उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में मौसम चक्र में भारी बदलाव, गर्मी में लोग झेल रहे हैं ठंड

उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में बारिश के बाद ठंड होने लगी है.

उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में बारिश के बाद ठंड होने लगी है.

उत्तराखंड (Uttarakhand) के पहाड़ी इलाकों में मौसम (Weather) चक्र एकदम से बदल गया है. मई में गर्मी का मौसम होता है, लेकिन लोग यहां ठंडी (Cold) झेल रहे हैं.

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पिथौरागढ़. उत्तराखंड (Uttarakhand) के पहाड़ी इलाकों में इस साल मौसम (Weather) में भारी बदलाव देखने को मिल रहा है. आलम ये है कि जाड़ों में जहां बारिश सिरे से नदारद रही, वहीं गर्मियों में बारिश के साथ ही बादल फटने की घटनाएं भी समय से पहले हो रही हैं. मौसम चक्र में आया ये बदलाव खेती और बागवानी के  सामने भारी संकट खड़ा कर रहा है. पहाड़ में मौसम के मिजाज में इस बार जो बदलाव दिख रहा है, ऐसा शायद ही कभी दिखा हो.

सर्दियों के सीजन में जहां बारिश और बर्फबारी आधे से भी कम हुई थी, वहीं अब गर्मियों में सर्दियों जैसा मौसम आ गया है. हालात ये हैं कि आए दिन जमकर बारिश हो रही है और ओलावृष्टि ने भी तांडव मचाया है. यही नहीं इस साल मई के शुरुआत में ही बादल फटने जैसी घटनाएं भी हो रही हैं. आमतौर में पहाड़ों में बादल फटने की घटनाएं जून के दूसरे पखवाड़े के बाद हुआ करती थीं.

विवेकानंद कृषि अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. जेएस बिष्ट, वैज्ञानिक का कहना है कि पहाड़ के मौसम में ऐसा बदलाव दशकों बाद देखने को मिल रहा है. साथ ही बिष्ट कहते हैं कि इसका सबसे अधिक नुकसान खेती और बागवानी को हो रहा है. अब जरूरत है कि मौसम चक्र में आए बदलाव की बारीक स्टडी की जाए.

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मई के पहले हफ्ते में कई जगहों में बादल फटा

मई के पहले हफ्ते में ही इस बार रुद्रप्रयाग, चमोली, टिहरी और अल्मोड़ा में बादल फटने की घटनाएं हो चुकी हैं. यही नहीं पहाड़ों में हफ्ते भर से सर्दियों जैसा मौसम बना हुआ है. मौसम चक्र में आए इस बदलाव का खेती के साथ ही बागवानी पर भी सीधा असर पड़ रहा है. आलम ये है कि गेहूं की फसल जहां पूरी तरह चौपट हो गई है, वहीं फलों की बोर भी ओलावृष्टि की भेंट चढ़ गई है.

मौसम चक्र में आए बदलाव की स्टडी है जरूरी




जानकार भी इस वर्ष मौसमी चक्र में हो रहे बदलावों से हैरान हैं. ऐसे में अब जरूरत है जलवायु परिवर्तन पर गहराई से स्टडी की. बारीक स्टडी के जरिए ही खेती और बागवानी का नया सेड्यूल भी तैयार किया जा सकेगा. साथ ही प्रशासनिक तंत्र भी बेमौसम आ रही आपदाओं से निपटने के लिए खुद को अलर्ट रख पाएगा.

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