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पिथौरागढ़: कोरोना के कारण पहली बार नहीं हो पाया सोर घाटी का ऐतिहासिक पर्व चेतौल
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Updated: April 9, 2020, 7:07 PM IST
पिथौरागढ़: कोरोना के कारण पहली बार नहीं हो पाया सोर घाटी का ऐतिहासिक पर्व चेतौल
कोरोना के कारण पहली बार नहीं हो पाया सोर घाटी का ऐतिहासिक पर्व चेतौल (फाइल फोटो)

इस खास पर्व को यहां के लोग खासे उत्साह के साथ मनाते हैं. पूरे हफ्ते भगवान शिव का डोला 22 गांवों में जाता है. पर्व में शिरकत करने के लिए देश-दुनिया में मौजूद प्रवासी भी हर हाल में पहुंचते हैं.

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पिथौरागढ़. कोरोना वायरस (COVID-19) की दहशत से पूरी दुनिया घरों में कैद हो गई है. दुनिया के अधिकांश मुल्कों ने इससे बचने के लिए लॉकडाउन का सहारा लिया है. ऐसे में तमाम धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन भी रद्द हो चुके हैं. लेकिन इनमें कुछ आयोजन ऐसे भी हैं, जो पहली बार नहीं हो पा रहे हैं. चीन (China) और नेपाल बॉर्डर से सटे पिथौरागढ़ शहर और उससे सटे 22 गांवों का चेतौल पर्व भी सदियों के इतिहास में पहली बार नहीं हो पाया.

असल में हिमालय की तलहटी में बसे इस शहर के लोग भगवान शिव को पूजते हैं. ऐसे में यहां के अधिकांश लोकपर्व भगवान शिव पर ही केंद्रित हैं. चेतौल पर्व भी भगवान शिव और उनकी 22 गांवों में रहने वाली बहनों पर ही केंद्रित है. स्थानीय संस्कृति के जानकार और सीनियर जर्नलिस्ट प्रेम पुनेठा का कहना है कि सोर घाटी पिथौरागढ़ सहित पूरे कुमाऊं रीजन में इस महीने को भाई-बहन की भेंट यानी मुलाकात के रूप में मनाया जाता है. इसी तर्ज पर सोर घाटी में ये मान्यता है कि भगवान शिव की 22 बहनें यहां रहती हैं और इस महीने वो अपनी सभी बहनों से मिलने जाते हैं.

22 गांवों में जाता है शिव का डोला



इस खास पर्व को यहां के लोग खासे उत्साह के साथ मानते हैं. पूरे हफ्ते भर तक भगवान शिव का डोला 22 गांवों में जाता है. पर्व में शिरकत करने के लिए देश-दुनिया में मौजूद प्रवासी भी हर हाल में पहुंचते हैं. लेकिन ऐसा पहली बार हुआ है, जब इस ऐतिहासिक पर्व का आयोजन नहीं हो पाया. कोरोना संक्रमण के कारण इस बार चेतौल पर्व का आयोजन मात्र औपचारिकता भर रहा. पिथौरागढ़ के मूल निवासी रिशेंद्र सिंह का कहना है वो बचपन से ही चेतौल में शिरकत करते आए हैं. दिल्ली में जॉब करते हुए उन्हें 18 साल गुजर गए, बावजूद इसके वो साल पर्व में शामिल होने घर जाते थे. लेकिन इस बार कोरोना ने उनके सबसे प्रिय लोकपर्व को नही होने दिया, जिसका उन्हें खासा मलाल है.



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First published: April 9, 2020, 6:27 PM IST
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