेत्र में लगा कर्फ्यू. (सांकेतिक फोटो)

उत्तराखंड सरकार ने कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए पौड़ी गढ़वाल जिले के कोटद्वार और स्वर्गाश्रम क्षेत्र (Kotdwar and Swargashram) में 3 मई तक कर्फ्यू लगाने का ऐलान कर दिया है.

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पौड़ी गढ़वाल. उत्तराखंड में कोरोना वायरस का कहर जारी है और अब इसकी जद में धीमे-धीमे दूरदराज के जिले भी अपने लगे हैं. यही वजह है कि उत्तराखंड सरकार ने कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए पौड़ी गढ़वाल जिले के कोटद्वार और स्वर्गाश्रम क्षेत्र (Kotdwar and Swargashram) में कर्फ्यू लगाने का ऐलान कर दिया है. यह कर्फ्यू (Curfew) आज यानी 26 अप्रैल से 3 मई तक के लिए लगाया गया है.

बता दें कि पौड़ी गढ़वाल जिले के कोटद्वार और स्वर्गाश्रम क्षेत्र (Kotdwar and Swargashram) में कर्फ्यू आज शाम 7 बजे से 3 मई की सुबह 5 बजे तक लागू रहेगा.

इस बीच राज्‍य की राजधानी देहरादून में भी लगातार संक्रमण के मामले देखते हुए जिला प्रशासन ने कोरोना कर्फ्यू (Corona Curfew) की अवधि 26 अप्रैल से बढ़ाकर 3 मई तक कर दी है. देहरादून के डीएम ने इस बाबत आदेश जारी कर दिए हैं. प्रशासन के आदेश के मुताबिक देहरादून में 26 अप्रैल की शाम 7 बजे से लेकर 3 मई के सुबह 5 बजे तक कर्फ्यू रहेगा. इस दौरान निजी वाहनों का आवागमन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा. आदेश के तहत ऋषिकेश नगर निगम, छावनी परिषद गढ़ी कैंट, क्लेमन्टाऊन इलाकों में लोगों की आवाजाही पर पाबंदी होगी.



बता दें कि उत्तराखंड में कोरोना से हालात काफी खराब हो गए हैं और सीएम तीरथ सिंह रावत के मंत्री हरक सिंह रावत का कहना है कि यह हकीकत है कि अस्पताल ओवरलोड हो गये हैं. आम आदमी का ऐसे में क्या हाल हो रहा होगा यह सोचने वाली बात है. उन्होंने कहा कि स्थिति बेहद गंभीर है, उत्तराखंड जैसे छोटे से राज्य में एक दिन में पांच हजार कोविड पॉजिटिव मरीजों का आना चिंता का विषय है. इसी वजह से राज्‍य में टोटल लॉकडाउन लगा देना चाहिए.

ऑक्सीजन या रेमडेसिविर की कालाबाजारी रोकने के लिए नंबर जारी
उत्तराखंड में कोरोना मरीजों के इलाज के लिए पिछले साल की ही तरह पुलिस अब एक बार फिर आगे आई है. उत्तराखंड पुलिस ने कोविड-19 के इलाज में इस्तेमाल होने वाले रेमडेसिविर इंजेक्शन और अन्य जीवन रक्षक दवाओं के साथ-साथ ऑक्सीजन सिलेंडर की कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए एक मोबाइल नंबर 9411112780 जारी किया है. इस मोबाइल नंबर पर फोन करके आप दवाओं की कालाबाजारी करने वालों को पुलिस से पकड़वा सकते हैं.

लाइट, कैमरा एक्शन के साथ आग बुझाते वन मंत्री सोशल मीडिया में हुए ट्रोल

Forest Fire: वन मंत्री हरक सिंह रावत के झाड़ी लेकर आग बुझाने का वीडियो हुआ वायरल.

Harak Singh Rawat Video: उत्तराखंड के वन मंत्री हरक सिंह रावत ने झाड़ी का गट्ठर लेकर आग बुझाने का वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया तो हुए ट्रोल. लोगों ने इसे पब्लिसिटी स्टंट करार देकर उड़ाया मजाक.

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देहरादून. यूपी में अपराधी की घेराबंदी कर उसे पकड़ने के लिए मुंह से 'ठांय-ठांय' की आवाज निकालने वाले पुलिसकर्मी का किस्सा तो आपको याद होगा? यूपी पुलिस का यह वीडियो खूब वायरल हुआ था. कुछ ऐसा ही मजेदार वीडियो आज उत्तराखंड से भी आया है. उत्तराखंड के जंगलों में इन दिनों आग लगी हुई है, जिसे बुझाने के लिए सरकार ने सेना के हेलिकॉप्टर मंगाए हैं. वन विभाग के 5000 से ज्यादा कर्मचारी, दो से ढाई हजार पंचायतों के लोग और दो हेलिकॉप्टरों की मदद से आग पर काबू पाने का प्रयास किया जा रहा है. केंद्र सरकार भी उत्तराखंड की वन संपदा को बचाने के लिए गंभीर है. ऐसे में प्रदेश के वन मंत्री को भी जंगल की चिंता हो, यह लाजिमी है.

