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30 घंटे नहीं अब सिर्फ़ एक घंटे में उड़कर पहुंचें देहरादून से पिथौरागढ़

30 घंटे नहीं अब सिर्फ़ एक घंटे में उड़कर पहुंचें देहरादून से पिथौरागढ़

पिथौरागढ़ राज्य का पहला ऐसा पहाड़ी ज़िला बनने जा रहा है, जहां से नियमित उड़ान शुरू होंगी.

पिथौरागढ़ राज्य का पहला ऐसा पहाड़ी ज़िला बनने जा रहा है, जहां से नियमित उड़ान शुरू होंगी.

उड़ान योजना के तहत नैनी-सैनी एयरपोर्ट से 8 अक्टूबर को देहरादून से पिथौरागढ़ के लिए पहला हवाई जहाज उड़ान भरेगा.

    पिथौरागढ़ के लोगों का 24 साल पुराना हवाई सफ़र का सपना जल्द पूरा होने जा रहा है. लम्बी जद्दोजहद के बाद नैनी-सैनी एयरपोर्ट से इसी हफ्ते नियमित उड़ान शुरू होने जा रही है. उड़ान योजना के तहत 8 अक्टूबर को देहरादून से पिथौरागढ़ के लिए पहला हवाई जहाज उड़ान भरेगा. पिथौरागढ़ के हवाई सेवा से जुड़ने पर सम्भावनाओं को कई द्वार एक साथ खुलने की उम्मीद है. इसके बाद सिर्फ़ एक घंटे में पिथौरागढ़ से देहरादून पहुंचा जा सकेगा जिसमें सड़क मार्ग से अभी करीब 30 घंटे का समय लग जाता है. शुरुआत में हवाई सफ़र का किराया भी मात्र 1570 रुपये ही होगा.

    बेशुमार सौन्दर्य से लबरेज़ पिथौरागढ़ ज़िला प्रदेश और देश की मुख्यधारा से कोसों दूर है. लम्बा पहाड़ी सफ़र होने के कारण यहां विकास की बयार भी देर से पहुंचती है लेकिन अब पहली बार पिथौरागढ़ राज्य में किसी चीज़ में लीड लेने जा रहा है. पिथौरागढ़ राज्य का पहला ऐसा पहाड़ी ज़िला बनने जा रहा है, जहां से नियमित उड़ान शुरू होंगी.

    नैनी-सैनी एयरपोर्ट अपनी पहली उड़ान के लिए पूरी तरह तैयार है. डीजीसीए और बीसीएएस की तमाम आपत्तियों को दूर कर इसी हफ्ते सीमांत प्रांत के लोगों को वह सौगात मिलने जा रही है, जिसका इंतज़ार दशकों से रहा है.

    केन्द्र ने नैनी-सैनी एयरपोर्ट को उड़ान-टू प्रोजेक्ट में शामिल किया है. यही वजह है कि अब लोग मामूली खर्चे में हवाई सफ़र का मज़ा ले सकेंगे. पहले चरण में नैनी-सैनी एयरपोर्ट से देहरादून के लिए नौ सीटर जहाज का नियमित तौर पर संचालन होगा. इसके बाद हैरिटेज एविएशन पिथौरागढ़ से पंतनगर और पिथौरागढ़ से गाजियाबाद के तक भी जहाज उड़ाएगा. चीन और नेपाल सीमा से सटे पिथौरागढ़ जिले के हवाई सेवा से जुड़ने पर यहां विकास की नई रोशनी भी पहुंचेगी.

    पिथौरागढ़ में प्रकृति ने अपना सौन्दर्य जमकर बिखेरा है. इसीलिए माना जा रहा है कि हवाई सेवा से जुड़ने पर सबसे अधिक लाभ पर्यटन कारोबार को होगा. मिलम, रालम जैसे विश्व विख्यात ग्लेशियर इसी ज़िले में हैं. यही नहीं पंचाचूली की चोटियां भी यहां हैं. काफी दुर्गम सफर होने के बावजूद चौकोड़ी और मुनस्यारी जैसे पर्यटन स्थल साल भर सैलानियों से भरे रहते हैं. ऐसे में सस्ती और सुगम हवाई सेवा यहां के विकास को चार चॉंद तो लगाएगी ही, पलायन की रफ्तार को भी थामेगी.

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