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स्थाई राजधानी को लेकर उत्तराखंड में गरमाई सियासत

स्थाई राजधानी को लेकर उत्तराखंड में गरमाई सियासत

उत्तराखंड के देहरादून में राज्य के स्थाई राजधानी के मुद्दें को लेकर लम्बे समस से सियासत हो रही है. चाहे भाजपा हो या फिर चाहे कांग्रेस दोनों ही दलों को जनता ने कुर्सी सौंपी हैं.

उत्तराखंड के देहरादून में राज्य के स्थाई राजधानी के मुद्दें को लेकर लम्बे समस से सियासत हो रही है. चाहे भाजपा हो या फिर चाहे कांग्रेस दोनों ही दलों को जनता ने कुर्सी सौंपी हैं.

उत्तराखंड के देहरादून में राज्य के स्थाई राजधानी के मुद्दें को लेकर लम्बे समस से सियासत हो रही है. चाहे भाजपा हो या फिर चाहे कांग्रेस दोनों ही दलों को जनता ने कुर्सी सौंपी हैं.

    उत्तराखंड के देहरादून में राज्य के स्थाई राजधानी के मुद्दें को लेकर लम्बे समस से सियासत हो रही है. चाहे भाजपा हो या फिर चाहे कांग्रेस दोनों ही दलों को जनता ने कुर्सी सौंपी हैं.

    मगर अभी किसी स्थाई राजधानी के मसले पर कोई भी राजनीकित दल किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सका है. बताया जा रहा है कि भाजापा में स्थाई राजधानी के मुद्दें पर आम सहमति नहीं बन पा रही है क्योकिं गैरसैण को क्षेत्रीय दलों ने स्थाई राजधानी बनाने की तब पहल की थी जब उत्तराखंड का गठन नहीं हुआ था.

    मगर जब राज्य का गठन हुआ तो क्षेत्रीय दलों को सत्ता का लाभ मिल तो गया मगर वे स्थाई राजधानी के मुद्दें पर कुछ खोलकर नहीं बोल सके. वे सत्ता का बारी बारी से सुख भोगते रहे मगर इस दिशा में कोई पहल नहीं की.

    इसकी वजह से 15 सालों से स्थाई राजधानी का मुद्दा आज भी उलझा हुआ है.बताया जा रहा है कि प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए एक राजधानी बनाने के बारे में आम सहमति नहीं बन पा रहा है क्योकिं कई दलों का यह मानना है कि प्रदेश की स्थाई राजधानी पर्वतीय क्षेत्रों में होनी चाहिए लेकिन कई ऐसे भी दल है मैदानी क्षेत्रों में ही राजधानी बनाने की वकालत कर रहे है.

    क्योंकि पर्वतीय क्षेत्रों में राजधानी को विकसित करने के बारे में कई मानकों को पूरा कर पाना भी काफी मुश्किल है. वहां सड़कों का निर्माण, रेल मार्ग की आवस्थापना का विकास, हवाई सेवा के लिए एअर पोर्ट को विकसति करने काफी मुश्किल है.

    दूसरी सबसे महत्वपूर्ण बात यह भी है देहरादून को 15 सालों से राजधानी के तौर पर विकसित किया जा रहा है. जहां बड़े पैमाने पर सरकारी भवनों का निर्माण किया जा चुका है. या फिर नए भवनों का निर्माण किया जा रहा है.

    इतना ही नहीं सड़कों का विकास भी राजधानी के मानकों के आधार पर किया जा रहा है. ऐसे में नई राजधानी को विकसित करना राज्य के लिए काफी मुश्किल काम है क्योंकि राज्य के ससांधनों को देखते हुए राजधानी का विकास करना बड़ा काम है.

    वहीं कांग्रेस पार्टी का कहना है कि अगर भाजपा स्थाई राजधानी के मुद्दें पर इतना ही गंभीर है तो उसे सदन में स्थाई राजधानी का प्रस्ताव लाना चाहिए सिर्फ बयानबाजी तक सीमित नहीं रहना चाहिए. फिलहाल देखना होगा कि स्थाई राजधानी के मसले पर आखिर कब कोई ठोस पहल होती है.

    Tags: Harish rawat

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