लेकिन वन मंत्री ने जिस अंदाज में जंगल की आग बुझाने का प्रयास किया, उसका वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है. दरअसल, उत्तराखंड के वन मंत्री हरक सिंह रावत सोमवार को गढ़वाल क्षेत्र के दौरे पर थे. श्रीनगर से पौड़ी जाते समय रास्ते में वन मंत्री का सामना जंगल की आग से हो गया. फिर क्या था, वन मंत्री गाड़ी से उतरे और आग बुझाने में जुट गए. इस वायरल वीडियो में आप देख सकते हैं कि वन मंत्री हरक सिंह रावत झाड़ियों के गट्ठर से आग बुझा रहे हैं.

मंत्री जी चूंकि जंगल की आग बुझाने के प्रति 'गंभीर' हैं, इसलिए उन्होंने अपने प्रयास की वीडियोग्राफी भी कराई. फिर बाकायदा जंगल की आग बुझाने का यह वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड भी किया. मंत्री ने इस वीडियो के जरिये सरकारी अधिकारियों, कर्मचारियों के साथ-साथ आम लोगों से अपील भी की कि वे सभी आग बुझाने के लिए आगे आएं. सोशल मीडिया पर इस वीडियो के अपलोड होते ही मंत्री ट्रोल होने लगे.



सोशल मीडिया पर इस वीडियो को लेकर लोग वन मंत्री का मजाक उड़ा रहे हैं. यूजर्स इसे फॉरेस्ट मिनिस्टर का पब्लिसिटी स्टंट करार दे रहे हैं. लोगों का कहना है कि वन मंत्री लाइट, कैमरा, एक्शन के साथ जंगल की आग बुझा रहे हैं. पब्लिसिटी पाने के लिए वन मंत्री के एक-एक एक्शन को कैमरे में कैप्चर किया गया है. आपको बता दें कि जंगल की आग से सबसे अधिक वन मंत्री का गृह जिला पौड़ी ही प्रभावित है. पौड़ी जिले में आग लगने की सबसे अधिक 385 घटनाएं हो चुकी हैं. दूसरे नंबर पर टिहरी जिला है, जहां आग लगने की अभी तक 133 घटनाएं दर्ज की गई हैं.

उत्तराखंड के जंगलों में आग लगने की अभी तक लगभग डेढ़ हजार घटनाएं सामने आ चुकी हैं. प्रदेश के करीब 1757 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैली वन संपदा आग से प्रभावित हुई है. वन विभाग अब आम  लोगों से मदद के लिए आगे आने की अपील कर रहा है. वन विभाग के हजारों कर्मचारियों, ढाई हजार पंचायतों के लोग इस आग बुझाने के काम में जुटे हैं. राज्य सरकार ने वायुसेना से आग बुझाने में मदद के लिए दो हेलिकॉप्टर भी मांगे हैं, जो जंगलों पर पानी का छिड़काव कर आग बुझाने में लगे हैं. फिर भी आग का तांडव जारी है.

गढ़वाल की DIG गुमशुदगी के मामलों पर नाराज, कहा- भविष्य में लापरवाही हुई तो SP भी होंगे जिम्मेदार

गढ़वाल रेंज की महिला DIG ने क्षेत्र में बढ़ रहे गुमशुदगी के मामलों को लेकर नाराजगी जाहिर की है.

गढ़वाल रेंज की DIG नीरू गर्ग ने शनिवार को रेंज के 7 जिलों के कप्तानों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग से जरिए मीटिंग की. डीआईजी ने सभी जिला पुलिस अधीक्षकों को कोरोना महामारी के साथ चारधाम यात्रा और जिले में अपराध को रोकने और निवारण करने के निर्देश दिए.

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गढ़वाल.  DIG गढ़वाल रेंज नीरू गर्ग ने शनिवार को रेंज के 7 जिलों के कप्तानों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग से जरिए मीटिंग की. मीटिंग के दौरान डीआईजी ने सभी कप्तानों को कोरोना महामारी के साथ चारधाम यात्रा और जिले में अपराध को रोकने और अपराधों का जल्द निवारण करने के निर्देश दिए. डीआईजी ने सभी जनपद प्रभारियों के साथ अपराध गोष्ठी कर उनके रोकथाम एवं निवारण हेतु आवश्यक निर्देश भी दिये.

