लाइव टीवी

पिथौरागढ़ में भाई-बहन के प्रेम के प्रतीक चेतौला पर्व की धूम

Vijay Vardhan | News18 Uttarakhand
Updated: April 1, 2018, 1:58 PM IST
पिथौरागढ़ में भाई-बहन के प्रेम के प्रतीक चेतौला पर्व की धूम
पिथौरागढ़ में चेतौल पर्व की धूम.

उत्तराखंड में चैत के महीने अपनी बहनों को भिटौली यानी भेंट देने की परम्परा सदियों से चली आ रही है. भिटौली की इसी परम्परा को पिथौरागढ़ में चेतौल पर्व के रूप में मनाया जाता है.

  • Share this:
पिथौरागढ़ में इन दिनों चेतौल पर्व की धूम मची हुई है. सदियों से मनाया जाने वाला ये पर्व भगवान शिव के प्रति आस्था के साथ भाई-बहन के अटूट प्रेम का भी प्रतीक है. आस्था और प्रेम के इस पर्व को लेकर आज भी यहां के लोगों में खासा उत्साह देखने को मिलता है. उत्तराखंड में चैत के महीने अपनी बहनों को भिटौली यानी भेंट देने की परम्परा सदियों से चली आ रही है.

भिटौली की इसी परम्परा को पिथौरागढ़ में चेतौल पर्व के रूप में मनाया जाता है. लोगों का विश्वास है कि इंसानों की तर्ज पर भगवान शिव भी इन दिनों हिमालय से नीचे उतर आते हैं.  मान्यता है कि डोले में विराजमान भगवान भोले सोरघाटी के 22 गांवों में रहने वाली अपनी बहनों को बारी-बारी से उनके गांव जाकर भिटौली देते हैं.

ये पर्व एक ओर जहां आस्था और प्रेम को दर्शाता है, वहीं इसमें शिरकत करने वालों का जोश भी देखते ही बनता है. आस्था के इस पर्व का खास आकर्षण है, भगवान भोले का डोला. जिसे कंधा देने के लिए भक्तों में होड़ मची रहती है. पूरे 4 दिनों तक 22 गांवों में होने वाले इस पर्व को देखने के लिए लोग आज भी दूर-दूर से आते हैं.

दुनिया भले ही तेजी से बदल रही हो, लेकिन पहाड़ के लोगों का अपनी संस्कृति के प्रति ये लगाव, इस बात को साबित करता है कि आधुनिकता के दौर में भी यहां के लोग अपनी जड़ों से जुड़े हैं. शायद यही वजह है कि पहाडों में आज भी सदियों पुरानी परम्पराएं बदस्तूर जिंदा हैं.

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए पिथौरागढ़ से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: April 1, 2018, 1:58 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर