Covid-19: दिल्ली-NCR में ऑक्सीजन और बेड न मिलने पर उत्तराखंड का रुख कर रहे कोरोना संक्रमित

पहाड़ी राज्य में अब एक्टिव केस की संख्या 51127 हो गई है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

पहाड़ी राज्य में अब एक्टिव केस की संख्या 51127 हो गई है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

हॉस्पिटल अथॉरिटी (Hospital Authority) ने बताया कि ऑनलाइन सर्च कर राकेश शर्मा के परिवार ने हॉस्पिटल में बात की और ऑक्सिजन बेड की उपलब्धता का पता चलने पर वह अपने मरीज को चंपावत लेकर आए.

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पिथौरागढ़. मेडिकल सुविधाओं के अभाव में उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों से लोग दिल्ली और दूसरे महानगरों को जाते रहे हैं. लेकिन, कोरोना महामारी का कहर ऐसा है कि पहली बार गंगा उल्टी बहती नजर आ रही है. हालात ये हैं कि हॉस्पिटल और बेड (Hospital And Bed) की तलाश में लोग दिल्ली से उत्तराखंड के दूर-दराज के इलाकों में पहुंच रहे हैं. दिल्ली के मुखर्जी नगर में रहने वाले राकेश शर्मा की पत्नी रीता शर्मा (Rita Sharma) को जब दिल्ली और उसके आस-पास तमाम कोशिशों के बावजूद किसी भी हॉस्पिटल में ऑक्सिजन बेड नहीं मिल पाया तो वह उत्तराखंड के चंपावत में एक प्राइवेट हॉस्पिटल पहुंचे. हालांकि, यहां पहुंचने तक रीता शर्मा की हालत इतनी बिगड़ गई कि वेंटिलेटर पर रखने के कुछ घंटे बाद उन्होंने दम तोड़ दिया. हॉस्पिटल अथॉरिटी के मुताबिक, 56 साल की रीता शर्मा को बुधवार देर रात हॉस्पिटल लाया गया. उनका ऑक्सिजन स्तर लगातार गिर रहा था. वेंटिलेटर में रखने के बाद भी उनकी हालत में कुछ सुधार नहीं हुआ और उन्होनें दम तोड़ दिया.

हॉस्पिटल अथॉरिटी ने बताया कि ऑनलाइन सर्च कर राकेश शर्मा के परिवार ने हॉस्पिटल में बात की और ऑक्सिजन बेड की उपलब्धता का पता चलने पर वह मरीज को चंपावत लेकर आए. दिल्ली-एनसीआर से लगातार हॉस्पिटल में ऑक्सिजन बेड की उपलब्धता की जानकारी लेने को फोन आ रहे हैं. सामान्य स्थिति में उत्तराखंड के पिथौरागढ़, चंपावत जैसे दूर के इलाकों से गंभीर मरीज को दिल्ली या देहरादून रेफर किया जाता रहा है. मेडिकल सुविधाओं की कमी को लेकर लोग सड़कों पर भी उतरते रहे हैं और पहाड़ों से पलायन की एक बड़ी वजह यह भी है. लेकिन कोरोना के कहर में दिल्ली-एनसीआर में जिस तरह हाहाकार मचा है उसमें पहाड़ों की ये मेडिकल सुविधाएं भी उम्मीद की किरण की तरह लग रही हैं. हालांकि, उत्तराखंड में भी कोरोना के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं. शनिवार को उत्तराखंड में कोरोना के 5493  नए मामले आए हैं. पहाड़ी राज्य में अब एक्टिव केस की संख्या 51127 हो गई है और अब तक कोरोना से 2731 लोगों की मौत हो गई है.

इससे पहले कोरोना संक्रमित यूपी के पूर्व स्पेशल डीजी होशियार सिंह बलवारिया को भी बेहतर इलाज के लिए नोएडा से  उत्तराखंड के काशीपुर लाया गया. हालांकि, इलाज के दौरान उनकी भी मौत हो गई थी. उत्तराखंड में फिलहाल देश के उन राज्यों में है, जहां सबसे तेजी से कोरोना के मामले बढ़े हैं. जनसंख्या की तुलना में उत्तराखंड से आगे केरल, महाराष्ट्र और कर्नाटक हैं.
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