DIG नीरू गर्ग ने सभी जिलों के एसपी को गुमशुदगी संबंधी मामलों पर विवेचना का स्तर सही करने के निर्देश के साथ सभी प्रकरणों का एसएसपी, एसपी से खुद जांच करने निर्देश दिए. साथ ही भविष्य में लापरवाही होने पर संबंधित क्षेत्राधिकारी के साथ एसएसपी-एसपी की जिम्मेदारी तय की जायेगी. जिसमें नाबालिग गुमशुदगी जैसे गम्भीर प्रकरणों में मानव तस्करी (Human Trafficking) जैसी घटनाओं की सम्भावना रहती है, अतः ऐसी घटनाओं पर तत्काल प्रभावी कार्यवाही करते हुए शत प्रतिशत बरामदगी करने के निर्देश दिए.

DIG ने जन शिकायत के प्रार्थना पत्रों पर अविलम्ब कार्यवाही कर समयबद्ध निस्तारण करते हुए अनुपालन से अवगत कराया जाए तथा रेंज से निकले आदेश-निर्देशों का भी शत प्रतिशत अनुपालन करना भी सुनिश्चित करेंगें. तीन महीने से अधिक लम्बित विभागीय कार्यवाही को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित करने हेतु निर्देशित किया गया. आगामी चारधाम यात्रा को सुगम व सुचारु रुप से सम्पन्न कराने के लिए सभी जिलों को नये सिरे से Danger Zone, Bottle Neck Points को  समय से चिन्हित कर सुरक्षात्मक उपाय करने हेतु निर्देशित किया गया है.

चारधाम यात्रा में यात्रियों की सुविधा हेतु चारधाम रुट पर तैनात पुलिस कर्मियों को जो बुकलेट दी जायेगी जिसमे सम्पूर्ण यात्रा रुट की जानकारी के साथ ही जनपदों के पर्यटक स्थल(फोटो ग्राफ्स सहित), होटल/गेस्ट हॉउस, बस/टैक्सी संचालकों, समस्त थाने-चौकियों, समस्त थाना/चौकी इंचार्ज, प्रशासन के महत्वपूर्ण अधिकारियों के मोबाइल नम्बर का भी समावेश करने हेतु निर्देशित किया गया.

उत्तराखंड की सियासत में फिर पौड़ी गढ़वाल का बोलबाला, जानें यहां अब तक कितने बने CM

मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रहे हैं.

उत्तराखंड के नए मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत उत्तराखंड के 10वें सीएम होंगे. आपको ये जानकर हैरानी होगी कि प्रदेश में अब तक जिन 10 लोगों ने इस पद को हासिल किया है, उनमें से 6 नेता पौड़ी गढ़वाल इलाके के ही रहे हैं.

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देहरादून. पौड़ी गढ़वाल (Pauri Garhwal) ने उत्तराखंड को मुख्यमंत्री देने में रिकॉर्ड कायम कर लिया है. इस क्षेत्र से सबसे पहले मुख्यमंत्री बीसी खंडूरी बने थे. अब बीजेपी हाईकमान ने तीरथ सिंह रावत के नाम पर मुहर लगाकर पौड़ी गढ़वाल को फिर से सुर्खियों में ला दिया है. तीरथ सिंह रावत (Tirath Singh Rawat) उत्तराखंड के 10 वें सीएम होंगे. लेकिन आपको ये जानकर आश्चर्य होगा कि उत्तराखंड जिन 10 लोगों को मुख्यमंत्री बनाया गया उनमें से 6 नेता पौड़ी गढ़वाल से निकले हैं. 2007 में बीजेपी (BJP) ने बीसी खंडूरी को मुख्यमंत्री बनाया गया था. खंडूरी पौड़ी गढ़वाल से पहले सीएम बनें थे.

खंडूरी के बाद सूबे की कमान रमेश पोखरियाल निशंक को सौंपी गई. निशंक भी पौड़ी गढ़वाल क्षेत्र से निकले थे. 2011 में सूबे की बागड़ोर एक बार फिर बीसी खंडूरी को दी गई. सूबे के तीसरे चुनावों में भाजपा से सत्ता कांग्रेस की झोली में जरूर गई, लेकिन सूबे की कमान पौड़ी गढ़वाल के पास ही रही. कांग्रेस ने विजय बहुगुणा को सूबे का मुखिया बनाया था. बहुगुणा भी पौड़ी गढ़वाल से ही आते हैं. 2017 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी को प्रंचड बहुमत मिला तो पार्टी हाईकमान ने एक बार फिर पौड़ी गढ़वाल की झोली भरी.



