हाईकोर्ट के निर्देश के बावजूद हिमालयी इलाकों में फंसे दर्जनों गांवों में नहीं पहुंची राहत

स्थानीय प्रशासन का दावा है कि धारचूला में प्रभावित इलाकों के लिए सभी जरूरी सामान इकठ्ठा कर लिया गया है. लेकिन वायुसेना का हेलीकॉप्टर नहीं मिलने से राहत प्रभावित इलाकों तक नहीं पहुंच पाई है.

Vijay Vardhan | News18 Uttarakhand
Updated: October 13, 2018, 11:26 PM IST
हाईकोर्ट के निर्देश के बावजूद हिमालयी इलाकों में फंसे दर्जनों गांवों में नहीं पहुंची राहत
भारत के लोगों को चीन और नेपाल की रसद पर जिंदा रहना पड़ रहा है.
Vijay Vardhan | News18 Uttarakhand
Updated: October 13, 2018, 11:26 PM IST
उत्तराखंड हाईकोर्ट के निर्देश के बावजूद धारचूला के उच्च हिमालयी इलाकों में फंसे दर्जनों गांव वालों को अभी भी राहत नहीं मिल पाई है. हाईकोर्ट ने प्रभावित इलाकों में हेलीकॉप्टर की मदद से 24 घंटें के भीतर
राहत पहुंचाने के निर्देश दिए थे. लेकिन 24 घंटे से अधिक का वक्त गुजरने के बाद भी शासन-प्रशासन कुछ नहीं कर पाया.

बता दें कि पिथौरागढ़ में धारचूला तहसील के चीन और नेपाल से सटे दर्जनों गांवों का शेष दुनिया से सम्पर्क कटा हुआ है. सम्पर्क कटने से इन इलाकों में रोजमर्रा की चीजों का भारी टोटा पड़ा है. हालात इस हद तक पहुंच गए हैं कि भारत के लोगों को चीन और नेपाल की रसद पर जिंदा रहना पड़ रहा है. 11 अक्टूबर को सामाजिक कार्यकर्ता महेन्द्र बुदियाल ने इस मामले पर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी. उस याचिका पर हाईकोर्ट ने सरकार को 24 घंटों के भीतर राशन, दाल, सब्जी, दूध, गैस सिलेन्डर और मेडिकल सुविधाएं प्रभावितों तक पहुंचाने के निर्देश दिये थे. लेकिन तय समय बीतने पर भी इन इलाकों को कोई राहत नहीं मिल पाई है.

स्थानीय प्रशासन का दावा है कि धारचूला में प्रभावित इलाकों के लिए सभी जरूरी सामान इकठ्ठा कर लिया गया है. लेकिन वायुसेना का हेलीकॉप्टर नहीं मिलने से राहत प्रभावित इलाकों तक नहीं पहुंच पाई है. लखनपुर-नजगं के बीच भारी भू-कटाव के चलते मालपा से आगे की आवाजाही ठप है. ऐसे में गुंजी, गर्ब्यांग, नांभी, रौंककौंग, कुटी और नपल्चु जैसे दर्जनों गांवों के लोग खुद को जिंदा रखने के लिए काफी जद्दोजहद कर रहे हैं.

हाईकोर्ट के फरमान के बाद भी प्रभावितों को मदद नहीं मिल पाने से स्पष्ट है कि शासन-प्रशासन को न कोर्ट की परवाह है और न ही प्रकृति के दंश झेल रहे प्रभावितों की.

 
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