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चाइना बॉर्डर को जोड़ने वाली रोड 115 दिनों बाद खुल सकी, प्रशासन ने कहा देर के लिए BRO ज़िम्मेदार

करीब चार महीने बाद चालू हुई बॉर्डर जोड़ने वाली रोड.

करीब चार महीने बाद चालू हुई बॉर्डर जोड़ने वाली रोड.

उत्तराखंड में इस साल वर्षाजनित दुर्घटनाओं के चलते सीमांत इलाके संपर्क से कटे रहे. इस रोड के खुलने से बॉर्डर के 50 गांव दुनिया से जुड़ गए हैं. यह ऐतिहासिक घटना है क्योंकि इतने लंबे समय तक पहले कभी सड़क बंद नहीं रही.

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पिथौरागढ़. चाइना बॉर्डर से सटी दारमा घाटी 115 दिनों के लंबे इंतज़ार के बाद शेष दुनिया से जुड़ गई. इस साल बरसात के मौसम में दारमा घाटी को जोड़ने वाली सड़क जगह-जगह ज़मींदोंज़ हो गई थी. यहां भूस्खलन और बोल्डर आने का सिलसिला इस तरह का बना रहा कि यहां मशीनों का पहुंचना और राहत कार्य करवाया जाना मुहाल हो गया था. इस सड़क को बॉर्डर की लाइफलाइन कहा जाता है क्योंकि यह सामरिक और सीमाई दृष्टि से सैन्य बलों के लिए भी काफी महत्वपूर्ण मार्ग है. बॉर्डर रोड ऑर्गनाइज़ेशन और लोक निर्माण विभाग के प्रयासों से इस सड़क के खुलने से अब हज़ारों लोगों की ज़िंदगी तो पटरी पर लौटी है, सुरक्षा बलों को भी खासी राहत मिली है.

जून के पहले पखवाड़े में आई आसमानी आफत ने बॉर्डर की लाइफलाइन को कई जगह से तोड़ दिया था. दारमा और चौदांस घाटी के 50 गांव 15 जून से पूरी तरह कैद हो गए थे. हालात ये कि तवाघाट से आगे 70 किलोमीटर की रोड का नामोनिशान तक नहीं था. अब करीब चार महीनों के बाद बॉर्डर की घाटी में आवाजाही बहाल हो गई. एडीएम फिंचाराम ने बताया कि बीआरओ की धीमी चाल के कारण रोड खोलने में खासा वक्त लग गया.

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इतिहास में यह पहली बार हुआ जब दारमा घाटी को जोड़ने वाली मुख्य सड़क तीन महीने से ज़्यादा समय तक बंद रही.

अब माइग्रेशन में मिलेगी मदद
बॉर्डर की लाइफलाइन खुलने से अब लोगों को रोज़मर्रा की चीज़ों के लिए नहीं जूझना पड़ेगा. यही नहीं, चाइना सीमा पर तैनात सुरक्षा बलों की भी आवाजाही आसान हो सकेगी. ये पहला मौका है, जब सामरिक नज़रिये से अहम रोड 3 महीने से भी अधिक वक्त तक बंद रही. उच्च हिमालयी इलाकों में अब माइग्रेशन पीरियड शुरू होने वाला है. ऐसे में हज़ारों की आबादी के लिए रोड का खुलना किसी वरदान से कम नहीं है.

स्थानीय निवासी शालू दताल कहते हैं कि रोड बंद रहने से लोगों को जो दिक्कतें हुईं, उन्हें शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता. लेकिन माइग्रेशन का दौर शुरू होने से पहले रोड खुलना राहत की बात है. इस साल की बरसात ने पिथौरागढ़ के बॉर्डर इलाकों में भारी तबाही मचाई इसलिए दारमा के साथ ही व्यास घाटी को जोड़ने वाली रोड भी लम्बे समय तक बंद रही. अब बरसात थमने के बाद बॉर्डर की अहम सड़कें खुलने का सिलसिला शुरू हो चुका है.

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