NSA डोभाल भी पौड़ी गढ़वाल के
पौड़ी से निकले त्रिवेन्द्र सिंह रावत को राज्य का 9वां सीएम बनाया गया. बीते दिनों हुई सियासी उठा-पटक के बाद कई नामों पर चर्चा जोरों पर थी. कुछ नाम कुमाऊं क्षेत्र से भी मुख्यमंत्री के लिए चर्चाओं में थे. लेकिन एक बार फिर बीजेपी हाईकमान ने पौड़ी गढ़वाल से ही मुख्यमंत्री की तलाश की और इसी क्षेत्र के सांसद तीरथ सिंह रावत को मुख्यमंत्री का ताज पहना दिया है. उत्तराखंड ही नहीं बल्कि देश की सियासत में भी इस क्षेत्र ने खासा मुकाम हासिल किया है. यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी इसी क्षेत्र से ताल्लुक रखते हैं. राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल भी पौड़ी गढ़वाल के माटी से निकलकर राष्ट्रीय फलक में छाए हैं.

स्मैक तस्करी कर रहा सेना का जवान गिरफ्तार, लग्जरी गाड़ी खरीदने की लालच में बना स्मगलर

कोटद्वार में स्मैक की तस्करी करने के आरोप में सेना का जवान गिरफ्तार.

Kotdwar News: असम में तैनात सेना की सातवीं गढ़वाल राइफल्स का जवान ग्रासटनगंज का रहने वाला है. लग्जरी गाड़ी खरीदने के लिए पैसे कम पड़े तो स्मैक बेचकर रकम जुटाने का बनाया था प्लान, लेकिन पुलिस ने कर लिया गिरफ्तार.

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पौड़ी गढ़वाल. शौक पूरा करने के फेर में लोग गलत कदम उठाने से भी नहीं चूकते. उत्तराखंड के कोटद्वार में ऐसा ही एक मामला सामने आया है. यहां सेना के एक जवान को मादक पदार्थ की तस्करी करते पुलिस ने गिरफ्तार किया है. थल सेना के सातवीं गढ़वाल राइफल्स का जवान इन दिनों छुट्टियों में घर आया हुआ है. उसकी तैनाती फिलहाल असम में है. सेना के जवान को लग्जरी गाड़ी खरीदनी थी, इसके लिए पैसे कम पड़े तो आरोपी ने स्मैक की तस्करी शुरू कर दी.

कोटद्वार के ग्रासटनगंज का रहने वाला सेना के जवान ने पुलिस की पूछताछ के दौरान लग्जरी गाड़ी खरीदने की चाहत के फेर में स्मैक की तस्करी में हाथ आजमाने की बात स्वीकार की. पुलिस ने आरोपी जवान के साथ दो अन्य तस्करों को भी गिरफ्तार किया है. पुलिस के मुताबिक आरोपी जवान बीती 2 फरवरी को छुट्टियों में अपने घर आया था. पूछताछ में आरोपी जवान ने पुलिस को बताया कि वह लंबे समय से लग्जरी गाड़ी खरीदने की प्लानिंग कर रहा था. लेकिन इसके लिए पैसे कम पड़ रहे थे. इसी वजह से आरोपी जवान ने शॉर्टकट तरीके से पैसे जुटाने की योजना बनाई और स्मैक की तस्करी के काले धंधे में उतर गया.

आरोपी जवान ने पुलिस को बताया कि उसने बरेली से 10 हजार रुपए की स्मैक खरीदी और उसे ऊंचे दाम पर कोटद्वार में बेचना शुरू कर दिया. इसी क्रम में पुलिस ने उसे धर दबोचा. आरोपी जवान के पास से पुलिस ने 4.50 ग्राम स्मैक बरामद की. कोटद्वार के एसएचओ नरेंद्र सिंह बिष्ट ने बताया कि एसएसपी के निर्देश पर नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने का अभियान चलाया जा रहा है. इसी के तहत पुलिस ने तीन तस्करों को गिरफ्तार किया है. इनमें एक सेना का जवान शामिल है. इन तीनों तस्करों के पास से पुलिस ने 23 ग्राम स्मैक बरामद की है. तीनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेजने की तैयारी की जा रही है.

Uttarakhand: चक्रवर्ती राजा भरत की जन्मस्थली कोटद्वार का नाम बदला, अब ये होगा नया नाम

राज्य कैबिनेट ने चक्रवर्ती सम्राट राजा भरत की जन्मस्थली कोटद्वार का नाम बदलकर कण्व नगरी कोटद्वार करने के फैसले को हरी झंडी दे दी है. नगर निगम कोटद्वार पहले ही कोटद्वार के नाम के आगे कण्व नगरी लिखे जाने के प्रस्ताव पर मुहर लगा चुका था.

राज्य कैबिनेट ने चक्रवर्ती सम्राट राजा भरत की जन्मस्थली कोटद्वार का नाम बदलकर कण्व नगरी कोटद्वार करने के फैसले को हरी झंडी दे दी है. नगर निगम कोटद्वार पहले ही कोटद्वार के नाम के आगे कण्व नगरी लिखे जाने के प्रस्ताव पर मुहर लगा चुका था.

