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कोरोना की तीसरी लहर से निपटने की ये कैसी तैयारी, पिथौरागढ़ का स्वास्थ्य विभाग भगवान भरोसे!

कोरोना की तीसरी लहर से निपटने की ये कैसी तैयारी, पिथौरागढ़ का स्वास्थ्य विभाग भगवान भरोसे!

पिथौरागढ़

पिथौरागढ़ में फिर कोरोना के मामले सामने आ रहे हैं. (सांकेतिक तस्वीर)

कोरोना की तीसरी लहर को बच्चों के लिए घातक बताया जा रहा है, इसके बावजूद सीमांत जनपद में बाल रोग विशेषज्ञों की भारी कमी है.

    उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में एक बार फिर कोरोनावायरस (Coronavirus Cases in Pithoragarh) के मामले सामने आ रहे हैं. जनपद के कोरोना मुक्त होने के बाद फिर से संक्रमण के मामले मिलने से अधिकारियों की चिंता बढ़ गई है. कोविड की दो लहर झेलने के बाद भी जिले के स्वास्थ्य विभाग ने कोई सबक नहीं लिया है. मशीनें होने के बावजूद सीमांत के लोगों को कोरोना की जांच से लेकर इलाज के लिए मैदानी क्षेत्रों को दौड़ लगानी पड़ती है. हालात ऐसे हैं कि जनपद की 5.5 लाख की आबादी के लिए विभाग के पास 14 आईसीयू बेड हैं, यानी करीब 39 हजार लोगों पर एक आईसीयू बेड.

    जिला अस्पताल में 14 आईसीयू बेड हैं, जिसमें 9 वयस्कों के लिए और 5 बच्चों के लिए उपलब्ध हैं. कोरोना की RT-PCR जांच के लिए भी विभाग को हल्द्वानी पर निर्भर रहना पड़ता है, जबकि विभाग के पास जांच की मशीन उपलब्ध है लेकिन इसे चलाने के लिए विभाग के पास कोई कर्मचारी नहीं है.

    कोरोना की तीसरी लहर को बच्चों के लिए घातक बताया जा रहा है, इसके बावजूद सीमांत जनपद में बाल रोग विशेषज्ञों की भारी कमी है. कई अन्य विभागों में भी चिकित्सकों के पद अभी तक नहीं भरे जा सके हैं. इन खामियों को देखकर यह कहना गलत नहीं होगा कि जनपद का स्वास्थ्य महकमा खुद ही बीमार है. अव्यवस्थाओं के चलते पिथौरागढ़ में तीसरी लहर से निपटने को स्वास्थ्य विभाग भगवान भरोसे ही है.

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