पिथौरागढ़: अपनी जान खतरे में डालकर इन स्कूलों में पढ़ रहे नौनिहाल

पिथौरागढ़ (Pithoragarh) जिले में 22 प्राथमिक विद्यालय ऐसे हैं, जो कभी भी जमींदोंज हो सकते हैं. इन स्कूलों (Schools) में 523 बच्चे पढ़ते हैं. शिक्षा विभाग ने ये कहकर मामले से पल्ला झाड़ लिया कि इसकी रिपोर्ट उत्तराखंड राज्य सरकार (Uttarakhand Government) को भेजी जा चुकी है.

Vijay Vardhan | News18 Uttarakhand
Updated: August 13, 2019, 7:20 PM IST
पिथौरागढ़: अपनी जान खतरे में डालकर इन स्कूलों में पढ़ रहे नौनिहाल
सरकारी रिकार्ड में खतरनाक दर्ज हैं ये स्कूल
Vijay Vardhan | News18 Uttarakhand
Updated: August 13, 2019, 7:20 PM IST
प्राथमिक शिक्षा की दशा सुधारने के  लिए भले ही प्रशासन लाख दावे करे लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और ही है. उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में 22 प्राथमिक विद्यालय ऐसे हैं, जो कभी भी जमींदोंज हो सकते हैं, ऐसे में यहां पढ़ने वाले 523 बच्चों पर मंडराते खतरे के बावजूद शिक्षा विभाग इन स्कूलों को चला रहा है. शिक्षा विभाग के अफसरों का कहना है कि इसकी रिपोर्ट राज्य शासन को भेजी जा चुकी है. अब स्कूलों की दशा सुधारने पर राज्य सरकार को फैसला करना है.

जान खतरे में डालकर पढ़ रहे 523 नौनिहाल
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 22 खतरनाक घोषित हो चुके इन स्कूलों में 523 छात्र-छात्राएं अपनी जिदंगी खतरे में डाल पढ़ाई को मजबूर हैं. गंगोलीहाट विकासखंड में सबसे अधिक 8 स्कूल खतरे की जद में हैं, जबकि मुनस्यारी में 7, धारचूला में 4 और कलानीछीना, डीडीहाट, मूनाकोट ब्लॉक में एक-एक स्कूल अतिसंवेदनशील स्थिति में है. जिन विकासखंडों में जीर्ण-शीर्ण स्कूल हैं वे सभी प्राकृतिक तौर पर अतिसंवेदनशील क्षेत्र माने जाते हैं, इसके बाद भी विभाग इन्हें ठीक कराने की जहमत नही उठा रहा है.

School - कभी भी ज़मींदोज हो सकते हैं ये स्कूल
कभी भी ज़मींदोज हो सकते हैं ये स्कूल


इस साल बंद हुए 22 सरकारी स्कूल
आमतौर में खतरनाक हो चुके स्कूलों में शिक्षक छात्रों को खुले में पढ़ाते हैं, लेकिन तेज धूप और बरसात के दिनों में शिक्षकों के पास भी कोई विकल्प नही रहता. जिले में बीते सालों में विभाग की हीला-हवाली के चलते लोगों का सरकारी शिक्षा से मोहभंग भी हुआ है. पिछले 10 सालों में 101 प्राथमिक विद्यालय शून्य छात्र संख्या के चलते बंद हो गए हैं, जिनमे से 22 विद्यालय इसी साल बंद हुए हैं.

राज्य सरकार को रिपोर्ट भेज चुका है शिक्षा विभाग
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मुख्य शिक्षा अधिकारी अशोक कुमार जुकरिया का कहना है कि विभाग ने जीर्ण-शीर्ण विद्यालयों की सूची शासन को भेज दी है, अब धनराशि मिलने के बाद ही विद्यालयों की मरम्मत और पुनर्निर्माण का कार्य शुरू किया जाएगा. इस पर सामाजिक कार्यकर्ता गोविंद कफलिया का आरोप है कि सरकार जानबूझ कर शिक्षा व्यवस्था को पटरी से उतार रही है ताकि प्राइवेट स्कूल फल-फूल सकें.

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First published: August 13, 2019, 7:10 PM IST
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