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पौड़ी गढ़वाल. उत्तराखंड के प्रमुख शहरों में से एक कोटद्वार शहर का नाम अब बदलकर कण्व नगरी हो गया है. हस्तिनापुर के राजा दुष्यंत और शाकुन्तला के पुत्र चक्रवर्ती राजा भरत की जन्मस्थली कण्वाश्रम के नाम पर कोटद्वार का नाम कण्वनगरी कोटद्वार (Kanva Nagari Kotdwar) हो चुका है. उत्तराखंड के पौड़ी जिले के सबसे बड़े शहर कोटद्वार की पहचान अब कण्व नगरी कोटद्वार के रूप में होगी.

राज्य कैबिनेट ने कोटद्वार का नाम बदलकर कण्व नगरी कोटद्वार करने के फैसले को हरी झंडी दे दी है. नगर निगम कोटद्वार की ओर से पहले ही कोटद्वार के नाम के आगे कण्व नगरी लिखे जाने के प्रस्ताव पर मुहर लग चुकी थी. इसके बाद अब राज्य सरकार ने भी कोटद्वार के नाम को बदलकर कण्व नगरी कर दिया है.

शहर से जुड़ी है ये मान्यता
मान्यता है कि कोटद्वार के कण्वाश्रम में राजा दुष्यन्त और शकुंतला के पुत्र चक्रवर्ती राजा भरत का जन्म हुआ था. वहीं पर ऋषि कण्व का आश्रम भी हुआ करता था, मन जाता है कि यहाँ पर राजा भरत की प्रारंभिक दीक्षा शिक्षा भी हुई थी. राजा भरत के नाम पर ही कोटद्वार का नाम भारत पड़ा है. कोटद्वार एक पौराणिक नगर रहा है, धर्मग्रंथों में भी कोटद्वार और मालन नदी का जिक्र मिलता है. कोटद्वार से कण्वाश्रम से होकर पवित्र मालन नदी भी गुजरती है, जिस नदी का जिक्र महाकवि कालिदास रचित अभिज्ञान शाकुंतलम में भी किया गया है.

पौराणिक महत्त्व समेटे कण्वाश्रम को देखते हुए काफी लंबे समय से कोटद्वार के नाम मे बदलाव की मांग की जा रही थी. खुद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत साल 2019 में जब कोटद्वार के कण्वाश्रम में पहुंचे थे तो उन्होंने कोटद्वार के नाम मे बदलाव करने की घोषणा की थी, उन्ही की घोषणा के बाद कैबिनेट ने कोटद्वार का नाम बदलकर कण्व नगरी रख दिया है. अब कोटद्वार की नई पहचान कण्वनगरी कोटद्वार के रूप में होगी.

कॉर्बेट टाइगर रिज़र्व में फिर दौड़ेंगी जीएमओयू की बसें... क्रिसमस से खुल जाएगी कोटद्वार-कालागढ़ सड़क

मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक ने मार्ग पर बसों के संचालन की अनुमति देने के लिए कॉर्बेट टाइगर रिज़र्व के निदेशक को निर्देश जारी कर दिए हैं.

इससे साठ किलोमीटर से ज़्यादा का सफ़र घट जाएगा और बसों को उत्तर प्रदेश से होकर नहीं जाना पड़ेगा.

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कोटद्वार. कॉर्बेट टाइगर रिज़र्व से होकर गुज़रने वाली कोटद्वार-कालागढ़ रामनगर सड़क पर एक बार फिर से बसें दौड़ना शुरू होंगी. साल 2018 में हाईकोर्ट के आदेश के बाद कालागढ़ मार्ग पर वाहनों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई थी. अब वन मंत्री और कोटद्वार के विधायक हरक सिंह रावत के हस्तक्षेप के बाद यहां 25 दिसंबर से  फिर से बसों की आवाजाही शुरू होने जा रही है. इससे साठ किलोमीटर से ज़्यादा का सफ़र घट जाएगा और बसों को उत्तर प्रदेश से होकर नहीं जाना पड़ेगा.

बड़ी राहत मिलेगी

वन मंत्री हरक सिंह रावत के हस्तक्षेप के चलते दो साल के बाद एक बार फिर से कालागढ़ वन मार्ग आम लोगों की आवाजाही के लिए खुलने जा रहा है. कोटद्वार विधायक और वन मंत्री हरक सिंह रावत का कहना है कि 25 दिसंबर से कालागढ़ मार्ग को बसों के संचालन के लिए खोल दिया जाएगा.

उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के निर्देश के बाद इस मार्ग को अगस्त 2018 में बंद कर दिया गया था लेकिन हाईकोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट की ओर से स्टे लगा दिया गया था. ऐसे में अब इस मार्ग को जी एम ओ यू की बसों के संचालन के लिए खोला जा रहा है.

