नेपाली FM रेडियो में बजते हैं भारत विरोधी गाने, सुनकर आहत हो रहे बॉर्डर पर रहने वाले भारतीय  
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नेपाली FM रेडियो में बजते हैं भारत विरोधी गाने, सुनकर आहत हो रहे बॉर्डर पर रहने वाले भारतीय  
नेपाली एफएम रेडियो में इनदिनों भारत विरोधी गाने व समाचार प्रसारित किये जा रहे हैं.

नेपाली एफएम रेडियो (Nepali FM radio) में इन दिनों लिपुलेख, लिम्पियाधूरा और कालापानी पर दावा जताते हुए भारत विरोधी गाने और समाचार पेश किए जा रहे हैं.

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पिथौरागढ़. सीमा विवाद (Border Dispute) खड़ा कर नेपाल (Nepal) ने भारत (India) से दूरी तो बना ली है, लेकिन अब नेपाल अन्य जरियों से भी भारत विरोधी रूख तेज किए हुए है. खासकर बॉर्डर इलाकों में नेपाली एफएम रेडियो (Nepali FM radio) भारतीयों की भावनाओं को लगातार आहत कर रहे हैं. उत्तराखंड का बॉर्डर डिस्ट्रिक्ट पिथौरागढ़ का अधिकांश हिस्सा नेपाल से लगा हुआ है. ऐसे में यहां के लोगों को नेपाली एफएम रेडियो में आए दिन भारत विरोधी समाचार और गाने सुनने को मिल रहे हैं. दरअसल नेपाली रेडियो के प्रसारणों में लिपुलेख, लिम्पियाधूरा और कालापानी पर दावा जताते हुए भारत विरोधी गाने और समाचार पेश किए जा रहे हैं.

नेपाल के दार्चुला और बैतड़ी जिले से सटा है पिथौरागढ़

असल में पिथौरागढ़ जिले से नेपाल के दार्चुला और बैतड़ी जिले मिलते हैं. फिलहाल दार्चुला जिले में आठ एफएम रेडियो संचालित हो रहे हैं, जबकि बैतड़ी से चार. ये एफएम रेडियो 10 से 18 घंटे तक संचालित होते हैं. सूचना, समाचार और मनोरंजन पर आधारित सभी एफएम रेडियो में हर घंटे 5 से 10 मिनट के बीच न्यूज बुलेटिन प्रसारित किए जाते हैं. जबकि अधिकांश समय मनोरंजन के कार्यक्रमों प्रसारित होते हैं.



भारत विरोधी गानों व समाचारों का प्रसारण 
लेकिन बीते कुछ दिनों से इन एफएम रेडियो में भारत विरोधी गानों की बाढ़ सी आ गई है. आए दिन लिम्पियाधूरा, लिपुलेख और कालापानी पर हक जताने वाले गाने प्रसारित हो रहे हैं. साथ ही इन गानों में लिम्पियाधूरा की तुलना भारत के कश्मीर से की जा रही है. नेपाली गाने के माध्यम से कहा जा रहा है कि जिस प्रकार भारत को कश्मीर प्यारा है, ठीक उसी तरह नेपाल के लिए लिम्पियाधूरा मायने रखता है. यही नही गानोंं के जरिए तो ये भी कहा जा रहा है कि नेपाल ने अंग्रेज तक को मार भगाया था तो भारत क्या है? गानों के जरिए जहां नेपाल राष्ट्रवाद की भावनाओं को भड़काने की कोशिश में है, वही भारत से दादागिरी छोड़ने को कह रहा है.

भारतीयों ने बंद किया नेपाली रेडिया सुनना 

असल में पिथौरागढ़ जिले के बॉर्डर इलाकों में आज भी अधिकांश भारतीय मनोरंजन के लिए नेपाली एमएम सुनते हैं. भारतीय इलाकों में न तो अपना इंटरनेट है और न ही कोई एफएम स्टेशन.

धारचूला में रहने वाले हरीश सिंंह का कहना है कि जब से नेपाली एफएम में भारत विरोधी गाने बज रहे हैं. उन्होनें नेपाली एफएम सुनना पूरी तरह बंद कर दिया है.

डोडा निवासी भगवान मेहता कहते हैं कि मनोरंजन के लिए वे सालों से नेपाली एफएम रेडियो सुनते आ रहे हैं. लेकिन बीते कुछ दिनों से भारत विरोधी गानों की एफएम में बाढ़ सी आ गई है. जिससे उनकी भावनाएं आहत होती हैं. अगर ऐसा ही रहा, तो वे भी नेपाली एफएम से दूरी बना लेंगे.

पिथौरागढ़ के कारोबारी देते हैं विज्ञापन 

नेपाली एफएम भले भी पूरी तरह भारत विरोध रूख अख्तियार किए हुए हो., बावजूद इसके इनमें अधिकांश विज्ञापन पिथौरागढ़ के कारोबारियों के ही आते हैं. असल में नेपाल के दार्चुला और बैतड़ी जिले के लोग पिथौरागढ़ से भारी मात्रा में खरीदारी करते हैं, जिन्हें लुभाने के लिए यहां के कारोबारी नेपाली एफएम रेडियो को अच्छा खासा विज्ञापन देते हैं.

 

 
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