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COVID-19: पिथौरागढ़ में काली नदी में 4 नेपाली युवक कूदे, तीन पहुंचे अपने देश
Pithoragarh News in Hindi

Vijay Vardhan | News18 Uttarakhand
Updated: March 31, 2020, 9:40 AM IST
COVID-19: पिथौरागढ़ में काली नदी में 4 नेपाली युवक कूदे, तीन पहुंचे अपने देश
पिथौरागढ़ में 800 से ज्यादा नेपाली मजदूर वतन वापसी की राह देख रहे हैं

धारचूला में बीते 4 रोज से सैकड़ों नेपाली मजदूर इकट्ठा हुए हैं, लेकिन नेपाल सरकार द्वारा पुल नहीं खोलने के चलते इनकी स्वदेश वापसी नहीं हो पा रही है. इसके चलते ये इस कदर परेशान हो गए हैं कि 4 नेपालियों ने दोनों मुल्कों को बांटने वाली काली नदी में छलांग लगा दी.

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पिथौरागढ़. कोरोना वायरस (Coronavirus) के संक्रमण को लेकर लॉकडाउन (Lockdown) में अपने घर जाने की जद्दोजहद हर जगह दिख रही है. उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले की बॉर्डर तहसील धारचूला में तो स्वदेश लौटने के लिए नेपाली नागरिक (Nepali Citizen) अपनी जिंदगी तक को दाँव पर लगा रहे हैं. असल मे धारचूला में बीते 5 रोज से सैकड़ों नेपाली मजदूर इकट्ठा हुए हैं, लेकिन नेपाल सरकार द्वारा पुल नहीं खोलने के चलते इनकी स्वदेश वापसी नहीं हो पा रही है. इसके चलते ये इस कदर परेशान हो गए हैं कि 4 नेपालियों ने दोनों मुल्कों को बांटने वाली काली नदी में छलांग लगा दी. इन 4 लोगों में 3 तैरकर वतन वापसी में सफल रहे, जबकि 1 नेपाली नागरिक को थक-हारकर वापस भारत लौटना पड़ा.

800 नेपाली मजदूर धारचूला में जमा हो गए हैं

ये मजदूर अपनी नेपाल सरकार से इस कदर नाराज है कि इन्होंने अपनी सरकार के खिलाफ ही जोरदार प्रदर्शन भी किया है. नेपालियों का कहना है कि उनकी सरकार भारत में फंसे नेपालियों के साथ ऐसा व्यवहार कर रही है, जैसे वो विदेशी हों. धारचूला के एसडीएम अनिल कुमार ने कहना है कि अलग-अलग जिलों से करीब 800 नेपाली मजदूर धारचूला में जमा हो गए हैं और इनकी संख्या आए दिन बढ़ रही है.



नेपाल के अधिकारी बना रहे हैं ये बहाना



भारतीय प्रशासन कई बार नेपाल के अधिकारियों से अपने नागरिकों को ले जाने की मांग कर चुका है, लेकिन नेपाली अधिकारी लॉकडाउन का बहाना बना रहे हैं. पहले नेपाल प्रशासन ने पहले 31 मार्च तक बॉर्डर सील किया था, लेकिन अब बढ़ाकर 7 अप्रैल तक दिया गया है.

पिथौरागढ़ में रहने और खाने का इंतजाम

डीएम पिथौरागढ़ विजय कुमार ने बताया कि नेपाली नागरिकों के रहने-खाने का पूरा इंतजाम किया गया है. यहां पहुंचे नेपालियों को अलग-अलग ग्रुप में रखा जा रहा है. लेकिन सवाल ये है कि आखिर भारतीय प्रशासन संकट की इस घड़ी में अपने नागरिकों को छोड़कर कब तक नेपालियों का ध्यान रख पायेगा?

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First published: March 31, 2020, 9:35 AM IST
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