वन मंत्री हरक सिंह रावत का कहना है कि कालागढ़ क्षेत्र कोटद्वार का हिस्सा है. ऐसे में कालागढ़ से कोटद्वार आने वाले लोगों को भी बड़ी परेशानियों का सामना करना होता था. कालागढ़ वन मार्ग खुल जाने से अब कालागढ़ और रामनगर जाने वाले यात्रियों को उत्तर प्रदेश के रास्ते नहीं जाना होगा और लोगो को बड़ी राहत मिलने जा रही है.

विशेष अनुमति  

कॉर्बेट टाइगर रिज़र्व का रास्ता होने के चलते इस मार्ग पर सिर्फ़ जीएमओयू की बसों को सीमित संख्या में सीमित फेरे लगाने की अनुमति दी जाएगी. इस रास्ते पर न तो निजी वाहनों को आवाजाही की अनुमति मिलेगी और न ही रोडवेज़ की बसों को.

मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक ने मार्ग पर बसों के संचालन की अनुमति देने के लिए कॉर्बेट टाइगर रिज़र्व के निदेशक को निर्देश जारी कर दिए हैं.

उत्तराखंडः कोरोना की गाइडलाइंस भूल गए मंत्री, शादी में डांस का Video हो रहा वायरल

मंत्री हरक सिंह रावत को विधानसभा चुनाव 2012 के आचार संहिता उल्लंघन के मामले में अदालत ने बरी किया. (फाइल फोटो)

Viral Video: उत्तराखंड सरकार के मंत्री हरक सिंह रावत (Harak Sigh rawat) का वीडियो सोशल मीडिया में जमकर वायरल हो रहा है, जिसमें वह एक शादी समारोह में COVID-19 की गाइडलाइंस भूलकर डांस करते नजर आ रहे हैं.

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कोटद्वार. पूरे देश में कोरोना वायरस (COVID-19) के बढ़ते संक्रमण के बीच विभिन्न राज्यों की सरकारें एक बार फिर से COVID-19 के लिए जारी गाइडलाइंस (Corona Guideline) का पालन करने के प्रति गंभीर दिख रही हैं. उत्तराखंड की भाजपा सरकार (BJP Govt)  भी लोगों से लगातार मास्क पहनने और सोशल डिस्टेंस का पालन करने की अपील कर रही है. यहां तक कि शादी समारोहों या भीड़-भाड़ वाले इलाके से लोगों को दूरी बनाने को कहा जा रहा है. लेकिन उत्तराखंड सरकार के मंत्री को ही इस गाइडलाइंस की परवाह नहीं है. त्रिवेंद्र सिंह रावत (CM TS Rawat) सरकार के मंत्री हरक सिंह रावत (Harak Singh Rawat) का सोशल मीडिया में वायरल हो रहा वीडियो (Viral Video) इसकी गवाही दे रहा है.

सोशल मीडिया में वायरल हो रहे इस वीडियो में मंत्री हरक सिंह रावत एक शादी समारोह में शिरकत करते नजर आ रहे हैं. वीडियो में देखा जा सकता है कि मंत्री जी कोरोना संक्रमण के लिए जारी सोशल डिस्टेंसिंग की गाइडलाइन को भूल कर न तो मास्क पहने हैं और न ही लोगों से दूरी बनाई है. उल्टा वे शादी समारोह में दूसरे लोगों के साथ मिलकर झूम-झूमकर नाच रहे हैं. मंत्री के द्वारा कोरोना गाइडलाइंस की धज्जियां उड़ाने को लेकर सोशल मीडिया में खूब चर्चाएं हो रही हैं.



सरकार के मंत्री के ही कोरोना गाइडलाइंस का पालन न करने का प्रमाण ये वीडियो, सोशल मीडिया पर खूब शेयर किया जा रहा है. बीजेपी सरकार और मंत्री के आलोचक जहां इस वीडियो को लेकर आलोचना कर रहे हैं, वहीं सोशल मीडिया यूजर्स इसको लेकर तरह-तरह की टिप्पणियां कर रहे हैं. गौरतलब है कि देश के अन्य राज्यों की तरह उत्तराखंड में भी कोरोना वायरस का संक्रमण दिनों-दिन बढ़ता जा रहा है. इसके मद्देनजर राज्य सरकार और विभिन्न जिलों का प्रशासन अपने स्तर से कोरोना गाइडलाइंस का पालन कराने के लिए जागरूकता अभियान चला रहा है. लेकिन इन सबके बीच मंत्री हरक सिंह रावत का यह वायरल वीडियो चर्चा का विषय बना हुआ है.

कोटद्वार में एक आबकारी सिपाही को लेकर विभाग और जनता आमने-सामने... बीजेपी-कांग्रेस नेता भी हैं एक मत

कोटद्वार में बीजेपी, कांग्रेस नेताओं और कई स्थानीय निवासियों ने आबकारी विभाग के एक सिपाही पर अवैध शराब कारोबारियों से मिलीभगत का आरोप लगाया है. (फ़ाइल फ़ोटो)

"सिपाहियों की मिलीभगत का नतीजा है कि आबकारी इंस्पेक्टर जब भी छापेमारी की योजना बनाते हैं तो उससे पहले ही इसकी सूचना अवैध शराब बेचने वालों को मिल जाती है."

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कोटद्वार. उत्तराखंड और शराब का रिश्ता बड़ा पेचीदा है. राज्य की महिलाएं शराब के ख़िलाफ़ आंदोलन करती रही हैं और सरकारें पैसा कमाने के लिए शराब बेचने के नए-नए तरीके निकालती रही हैं भले ही इसमें जनता की नाराज़गी ही क्यों न मोल लेनी पड़े. शराब और समाज के रिश्ते का एक पेचीदा मामला कोटद्वार से भी सामने आया है. यहां आबकारी विभाग के एक सिपाही के ख़िलाफ़ स्थानीय निवासियों के अलावा पार्टी लाइन से हटकर बीजेपी-कांग्रेस नेता भी लामबंद हो रहे हैं लेकिन विभाग अपने इस सिपाही के पीछे मजबूती से खड़ा है. आबकारी विभाग का कहना है कि सारी शिकायतें निराधार हैं हालांकि स्थानीय निवासी भी हार मानने को तैयार नहीं हैं.

छापे से पहले लीक हो जाती है सूचना

कोटद्वार में 2014 से तैनात आबकारी विभाग के एक सिपाही के ख़िलाफ़ एक से ज़्यादा बार शिकायत हो चुकी है कि वह अवैध शराब का कारोबार करने वालों से मिला हुआ है. लेकिन आबकारी विभाग के अधिकारियों को कई बार, कई स्तर पर शिकायत किए जाने के बावजूद इस सिपाही के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं हुई.

ताज़ा शिकायत दुर्गापुरी इलाके के रहने वाले एक्स सर्विसमैन सुरेंद्र ध्यानी ने की थी. ध्यानी कहते हैं कि अवैध शराब की बिक्री के ख़िलाफ़ उन्होंने कई बार आबकारी विभाग से शिकायत की है. दिखाने को विभाग छापेमारी भी करता है लेकिन छापा पड़ने से पहले ही अवैध शराब बेचने वालों को सूचना मिल जाती है. वह पूछते हैं कि क्या आबकारी सिपाही की मिलीभगत के बिना यह संभव है?

बीजेपी-कांग्रेस दोनों कर रहे शिकायत

कमाल की बात यह है कि नगर-निगम से लेकर प्रदेश सरकार तक हर मामले में एक-दूसरे का विरोध करने वाले भाजपा और कांग्रेस नेता भी इस मामले में एकमत नज़र आ रहे हैं. भाजपा पार्षद सौरभ नौटियाल जिला आबकारी अधिकारी को लिखित शिकायत कर वार्ड में अवैध शराब की बिक्री पर रोक लगाने की मांग कर चुके हैं.

भाजपा पार्षद ने ज़िला आबकारी अधिकारी को की शिकायत में अवैध शराब बेचने वालों से आबकारी के सिपाहियों की संलिप्तता का आरोप लगाया है और लंबे समय से कोटद्वार में टिके सिपाहियों को हटाने की मांग की है.

यूथ कांग्रेस नेता प्रवेश रावत कहते हैं, "आबकारी विभाग के अधिकारी शराब माफियाओं से हर महीने रिश्वत लेते हैं और उनके सिपाही भी अवैध शराब बेचने वालों से अच्छे खासे पैसे लेते है. इन्हीं की शह में खुलेआम जगह-जगह अवैध शराब बिक रही है."

प्रवेश रावत कहते हैं, "कई सिपाही हैं जो लंबे समय से कोटद्वार में तैनात हैं. ऐसे सिपाहियों की शराब माफियाओं से लेकर हर छोटे बड़े शराब बेचने वालों से सेंटिंग बनी हुई है. सिपाहियों की मिलीभगत का नतीजा है कि आबकारी इंस्पेक्टर जब भी छापेमारी की योजना बनाते हैं तो उससे पहले ही इसकी सूचना अवैध शराब बेचने वालों को मिल जाती है."

निराधार हैं शिकायतें

स्थानीय नागरियों के साथ ही बीजेपी-कांग्रेस नेताओं की शिकायतों को आबकारी विभाग निराधार मानता है. ज़िला आबकारी अधिकारी राजेंद्र लाल शाह मानते हैं कि कोटद्वार में एक सिपाही के ख़िलाफ़ उनके पास शिकायतें आई हैं. वह यह भी कहते हैं कि इन शिकायतों के बाद उन्होंने एक विभागीय जांच भी करवाई थी लेकिन सभी शिकायतें निराधार निकलीं.

सालों से एक ही जगह तैनाती के सवाल पर शाह कहते हैं कि 2014 बैच के किसी भी सिपाही का ट्रांस्फ़र नहीं हुआ है और सभी वहीं तैनात हैं. न्यूज़ 18 से बात करते हुए शाह ने यह भी माना कि कोटद्वार में तैनात 5 सिपाहियों में से सिर्फ़ एक ही ख़िलाफ़ आ रही हैं.

वह कहते हैं कि कोटद्वार के आबकारी इंस्पेक्टर के अनुसार कोई व्यक्ति बहुत समय से इस आबकारी सिपाही के ख़िलाफ़ अभियान चला रहा है. शाह कहते हैं कि सिर्फ़ आबकारी विभाग ही नहीं उन्होंने पुलिस और राजस्व विभाग के अधिकारियों से भी बात की थी लेकिन आरोपों की पुष्टि नहीं हो पाई. इसलिए किसी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की गई.

जंग अभी जारी है...

हालांकि स्थानीय निवासी और नेता इस बात को स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं. कांग्रेस नेता प्रवेश रावत कहते हैं कि वह जल्द ही मुख्यमंत्री को ज्ञापन देकर आबकारी विभाग की मनमानियों पर लगाम लगाने की मांग करेंगे और वहां से भी कोई कार्रवाई नहीं होती तो ज़मीन पर विरोध प्रदर्शन करेंगे.

पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था में शराब से मिलने वाले पैसे पर सरकार की निर्भरता इतनी अधिक है कि कभी वह शराब कारोबारियों के आगे झुकती दिखती है तो कभी आबकारी विभाग के अधिकारियों के आगे बेबस. कोटद्वार में आबकारी विभाग के एक सिपाही के आगे सिस्टम पानी भरता दिख रहा है.

19 से 22 नवंबर तक देश भर से 50 टीमें नयार वैली एडवेंचर फेस्टिवल में करेंगी मुकाबला

त्रिवेंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 13 डिस्ट्रिक्ट, 13 डेस्टिनेशन योजना में पौड़ी में सतपुली को ही नया टूरिस्ट डेस्टिनेशन विकसित करने के लिए चुना गया है.

मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र सतपुली को इस एडवेंचर फ़ेस्टिवल से नई पहचान मिलने की आशा

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देहरादून. मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के गृहक्षेत्र सतपुली में अगले महीने एडवेंचर फ़ेस्टिवल होने जा रहा है. सतपुली में नयार नदी संगम के साथ ही बिलखेत में भी चार दिन का एडवेंचर फ़ेस्टिवल होने नाज रहा है. बता दें कि त्रिवेंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 13 डिस्ट्रिक्ट, 13 डेस्टिनेशन योजना में पौड़ी में सतपुली को ही नया टूरिस्ट डेस्टिनेशन विकसित करने के लिए चुना गया है. नयार वैली एडवेंचर फेस्टिवल के आयोजन को इसे पहचान देने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है.

पूर्वी नयार और पश्चिमी नयार का संगम है यहां 

कोरोना के चलते साल 2020 में प्रस्तावित एडवेंचर समिट आयोजित नहीं हो सकी. इसका मकसद राज्य में एडवेंचर टूरिज्म को बढ़ावा देना था. सरकार समिट के ज़रिए देश भर में यह संदेश देना चाह रही थी कि उत्तराखंड में एडवेंचर टूरिज्म की पर्याप्त संभावनाएं हैं. अब यही संदेश सरकार अगले महीने आयोजित होने जा रहे एडवेंचर फेस्टिवल से देने की कोशिश है.

19 से 22 नवंबर तक पौड़ी ज़िले के सतपुली और बिलखेत में नयार वैली एडवेंचर फेस्टिवल का आयोजन होगा. सतपुली में पूर्वी नयार और पश्चिमी नयार नदियों का संगम होता है और यह पौड़ी का अच्छा ख़ासा मार्केट भी है. 13 डिस्ट्रिक्ट 13 डेस्टिनेशन के तहत इसके डेवलपमेन्ट को लेकर काम भी चल रहा है. एडवेंचर फ़ेस्टिवल इसे पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण साबित ह सकता है.

देशभर से करीब 50 टीमें होंगी शामिल

19 नवंबर से होने वाले एडवेंचर फेस्टिवल में देश भर से करीब 50 टीमें पहुंचेंगी, जो यहां अलग-अलग एडवेंचर एक्टिविटीज़ में शामिल होंगी. इसमें पैरा ग्लाइडिंग, ट्रैकिंग, राफ्टिंग, क्याकिंग जैसे इवेंट्स होंगे. उत्तराखंड में पहली बार इस तरह का एडवेंचर फेस्टिवल आयोजित किया जा रहा है.

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का कहना है कि इस फेस्टिवल के आयोजन की ज़िम्मेदारी डीएम पौड़ी को सौंपी गई है और उन्हें इसकी तैयारी के निर्देश दिए गए हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि फ़ेस्टिवल में देश भर से करीब 50 टीमें शामिल होंगी.
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